जुर्माना देय जब डिफ़ॉल्ट में कर
कर में व्यतिक्रम होने पर देय शास्ति
20221. 21[(1) जब कोर्इ निर्धारिती कर अदा करने में चूक करता है या चूक करने वाला समझा जाता है, तो वह बकाया22 रकम और धारा 220 की उपधारा (2) के अंतर्गत संदेय ब्याज की रकम के अतिरिक्त, ऐसी रकम शास्ति के रूप में भुगतान करने के दायित्वाधीन होगा जिसका 23[निर्धारण] अधिकारी निदेश दे22 और चालू रहने वाली चूक की दशा में, ऐसी अतिरिक्त रकम या रकमें देने के दायित्वाधीन होगा जिसका या जिनका 23[निर्धारण] अधिकारी समय-समय पर निदेश दे, किंतु इस प्रकार की शास्ति की कुल रकम बकाया कर की रकम से अधिक न होने पाए :
परन्तु ऐसी किसी शास्ति का उद्ग्रहण करने से पूर्व निर्धारिती को सुनवार्इ का उचित अवसर दिया जाएगा :
24[परन्तु यह और कि जहां निर्धारिती 23[निर्धारण] अधिकारी के समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है कि चूक अच्छे और पर्याप्त कारणों22 से हुर्इ थी, वहां इस धारा के अंतर्गत कोर्इ शास्ति उद्गृहीत नहीं की जाएगी।]
25[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी निर्धारिती का इस उपधारा के अंतर्गत किसी शास्ति के लिए दायित्वाधीन होना केवल इस तथ्य के कारण समाप्त नहीं हो जाएगा कि ऐसी शास्ति उद्गृहीत किए जाने के पहले उसने वह कर अदा कर दिया है।]
(2) जहां कर की वह रकम, जिसके भुगतान में चूक होने के संबंध में शास्ति उद्गृहीत की गर्इ थी, किसी अंतिम आदेश के परिणामस्वरूप संपूर्ण रूप से घटा दी गर्इ है, वहां उद्गृहीत शास्ति रद्द कर दी जाएगी और भुगतान की गर्इ शास्ति की रकम का प्रतिदाय किया जाएगा।
20. तारीख 10.7.1967 का पत्र [फा.सं.16/87/67-आर्इ.टी.(बी)], तारीख 17.6.1994 का परिपत्र सं. 685, तारीख 12.8.1994 का परिपत्र सं. 686 तथा तारीख 28.2.1995 का परिपत्र सं. 696 भी देखें। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
21. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से प्रतिस्थापित।
22. "बकाया", "निदेश दे" और "अच्छे और पर्याप्त कारण" पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल खंड 3.
23. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
24. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व, दूसरा परंतुक निम्नानुसार था :
"परन्तु यह और कि जहां आय-कर अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि चूक अच्छे और पर्याप्त कारणों से हुर्इ थी वहां इस धारा के अंतर्गत कोर्इ शास्ति उद्गृहीत नहीं की जाएगी।"
25. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

