आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 216

बहुत मूल्यवान समझना के मामले, आदि में निर्धारिती द्वारा देय ब्याज

धारा

धारा संख्या

216

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

बहुत मूल्यवान समझना के मामले, आदि में निर्धारिती द्वारा देय ब्याज

बहुत मूल्यवान समझना के मामले, आदि में निर्धारिती द्वारा देय ब्याज

80अव-प्राक्कलन आदि की दशा में निर्धारिती द्वारा संदेय ब्याज

81216. जहां नियमित निर्धारण करने पर 82[निर्धारण] अधिकारी को पता चलता है कि किसी निर्धारिती ने--

83[() 84[धारा 209क या धारा 212] के अंतर्गत अपने द्वारा संदेय कर को अव-प्राक्कलन किया है और तद्द्वारा पहली दो किस्तों में से किसी में संदेय रकम घटा दी है; या]

() धारा 213 के अधीन, अपनी आय के किसी भाग पर अग्रिम कर का संदाय गलत तौर पर आस्थगित कर दिया है,

वहां वह यह निदेश दे सकेगा कि निर्धारिती 85[पंद्रह] प्रतिशत प्रतिवर्ष पर साधारण ब्याज का भुगतान--

(i) खंड () में निर्दिष्ट दशा में उस अवधि के लिए जिसके दौरान भुगतान कम था, उस अंतर पर करेगा जो ऐसी हर एक किस्त में भुगतान की गर्इ रकम और उस रकम के बीच है, जो उस वर्ष के दौरान वास्तव में भुगतान किए गए संकलित अग्रिम कर को ध्यान में रखते हुए, किया जाना चाहिए था, और

(ii) खंड () में निर्दिष्ट दशा में, उस अवधि के लिए करेगा जिसके दौरान अग्रिम कर का भुगतान इस प्रकार आस्थगित किया गया था।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसी किस्त के बारे में, जो ऐसे पूर्ववर्ष के प्रारंभ से, जिसके संबंध में वह संदत्त की जानी है, छह मास की समाप्ति के पूर्व देय होती है, यह समझा जाएगा कि वह उक्त छह मास की समाप्ति के पंद्रह दिन पश्चात् देय हुर्इ है।

 

80. नियम 119क देखें।

81. तारीख 29.2.1980 का पत्र [फा.सं. 400/58/78-आर्इ.टी.सी.सी.] भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

82. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

83. वित्त अधिनियम, 1969 द्वारा 1.4.1970 से प्रतिस्थापित।

84. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से "धारा 212 की उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (3क)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

85. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से "बारह" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से "नौ" के स्थान पर "बारह" प्रतिस्थापित किया गया था, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.10.1967 से "छह" के स्थान पर "नौ" प्रतिस्थापित किया गया था और वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से "चार" के स्थान पर "छह" प्रतिस्थापित किया गया था।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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