निर्धारिती द्वारा स्वप्रेरणा से या निर्धारण अधिकारी के आदेश के अनुसरण में अग्रिम कर का संदाय
निर्धारिती द्वारा स्वप्रेरणा से या निर्धारण अधिकारी के आदेश के अनुसरण में अग्रिम कर का संदाय
210. (1) प्रत्येक व्यक्ति, जो धारा 208 के अधीन अग्रिम कर का भुगतान करने का दायी है (चाहे उसका नियमित निर्धारण के तौर पर उससे पूर्व निर्धारण हो चुका हो या नहीं) स्वप्रेरणा से धारा 211 में उल्लिखित प्रत्येक निश्चित तारीख को या उसके पूर्व, अपनी चालू आय पर ऐसे अग्रिम कर के, जो धारा 209 में दी गर्इ रीति से संगणित किया जाता है, ऐसे समुचित प्रतिशत का भुगतान करेगा जो उस धारा में उल्लिखित है।
(2) कोर्इ ऐसा व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अंतर्गत अग्रिम कर की किसी किस्त या किस्तों का भुगतान करता है, अपनी चालू आय के अपने प्राक्कलन और उस पर देय अग्रिम कर के अनुसार शेष किस्त या किस्तों में संदेय अग्रिम कर की रकम को घटा या बढ़ा सकेगा और तदनुसार वह ऐसी शेष किस्त या किस्तों में उक्त रकम का भुगतान कर सकेगा।
(3) किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में, जिस पर किसी पूर्ववर्ष की कुल आय के संबंध में नियमित निर्धारण के तौर पर पहले ही निर्धारण हो चुका है यदि निर्धारण अधिकारी की यह राय है कि ऐसा व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने का दायी है तो वह वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी समय किंतु फरवरी के अंतिम दिन के अपश्चात्, लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्यक्ति से धारा 209 में दी गर्इ रीति से परिकलित अग्रिम कर के भुगतान की अपेक्षा कर सकेगा और धारा 156 के अंतर्गत ऐसे व्यक्ति को मांग की सूचना जारी कर सकेगा जिसमें उस किस्त या किस्तों को उल्लिखित किया जाएगा, जिनमें ऐसे कर का भुगतान किया जाना है।
(4) यदि उपधारा (3) के अंतर्गत निर्धारण अधिकारी द्वारा कोर्इ आदेश किए जाने के पश्चात् और मार्च के प्रथम दिन के पूर्व किसी भी समय उपधारा (3) में निर्दिष्ट पूर्ववर्ष के बाद वाले किसी पूर्ववर्ष के संबंध में धारा 139 के अंतर्गत या धारा 142 की उपधारा (1) के अंतर्गत किसी सूचना के उत्तर में निर्धारिती द्वारा आय की विवरणी दी जाती है या निर्धारिती पर नियमित निर्धारण किया जाता है, तो निर्धारण अधिकारी संशोधित आदेश कर सकेगा और ऐसे निर्धारिती को धारा 156 के अंतर्गत मांग की सूचना जारी कर सकेगा, जिसमें निर्धारिती से यह अपेक्षा की गर्इ हो कि वह संशोधित आदेश की तारीख के पश्चात् आने वाली धारा 211 में विनिर्दिष्ट नियत तारीख को या प्रत्येक नियत तारीख को या उसके पूर्व, उस अग्रिम कर के, धारा 211 में विनिर्दिष्ट समुचित प्रतिशत का भुगतान करे, जो ऐसी विवरणी में घोषित कुल आय के आधार पर संगणित किया गया है या जिसके संबंध में पूर्वोक्त नियमित निर्धारण किया गया है।
(5) यदि उस व्यक्ति का, जिस पर निर्धारण अधिकारी का उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश या उपधारा (4) के अंतर्गत कोर्इ संशोधित आदेश तामील किया जाता है, अपना यह प्राक्कलन है कि उसकी चालू आय पर देय अग्रिम कर, ऐसे आदेश या संशोधित आदेश में उल्लिखित अग्रिम कर की रकम से कम होगा, तो वह निर्धारण अधिकारी को उस आशय की, विहित प्ररूप में सूचना भेजेगा और अपने प्राक्कलन के अनुसार ऐसे अग्रिम कर का भुगतान कर सकेगा जो सूचना की तारीख के पश्चात् आने वाली, धारा 211 में उल्लिखित नियत तारीख को या प्रत्येक नियत तारीख को या उसके पूर्व, धारा 211 में विनिर्दिष्ट उसके समुचित प्रतिशत से, धारा 209 में की गर्इ रीति से परिकलित किया जाता है।
(6) यदि उस व्यक्ति का, जिस पर निर्धारण अधिकारी का उपधारा (3) के अंतर्गत कोर्इ आदेश या उपधारा (4) के अंतर्गत कोर्इ संशोधित आदेश तामील किया जाता है, अपना यह प्राक्कलन है कि उसकी चालू आय पर देय अग्रिम कर, ऐसे आदेश या संशोधित आदेश में उल्लिखित या उपधारा (5) के अंतर्गत उसके द्वारा सूचित अग्रिम कर की रकम से अधिक होगा तो वह अपने प्राक्कलन के अनुसार ऐसे अग्रिम कर की, जो धारा 209 में दी गर्इ रीति से परिकलित किया जाता है, यथास्थिति ऐसी संपूर्ण उच्चतर रकम का या उसके समुचित भाग का, धारा 211 में उल्लिखित अंतिम किस्त की नियत तारीख को या उसके पूर्व भुगतान करेगा।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

