धारा 50कक का संशोधन
धारा 50कक का संशोधन।
21. आय-कर अधिनियम की धारा 50कक में,-
| (क) | "अल्पकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ समझा जाएगा :" शब्दों से समाप्त होने वाले आरंभिक भाग के स्थान पर, 23 जुलाई, 2024 से निम्नलिखित आरंभिक भाग रखा जाएगा, अर्थात् :- | |
| "धारा 2 के खंड (42क) या धारा 48 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां पूंजी आस्ति- |
| (क) | 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् अर्जित विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि की यूनिट या बाजार सहबद्ध डिबेंचर है ; या | |
| (ख) | असूचीबद्ध बंधपत्र या असूचीबद्ध डिबेंचर है, जिसका अंतरण या मोचन या परिपक्वता 23 जुलाई, 2024 को या उसके पश्चात् होती है, |
ऐसे डिबेंचर या यूनिट या बंधपत्र के अंतरण या मोचन या परिपक्वता के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत प्रतिफल के पूर्ण मूल्य को, जो,-
| (i) | डिबेंचर या यूनिट या बंधपत्र के अर्जन की लागत ; और | |
| (ii) | ऐसे अंतरण या मोचन या परिपक्वता के संबंध में पूर्णतया और अनन्य रूप से प्रोद्भूत व्यय, |
को घटा दिया गया है, उसे अल्पकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ समझा जाएगा :";
| (ख) | स्पष्टीकरण के खंड (ii) के स्थान पर 1 अप्रैल, 2026 से निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात् :- |
| (ii) | विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि" से,- |
| (क) | कोई पारस्परिक निधि चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो अभिप्रेत है, जो इसके कुल आगमों के पैंसठ प्रतिशत से अधिक का ऋण और धन बाजार लिखतों में विनिधान करती है; या | |
| (ख) | कोई निधि, जो इसके कुल आगमों के पैंसठ प्रतिशत या अधिक का, उपखंड (क) में निर्दिष्ट किसी निधि की यूनिटों में विनिधान करती है : |
परंतु विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि के संबंध में, यथास्थिति, ऋण और धन बाजार लिखतों या किसी निधि की यूनिटों में विनिधान की प्रतिशतता की संगणना दैनिक इतिअंक के वार्षिक औसत के संदर्भ में की जाएगी :
परंतु यह और कि इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "ऋण और धन बाजार लिखतों" के अंतर्गत, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा किसी भी नाम से ज्ञात ऋण और धन बाजार लिखतों के रूप में वर्गीकृत या विनियमित कोई प्रतिभूतियां भी हैं ।'।

