आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 206गग

उस व्यक्ति द्वारा, जिससे संग्रह किया गया है, स्थायी खाता संख्यांक दिए जाने की अपेक्षा

धारा

धारा संख्या

206गग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.1)

उस व्यक्ति द्वारा, जिससे संग्रह किया गया है, स्थायी खाता संख्यांक दिए जाने की अपेक्षा

उस व्यक्ति द्वारा, जिससे संग्रह किया गया है, स्थायी खाता संख्यांक दिए जाने की अपेक्षा

15[उस व्यक्ति द्वारा, जिससे संग्रह किया गया है, स्थायी खाता संख्यांक दिए जाने की अपेक्षा

206गग. (1) इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी राशि या रकम का, जिस पर अध्याय 17खख के अधीन स्रोत पर कर संग्रहणीय है, संदाय करने वाला कोर्इ भी व्यक्ति (जिसे इसमें इसके पश्चात् वह व्यक्ति, जिससे संग्रह किया गया है, कहा गया है) ऐसा कर संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को (जिसे इसमें इसके पश्चात् संग्रहकर्ता कहा गया है) अपना स्थायी खाता संख्यांक देगा जिसमें असफल रहने पर कर निम्नलिखित दरों से उच्चतर दर पर संगृहीत किया जाएगा, अर्थात् :–

(i) इस अधिनियम के सुसंगत उपबंध में विनिर्दिष्ट दर का दो गुना; या

(ii) पांच प्रतिशत की दर से।

(2) धारा 206ग की उपधारा (1क) के अधीन कोर्इ भी घोषणा तब तक विधिमान्य नहीं होगी जब तक ऐसी घोषणा में व्यक्ति अपना स्थायी खाता संख्यांक नहीं देता है।

(3) उस दशा में, जब उपधारा (2) के अधीन कोर्इ घोषणा अविधिमान्य हो जाती है, संग्रहकर्ता, उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर कर का संग्रह करेगा।

(4) धारा 206ग की उपधारा (9) के अधीन कोर्इ भी प्रमाणपत्र तब तक प्रदान नहीं किया जाएगा जब तक उस धारा के अधीन आवेदन में आवेदक का स्थायी खाता संख्यांक नहीं है।

(5) वह व्यक्ति, जिससे संग्रह किया गया है, अपना स्थायी खाता संख्यांक संग्रहकर्ता को देगा और उसे दोनों समस्त पत्राचार, बिलों, वाउचरों और ऐसे अन्य दस्तावेजों में उपदर्शित करेंगे जो एक दूसरे को भेजे जाते हैं।

(6) जहां संग्रहकर्ता को दिया गया स्थायी खाता संख्यांक अविधिमान्य है या उस व्यक्ति से संबंधित नहीं है, जिससे संग्रह किया गया है, वहां यह समझा जाएगा कि उस व्यक्ति ने, जिससे संग्रह किया गया है, संग्रहकर्ता को अपना स्थायी खाता संख्यांक नहीं दिया है और उपधारा (1) के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(7) इस धारा के उपबंध ऐसे अनिवासी को लागू नहीं होंगे जिसका भारत में स्थायी स्थापन नहीं है।

स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "स्थायी स्थापन" अभिव्यक्ति के अन्तर्गत कारबार का ऐसा कोर्इ नियत स्थान आता है जिसके माध्यम से उद्यम का कारबार पूर्णत: या भागत: चलाया जाता है।]

 

15. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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