एल्कोहाली लिकर, वनोत्पाद, स्क्रैप आदि में व्यापार के कारबार से लाभ और अभिलाभ
15घ[खख–स्रोत पर संग्रहण
एल्कोहाली लिकर, वनोत्पाद, स्क्रैप आदि में व्यापार के कारबार से लाभ और अभिलाभ
16206ग. 16क[16ख(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता है, क्रेता द्वारा संदेय रकम क्रेता के लेखा में से विकलित करते समय या ऐसी रकम17 उक्त क्रेता से नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट लेकर या किसी अन्य रीति से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, नीचे की सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के किसी माल के क्रेता से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि, जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, आय-कर के रूप में संगृहीत करेगा :
18[सारणी
| क्रम सं. | माल की प्रकृति | प्रतिशतता |
| (1) | (2) | (3) |
| (i) | मानव उपयोग के लिए एल्कोहाली लिकर | एक प्रतिशत |
| (ii) | तेंदु पत्ता | पांच प्रतिशत |
| (iii) | वन पट्टे के अधीन प्राप्त काष्ठ | ढार्इ प्रतिशत |
| (iv) | वन पट्टे के अधीन विहित पद्धति से भिन्न पद्धति से प्राप्त काष्ठ |
ढार्इ प्रतिशत |
| (v) | कोर्इ अन्य वनोत्पाद, जो काष्ठ या तेंदु पत्ता नहीं है | ढार्इ प्रतिशत |
| (vi) | स्क्रैप | एक प्रतिशत:] |
19[परंतु यह कि प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता है, 1 जून, 2003 को आरंभ होने वाली और उस तारीख के, जिसको काराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 प्रवृत्त होता है, ठीक पूर्ववर्ती दिन को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान क्रेता द्वारा संदेय रकम को क्रेता के खाते में नामे डालते समय या ऐसी रकम उक्त क्रेता से नकद रूप में या जारी चेक या ड्राफ्ट के रूप में या किसी अन्य ढंग से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, सारणी के, जैसी वह 1 जून, 2003 के ठीक पूर्व विद्यमान थी, स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के किसी माल के क्रेता से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि, जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, आय-कर के रूप में इस धारा के उपबंधों के अनुसार, जैसे वे 1 जून, 2003 के ठीक पूर्व विद्यमान थे, संगृहीत करेगा।]]
20[(1क) उपधारा (1क) में की किसी बात के होते हुए भी, किसी कर का संग्रहण ऐसे क्रेता की दशा में नहीं किया जाएगा, जो भारत में निवासी है, यदि ऐसा क्रेता कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को विहित प्ररूप21 में और विहित रीति में सत्यापित इस आशय की घोषणा लिखित रूप में दो प्रतियों में प्रस्तुत करता हैं कि पूर्वोक्त सारणी के स्तंभ (2) में निर्दिष्ट माल का वस्तुओं या चीजों के विनिर्माण, प्रसंस्करण या उत्पादन के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाना है न कि व्यापार के प्रयोजनों के लिए।
(1ख) इस धारा के अधीन कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, उपधारा (1क) में निर्दिष्ट घोषणा की एक प्रति उस मास के ठीक आगामी मास के सातवें दिन को या उसके पूर्व, जिसमें वह घोषणा उसको प्रस्तुत की जाती है, मुख्य आयुक्त या आयुक्त को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा।]
22[(1ग) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो पब्लिक सेक्टर कंपनी से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् "अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार" कहा गया है) किसी पार्किंग स्थान या पथकर प्लाजा या खान या खदान में कारबार के प्रयोजन के लिए ऐसे पार्किंग स्थान या पथकर प्लाजा या खान या खदान के उपयोग के लिए कोर्इ पट्टा या अनुज्ञप्ति देता है या कोर्इ संविदा करता है या अन्यथा किसी अधिकार या हित का, चाहे पूर्णत: या भागत:, अन्तरण करता है, उसमें के अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार द्वारा संदेय रकम को अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार के खाते में विकलित करते समय या उक्त अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार से ऐसी रकम नकद रूप में या किसी चैक या ड्राफ्ट के जारी किए जाने से या किसी अन्य ढंग से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, नीचे की सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति की ऐसी किसी अनुज्ञप्ति, संविदा या पट्टे के अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि, जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, आय-कर के रूप में संगृहित करेगा:
सारणी
| क्रम सं. | संविदा या अनुज्ञप्ति या पट्टे आदि की प्रकृति | प्रतिशतता |
| (1) | (2) | (3) |
| (i) | पार्किंग स्थान | दो प्रतिशत |
| (ii) | पथकर प्लाजा | दो प्रतिशत |
| (iii) | खान या खदान | दो प्रतिशत।] |
23[स्पष्टीकरण 1–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "खनन और खदान क्रिया" में खनिज तेल की खनन और खदान क्रिया सम्मिलित नहीं होगी।
स्पष्टीकरण 2–स्पष्टीकरण 1 के प्रयोजनों के लिए, "खनिज तेल" में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सम्मिलित है।]
(2) उपधारा (1) 24[या उपधारा (1ग)] के अधीन संग्रहण द्वारा कर वसूल करने की शक्ति, वसूली की किसी अन्य रीति पर कोर्इ प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी।
(3) उपधारा (1) 24[या उपधारा (1ग)] के अधीन रकम संगृहीत करने वाला व्यक्ति इस प्रकार संगृहीत रकम केन्द्रीय सरकार के खाते में या बोर्ड के निर्देशानुसार 25[विहित समय] के भीतर अदा करेगा :
26[परंतु यह कि इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार 1 अपै्रल, 2005 को या उसके पश्चात् कर का संग्रहण करने वाला व्यक्ति, संगृहीत किए गए कर का, केन्द्रीय सरकार के जमा खाते में विहित समय के भीतर संदाय करने के पश्चात्, 26क[ऐसी अवधि के जो विहित की जाए, ऐसे विवरण] तैयार करेगा और ऐसा विवरण को ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से सत्यापित कराकर तथा उसमें ऐसी विशिष्टियों का उल्लेख करते हुए तथा ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, विहित आय-कर प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा27।]
28[(4) इस धारा के उपबंधों के अनुसार संगृहीत और केन्द्रीय सरकार के जमा खाते में संदत्त कोर्इ रकम उस व्यक्ति की ओर से कर का संदाय समझी जाएगी, जिससे रकम संगृहीत की गर्इ है और ऐसे व्यक्ति की किसी विशिष्ट निर्धारण वर्ष में इस प्रकार संगृहीत रकम के लिए ऐसे नियमों के अनुसार, जो समय-समय पर बोर्ड द्वारा विहित किए जाएं, मुजरा दिया जाएगा।]
(5) इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसी रकम के नामे डाले जाने या प्राप्त किए जाने 29[के समय से ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए] उस क्रेता 30[या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार] को, जिसके खाते में ऐसी रकम नामे डाली गर्इ है या जिससे ऐसा संदाय प्राप्त किया जाता है, इस आशय का एक प्रमाणपत्र देगा कि कर का संग्रहण कर लिया गया है और उसमें इस प्रकार संगृहीत राशि, वह दर, जिससे कर संगृहीत किया गया है, और ऐसी अन्य विशिष्टियां विनिर्दिष्ट होंगी जो विहित31 की जाएं :
परंतु यह 33क[***] कि विहित आय-कर प्राधिकारी या उपधारा (3) में निर्दिष्ट ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति, 34[1 अपै्रल, 2008 को या उसके पश्चात प्रारंभ होने वाले] प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, विहित समय के भीतर, संगृहीत किए गए कर की रकम और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, विनिर्दिष्ट करते हुए विहित प्ररूप35 में एक विवरण तैयार करेगा और, यथास्थिति, उपधारा (1) में निर्दिष्ट क्रेता या उपधारा (1ग) में निर्दिष्ट अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार को परिदत्त करेगा।]
36[(5क) इस धारा के उपबंधों के अनुसार 37[1 अपै्रल, 2005 के पूर्व] कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति 38[प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात विहित समय के भीतर ऐसी विवरणियां तैयार करेगा और] ऐसे फार्म में और ऐसी रीति से सत्यापित रूप में और ऐसी विशिष्टियों को दर्शाते हुए और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, 39[विहित आय-कर प्राधिकारी या ऐसे अन्य प्राधिकारी या अभिकरण को, जो विहित किया जाए] परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा :40]
41[परंतु यह कि बोर्ड, यदि वह ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे तो, इस उपधारा में निर्दिष्ट ऐसे अन्य प्राधिकारी या अभिकरण के पास ऐसी विवरणियां फाइल करने के प्रयोजनों के लिए कोर्इ स्कीम बना सकेगा।]
42[(5ख) उपधारा (5क) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कर संग्रहण करने वाला कोर्इ व्यक्ति, ऐसे मामले से भिन्न किसी मामले में, जहां विक्रेता कोर्इ कंपनी, केंद्रीय सरकार या कोर्इ राज्य सरकार है, अपने विकल्प पर, ऐसी स्कीम* के अनुसार, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, विहित आय-कर प्राधिकारी को प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् विहित समय पर या उसके पूर्व किसी फ्लापी, डिस्कैट, मैग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सीडी रोम या किसी अन्य कंप्यूटर पठनीय संचार माध्यम पर (जिसे इसमें इसके आगे "कंप्यूटर संचार माध्यम" कहा गया है) और ऐसी रीति में, जो उस स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, ऐसी विवरणी परिदत्त कर सकेगा या करा सकेगा :
परंतु जहां कर का संग्रहण करने वाला व्यक्ति, कोर्इ कंपनी या केंद्रीय सरकार या कोर्इ राज्य सरकार है, वहां ऐसा व्यक्ति इस धारा के उपबंधों के अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, विहित समय के भीतर, उक्त स्कीम के अधीन ऐसी विवरणियां कंप्यूटर संचार माध्यम पर परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा।
(5ग) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी कंप्यूटर संचार माध्यम पर फाइल की गर्इ विवरणी उपधारा (5क) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए विवरणी समझी जाएगी और उसके अधीन की गर्इ किन्हीं कार्यवाहियों में, मूल को पेश करने के अतिरिक्त सबूत के बिना, मूल की किसी अंतर्वस्तु या उसमें उल्लिखित किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में ग्राºय होगी।
(5घ) जहां निर्धारण अधिकारी यह समझता है कि उपधारा (5ख) के अधीन परिदत्त की गर्इ या परिदत्त करार्इ गर्इ विवरणी त्रुटिपूर्ण है, वहां वह उस त्रुटि के बारे में कर का संग्रहण करने वाले व्यक्ति को सूचित कर सकेगा और उसे ऐसी सूचना की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर, जो इस निमित्त किए गए किसी आवेदन पर निर्धारण अधिकारी स्वविवेकानुसार अनुज्ञात करे, त्रुटि को ठीक करने का अवसर दे सकेगा और यदि, यथास्थिति, पन्द्रह दिन की उक्त अवधि या यथाअनुज्ञात अतिरिक्त अवधि के भीतर त्रुटि को ठीक नहीं किया जाता है तो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी विवरणी अविधिमान्य विवरणी मानी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसा व्यक्ति विवरणी देने में असफल रहा हो।]
(6) कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति, जो इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने में असफल रहता है, ऐसी असफलता के होते हुए भी उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार के खाते में कर का संदाय करने के लिए दायी होगा।
43[(6क) यदि इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी कोर्इ व्यक्ति संपूर्ण कर या उसके किसी भाग का संग्रहण नहीं करता है या संग्रहण करने के पश्चात् इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन यथाअपेक्षित कर का संदाय करने में असफल रहता है तो वह, किसी अन्य परिणाम पर, जो वह उपगत करे, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कर की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा जाएगा:
परंतु ऐसे व्यक्ति पर धारा 221 के अधीन कोर्इ शास्ति तब तक प्रभारित नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारण अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता है कि वह व्यक्ति उचित और प्रर्याप्त कारणों के बिना कर का संग्रहण और संदाय करने में असफल रहा है।]
(7) उपधारा (6) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि 44["कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति"] कर का संग्रहण नहीं करता है या कर का संग्रहण करने के पश्चात् इस धारा की अपेक्षा के अनुसार उसका संदाय करने में असफल रहता है तो वह कर की ऐसी रकम पर उस तारीख से, जिसको ऐसा कर संग्रहणीय था, उस तारीख तक जिसको कर का वास्तव में संदाय किया गया था प्रत्येक मास या उसके भाग के लिए 45[एक] प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगा 46[और ऐसा ब्याज उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार प्रत्येक तिमाही के लिए तिमाही विवरणी प्रस्तुत करने के पूर्व संदत्त किया जाएगा।]
(8) जहां कर पूर्वोक्त रूप में संदत्त नहीं किया गया है, वहां उसके संगृहीत किए जाने पर कर की रकम और साथ ही उपधारा (7) में निर्दिष्ट दर पर उस पर साधारण ब्याज की रकम 47["कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति"] की सभी आस्तियों पर प्रभार होगी।]
48[(9) जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि क्रेता 49[या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार] की कुल आय उपधारा (1) 49[या उपधारा (1ग)] में विनिर्दिष्ट सुसंगत दर से किसी निम्नतर दर पर कर के संग्रहण के लिए न्यायसंगत है वहां निर्धारण अधिकारी क्रेता 49[या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार] द्वारा इस बाबत किए गए किसी आवेदन50 पर उसे उपधारा (1) 49[या उपधारा (1ग)] में विनिर्दिष्ट सुसंगत दर से निम्नतर दर पर कर के संग्रहण के लिए प्रमाणपत्र देगा।
(10) जहां कोर्इ प्रमाणपत्र उपधारा (9) के अधीन दिया जाना है वहां कर के संग्रहण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति जब तक निर्धारण अधिकारी द्वारा ऐसा प्रमाणपत्र रद्द नहीं कर दिया जाता, उस प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट दरों पर कर का संग्रहण करेगा।
(11) बोर्ड, निर्धारिती की सुविधा और राजस्व के हितों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे नियम बना सकेगा जिसमें ऐसी दशाएं, जिनमें और ऐसी परिस्थितियां, जिनके अधीन उपधारा (9) के अधीन किसी प्रमाणपत्र को देने के लिए आवेदन किया जा सकेगा और वे शर्तें, जिनके अधीन ऐसा प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा, विनिर्दिष्ट होंगी और उसमें उससे संबंधित सभी अन्य विषयों का उपबंध होगा।]
51[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "क्रेता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो नीलामी या निविदा के रूप में अथवा किसी अन्य ढंग से, किसी विक्रय में, उपधारा (1) की सारणी में विनिर्दिष्ट प्रकृति का माल अथवा किसी ऐसे माल को प्राप्त करने का अधिकार अभिप्राप्त करता है, किंतु उसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं है :–
52[(i) कोर्इ पब्लिक सेक्टर कंपनी, केंद्रीय सरकार, कोर्इ राज्य सरकार और किसी विदेशी राज्य का कोर्इ राजदूतावास, कोर्इ उच्चायोग, दूतावास, आयोग, कौंसल कार्यालय और व्यापार प्रतिनिधि तथा कोर्इ क्लब; या
(ii) ऐसे माल के फुटकर विक्रय में क्रेता का, जो उसके द्वारा अपने व्यक्तिगत उपभोग के लिए क्रय किया गया हो;]
53[(ख) "स्क्रैप" से सामग्री के निमार्ण या यांत्रिक कार्यकरण से ऐसा अपशिष्ट और स्क्रैप अभिप्रेत है जो टूटन, कटार्इ, टूट-फूट और अन्य कारणों से उस रूप में निश्चित रूप से उपभोज्य नहीं है ;
(ग) "विक्रेता" से केंद्रीय सरकार, कोर्इ राज्य सरकार या कोर्इ स्थानीय निकाय प्राधिकारी या केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोर्इ निगम या प्राधिकरण या कोर्इ कंपनी या फर्म या सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत ऐसा व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब भी है जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या व्यवसाय से कुल विक्रय सकल प्राप्तियां या आवर्त उस वित्तीय वर्ष से, जिसमें उपधारा (1) की सारणी में विनिर्दिष्ट प्रकृति के माल का विक्रय किया जाता है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमा से अधिक है।]
15घ. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.6.1988 से अंत:स्थापित।
16. परिपत्र सं. 585, तारीख 27.11.1990 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
16क. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से निम्नलिखित के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व इसका प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से संशोधन किया गया था :
"(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो धारा 44कग में निर्दिष्ट विक्रेता है, उस धारा में निर्दिष्ट क्रेता द्वारा दी जाने वाली रकम क्रेता के खाते में से विकलित करते समय या ऐसी रकम उक्त क्रेता से नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट लेकर या किसी अन्य रीति से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, नीचे की सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के किसी माल के क्रेता से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि; जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, उसमें अंतर्विष्ट आय पर आय कर के रूप में संगृहित करेगा।
सारणी
| क्रम सं. | माल की प्रकृति | प्रतिशत |
| (1) | (2) | (3) |
| (i) | मानव उपयोग के लिए एल्कोहाली लिकर (भारत में बनी विदेशी शराब से भिन्न) |
पंद्रह प्रतिशत |
| (ii) | वन पट्टे के अधीन प्राप्त टिंबर | पंद्रह प्रतिशत |
| (iii) | वन पट्टे के अधीन विहित पद्धति से भिन्न पद्धति से प्राप्त टिंबर |
पांच प्रतिशत |
| (iv) | कोर्इ अन्य वनोत्पाद, जो टिंबर नहीं है | पंद्रह प्रतिशत : |
परन्तु जहां निर्धारण अधिकारी क्रेता द्वारा किए गए आवेदन पर विहित फार्म में यह प्रमाणपत्र देता है कि उसके सर्वोत्तम विश्वास के अनुसार पूर्वोक्त सारणी में निर्दिष्ट किसी माल का वस्तुओं या चीजों के बनाए जाने, प्रसंस्करण करने या उत्पादन के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाना है न कि व्यापारिक प्रयोजनों के लिए, वहां इस उपधारा के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तक वह प्रमाणपत्र प्रवर्तन में रहता है।"
16ख. नियम 37ग से 37ज और प्ररूप सं. 13, 27ख, 27ग, 27घ और 27ड़ देखिए।
17. "ऐसी रकम" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
18. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से तथा वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से प्रतिस्थापित, सारणी निम्न प्रकार थी :
"सारणी
| क्रम सं. | माल की प्रकृति | प्रतिशत |
| (1) | (2) | (3) |
| (i) | मानव उपयोग के लिए एल्कोहाली लिकर और तेंदु पत्ता | दस प्रतिशत |
| (ii) | वन पट्टे के अधीन प्राप्त (काष्ठ) | पंद्रह प्रतिशत |
| (iii) | वन पट्टे के अधीन विहित पद्धति से भिन्न पद्धति से प्राप्त काष्ठ |
पांच प्रतिशत |
| (iv) | कोर्इ अन्य वनोत्पाद, जो काष्ठ या तेंदू पत्ता नहीं है | पंद्रह प्रतिशत |
| (v) | स्क्रैप ............... | दस प्रतिशत" |
19. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, परन्तुक इस प्रकार था:
"परन्तु जहां निर्धारण अधिकारी, क्रेता द्वारा किए गए आवेदन पर विहित प्ररूप में यह प्रमाणपत्र देता है कि सर्वोत्तम विश्वास के अनुसार पूर्वोक्त सारणी में विनिर्दिष्ट किसी माल का, वस्तुओं या चीजों के विनिर्माण, प्रसंस्करण या उत्पादन के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाना है न कि व्यवसायिक प्रयोजनों के लिए, वहां इस उपधारा के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तक वह प्रमाणपत्र प्रवृत्त रहता है।"
20. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से अंत:स्थापित।
21. नियम 37ग और प्ररूप सं. 27ग देखिए।
22. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
23. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से अंत:स्थापित।
24. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
25. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "सात दिन" के स्थान पर प्रतिस्थापित। नियम 37क भी देखिए।
26. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।
26क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से "प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसम्बर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि के लिए तिमाही विवरण" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
27. नियम 31क तथा प्ररूप सं. 27ड़थ देखिए।
28. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (सं.2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से, वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2005 से तथा वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से यथा संशोधित उपधारा (4) इस प्रकार थी :
"(4) इस धारा के उपबंधों के अनुसार संगृहीत और उपधारा (3) के अधीन दी गर्इ रकम उस व्यक्ति की ओर से कर का भुगतान समझी जाएगी जिससे रकम संगृहीत की गर्इ है और इस अधिनियम के अधीन किए गए निर्धारण में उपधारा (5) के अधीन दिए गए प्रमाणपत्र के प्रस्तुत किए जाने पर इस प्रकार संगृहीत रकम के लिए उस निर्धारण वर्ष के लिए जिसके लिए ऐसी आय निर्धारणीय है, उसका मुजरा किया जाएगा :
परंतु जहां कोर्इ रकम इस धारा के उपबंधों के अनुसार 1 अपै्रल, 2008 को या उसके पश्चात् संगृहीत की जाती है और उपधारा (3) के अधीन केन्द्रीय सरकार के जमा खाते में संदत्त की जाती है, वहां संगृहीत और उपधारा (5) के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट विवरण में विनिर्दिष्ट कर की रकम उस व्यक्ति की ओर से कर का संदाय समझी जाएगी, जिससे रकम संगृहीत की गर्इ है और इस अधिनियम के अधीन किए गए निर्धारण में इस प्रकार संगृहीत रकम के लिए उसे उस निर्धारण वर्ष के लिए, जिसके लिए ऐसी आय निर्धारणीय है, प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए बिना उसका मुजरा किया जाएगा।"
29. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "दस दिन के भीतर उस क्रेता को" के संबंधों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
30. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
31. नियम 37घ और प्ररूप सं. 27घ देखिए।
32. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।
33. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2010 से पहले परन्तुक का लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से, वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से और वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2005 से यथा संशोधित पहला परन्तुक इस प्रकार था :
"परंतु ऐसे मामले में, जहां कर इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार 1 अपै्रल, 2010 को या उसके पश्चात् संगृहीत किया गया है, कोर्इ प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकेगा :"
33क. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2010 से "और" शब्द का लोप किया गया।
34. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2005 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
35. नियम 31कख तथा प्ररूप सं. 26कध देखिए।
36. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
37. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
38. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से "प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 सितम्बर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली कालावधि के लिए अर्धवार्षिक विवरणियां तैयार करेगा और ऐसी विवरणियां" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
39. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से "विहित आय-कर प्राधिकारी को" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
40. नियम 37ड़ और प्ररूप सं. 27ड़ देखिए।
41. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
42. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से उपधारा (5ख) और (5ग) के स्थान पर उपधारा (5ख), (5ग) और (5घ) प्रतिस्थापित इससे पूर्व यह वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से उपधारा (5ख) और (5ग) अंत:स्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (5ख) और (5ग) निम्न प्रकार थी :
"(5ख) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी फ्लापी, डिस्कैट, मैग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सी.डी. रोम या किसी अन्य कम्प्यूटर पठनीय संचार माध्यम पर (जिसे इसमें इसके आगे कम्प्यूटर संचार माध्यम कहा गया है) जो बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट* की जाए, फाइल की गर्इ विवरणी उपधारा (5क) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए विवरणी समझी जाएगी और किसी मूल अंतर्वस्तु या उसमें उल्लिखित किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में मूल के पेश किए जाने के और सबूत के बिना उसके अधीन की किन्हीं कार्यवाहियों में ग्राह्य होगी।
(5ग) उपधारा (5ख) के अधीन फाइल की गर्इ कोर्इ विवरणी निम्नलिखित शर्तों को पूरा करेगी, अर्थात्–
(क) कम्प्यूटर संचार माध्यम पर विशिष्टियां प्राप्त करते समय कम्प्यूटर संचार माध्यम पर फाइल किए गए दस्तावेजों का सूक्ष्मवीक्षण करके आवश्यक नियंत्रण रखा जाएगा और ऐसे संचार माध्यम को निर्धारण अधिकारी द्वारा सम्यक् रूप से अधिप्रमाणित किया जाएगा;
(ख) निर्धारण अधिकारी डाटा को क्षति पहुंचाए बिना अनुलिपि करके, अंतरण करके, चित्रांकन करके अथवा स्टोर करके ऐसे कम्प्यूटर संचार माध्यम को बनाए रखने में सम्यक् सावधानी बरतेगा।"
*नियम 37ड़क और प्ररूप सं. 27ख देखिए। स्रोत पर संगृहीत कर की विवरणी इलैक्ट्रानिक रूप से फाइल करना स्कीम, 2005 भी देखिए।
43. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से अंत:स्थापित।
44. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से "विक्रेता" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
45. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "1¼" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किए गए अंक वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से "दौ" के स्थान पर प्रतिस्थापित किए गए थे।
46. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।
47. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से "विक्रेता" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
48. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से उपधारा (9), (10) और (11) अंत:स्थापित।
49. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
50. नियम 37छ और 37ज तथा प्ररूप सं. 13 देखिए।
51. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।
52. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से उपखंड (i), (ii) तथा (iii) के स्थान पर प्रतिस्थापित। खंड (i) और (ii) इस प्रकार थे :
"(i) कोर्इ पब्लिक सेक्टर कंपनी ;
(ii) ऐसे विक्रय के अनुसरण में प्राप्त ऐसे माल के फुटकर विक्रय में कोर्इ क्रेता ;"
53. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से खंड (ख) के स्थान पर खंड (ख) और (ग) प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (ख) इस प्रकार था :
'(ख) "विक्रेता" से केन्द्रीय सरकार, कोर्इ राज्य सरकार या कोर्इ स्थानीय प्राधिकारी या किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या प्राधिकरण या कोर्इ कंपनी या फर्म या सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है।'
[वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा संशोधित रूप में]

