आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 206ग

मुनाफे और शराबी शराब, वन उपज, स्क्रैप, आदि में व्यापार के कारोबार से लाभ

धारा

धारा संख्या

206ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

मुनाफे और शराबी शराब, वन उपज, स्क्रैप, आदि में व्यापार के कारोबार से लाभ

मुनाफे और शराबी शराब, वन उपज, स्क्रैप, आदि में व्यापार के कारोबार से लाभ

17[खख--स्रोत पर संग्रहण

एल्कोहाली लिकर, वनोत्पाद, स्क्रैप आदि में व्यापार के कारबार से लाभ और अभिलाभ

18206ग. 19[20(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता है, क्रेता द्वारा संदेय रकम क्रेता के लेखा में से विकलित करते समय या ऐसी रकम21 उक्त क्रेता से नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट लेकर या किसी अन्य रीति से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, नीचे की सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के किसी माल के क्रेता से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि, जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, आय-कर के रूप में संगृहीत करेगा :

22[सारणी

क्रम सं. माल की प्रकृति प्रतिशत
(1) (2) (3)
(i) मानव उपयोग के लिए एल्कोहाली लिकर (भारत में बनी विदेशी शराब से भिन्न) और तेंदु पत्ता दस प्रतिशत
(ii) वन पट्टे के अधीन प्राप्त (टिंबर) पंद्रह प्रतिशत
(iii) वन पट्टे के अधीन विहित पद्धति से भिन्न पद्धति से प्राप्त टिंबर पांच प्रतिशत
(iv) कोर्इ अन्य वनोत्पाद, जो टिंबर या तेंदु पत्ता नहीं है पंद्रह प्रतिशत :

परन्तु जहां निर्धारण अधिकारी, क्रेता द्वारा किए गए आवेदन पर विहित प्ररूप23 में यह प्रमाणपत्र देता है कि सर्वोत्तम विश्वास के अनुसार पूर्वोक्त सारणी में विनिर्दिष्ट किसी माल का, वस्तुओं या चीजों के विनिर्माण, प्रसंस्करण24 या उत्पादन के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाना है न कि व्यवसायिक प्रयोजनों के लिए, वहां इस उपधारा के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तक वह प्रमाणपत्र प्रवृत्त रहता है।]

(2) उपधारा (1) के अधीन संग्रहण द्वारा कर वसूल करने की शक्ति, वसूली की किसी अन्य रीति पर कोर्इ प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी।

(3) उपधारा (1) के अधीन रकम संगृहीत करने वाला व्यक्ति इस प्रकार संगृहीत रकम केन्द्रीय सरकार के खाते में या बोर्ड के निर्देशानुसार सात दिन के भीतर अदा करेगा।

(4) इस धारा के उपबंधों के अनुसार संगृहीत और उपधारा (3) के अधीन दी गर्इ रकम उस व्यक्ति की ओर से कर का भुगतान समझी जाएगी जिससे रकम संगृहीत की गर्इ है और इस अधिनियम के अधीन किए गए निर्धारण में उपधारा (5) के अधीन दिए गए प्रमाणपत्र के प्रस्तुत किए जाने पर इस प्रकार संगृहीत रकम के लिए उस निर्धारण वर्ष के लिए जिसके लिए ऐसी आय निर्धारणीय है, उसका मुजरा किया जाएगा।

(5) इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसी रकम के नामे डाले जाने या प्राप्त किए जाने की तारीख से दस दिन के भीतर उस क्रेता को, जिसके खाते में ऐसी रकम नामे डाली गर्इ है या जिससे ऐसा संदाय प्राप्त किया जाता है, इस आशय का एक प्रमाणपत्र देगा कि कर का संग्रहण कर लिया गया है और उसमें इस प्रकार संगृहीत राशि, वह दर, जिससे कर संगृहीत किया गया है, और ऐसी अन्य विशिष्टियां विनिर्दिष्ट होंगी जो विहित25 की जाएं।

26[(5क) इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 सितम्बर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली कालावधि के लिए अर्ध वार्षिक विवरणियां तैयार करेगा और ऐसी विवरणियां ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से सत्यापित रूप में और ऐसी विशिष्टियों को दर्शाते हुए और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, विहित आय-कर प्राधिकारी27 को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा।28]

29[(5ख) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी फ्लापी, डिस्कैट, मैग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सी.डी. रोम या किसी अन्य कम्प्यूटर पठनीय संचार माध्यम पर (जिसे इसमें इसके आगे कम्प्यूटर संचार माध्यम कहा गया है) जो बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट30 की जाए, फाइल की गर्इ विवरणी उपधारा (5क) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए विवरणी समझी जाएगी और किसी मूल अंतर्वस्तु या उसमें उल्लिखित किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में मूल के पेश किए जाने के और सबूत के बिना उसके अधीन की किन्हीं कार्यवाहियों में ग्राह्य होगी।

(5ग) उपधारा (5ख) के अधीन फाइल की गर्इ कोर्इ विवरणी निम्नलिखित शर्तों को पूरा करेगी, अर्थात्--

() कम्प्यूटर संचार माध्यम पर विशिष्टियां प्राप्त करते समय कम्प्यूटर संचार माध्यम पर फाइल किए गए दस्तावेजों का सूक्ष्मवीक्षण करके आवश्यक नियंत्रण रखा जाएगा और ऐसे संचार माध्यम को निर्धारण अधिकारी द्वारा सम्यक् रूप से अधिप्रमाणित किया जाएगा;

() निर्धारण अधिकारी डाटा को क्षति पहुंचाए बिना अनुलिपि करके, अंतरण करके, चित्रांकन करके अथवा स्टोर करके ऐसे कम्प्यूटर संचार माध्यम को बनाए रखने में सम्यक् सावधानी बरतेगा।]

(6) कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति, जो इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने में असफल रहता है, ऐसी असफलता के होते हुए भी उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार के खाते में कर का संदाय करने के लिए दायी होगा।

(7) उपधारा (6) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि विक्रेता कर का संग्रहण नहीं करता है या कर का संग्रहण करने के पश्चात् इस धारा की अपेक्षा के अनुसार उसका संदाय करने में असफल रहता है तो वह कर की ऐसी रकम पर उस तारीख से, जिसको ऐसा कर संग्रहणीय था, उस तारीख तक जिसको कर का वास्तव में संदाय किया गया था प्रत्येक मास या उसके भाग के लिए दो प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगा।

(8) जहां कर पूर्वोक्त रूप में संदत्त नहीं किया गया है, वहां उसके संगृहीत किए जाने पर कर की रकम और साथ ही उपधारा (7) में निर्दिष्ट दर पर उस पर साधारण ब्याज की रकम विक्रेता की सभी आस्तियों पर प्रभार होगी।]

31[(9) जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि क्रेता की कुल आय उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट सुसंगत दर से किसी निम्नतर दर पर कर के संग्रहण के लिए न्यायसंगत है वहां निर्धारण अधिकारी क्रेता द्वारा इस बाबत किए गए किसी आवेदन32 पर उसे उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट सुसंगत दर से निम्नतर दर पर कर के संग्रहण के लिए प्रमाणपत्र देगा।

(10) जहां कोर्इ प्रमाणपत्र उपधारा (9) के अधीन दिया जाना है वहां कर के संग्रहण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति जब तक निर्धारण अधिकारी द्वारा ऐसा प्रमाणपत्र रद्द नहीं कर दिया जाता, उस प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट दरों पर कर का संग्रहण करेगा।

(11) बोर्ड, निर्धारिती की सुविधा और राजस्व के हितों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे नियम बना सकेगा जिसमें ऐसी दशाएं, जिनमें और ऐसी परिस्थितियां, जिनके अधीन उपधारा (9) के अधीन किसी प्रमाणपत्र को देने के लिए आवेदन किया जा सकेगा और वे शर्तें, जिनके अधीन ऐसा प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा, विनिर्दिष्ट होंगी और उसमें उससे संबंधित सभी अन्य विषयों का उपबंध होगा।

33[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए--

() "क्रेता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो नीलामी या निविदा के रूप में अथवा किसी अन्य ढंग से, किसी विक्रय में, उपधारा (1) की सारणी में विनिर्दिष्ट प्रकृति का माल अथवा किसी ऐसे माल को प्राप्त करने का अधिकार अभिप्राप्त करता है, किंतु उसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं है :--

(i) कोर्इ पब्लिक सेक्टर कंपनी;

(ii) ऐसे विक्रय के अनुसरण में प्राप्त ऐसे माल के और विक्रय में का कोर्इ क्रेता; या

(iii) ऐसा क्रेता, जहां ऐसा माल उसके द्वारा नीलामी के रूप में प्राप्त नहीं किया जाता है और जहां विक्रेता द्वारा विक्रीत किए जाने वाले ऐसे माल की विक्रय कीमत किसी राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन नियत की जाती है;

() "विक्रेता" से केन्द्रीय सरकार, कोर्इ राज्य सरकार या कोर्इ स्थानीय प्राधिकारी या किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या प्राधिकरण या कोर्इ कंपनी या फर्म या सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है।]

 

17. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.6.1988 से अंत:स्थापित।

18. परिपत्र सं. 585, तारीख 27.11.1990 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

19. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से निम्नलिखित के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व इसका प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1988 से भूतलक्षीरूप से संशोधन किया गया था :

"(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो धारा 44कग में निर्दिष्ट विक्रेता है, उस धारा में निर्दिष्ट क्रेता द्वारा दी जाने वाली रकम क्रेता के खाते में से विकलित करते समय या ऐसी रकम उक्त क्रेता से नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट लेकर या किसी अन्य रीति से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, नीचे की सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के किसी माल के क्रेता से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि; जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, उसमें अंतर्विष्ट आय पर आय कर के रूप में संगृहित करेगा।

सारणी

क्रम सं. माल की प्रकृति प्रतिशत
(1) (2) (3)
(i) मानव उपयोग के लिए एल्कोहाली लिकर (भारत में बनी विदेशी शराब से भिन्न) पंद्रह प्रतिशत
(ii) वन पट्टे के अधीन प्राप्त टिंबर पंद्रह प्रतिशत
(iii) वन पट्टे के अधीन विहित पद्धति से भिन्न पद्धति से प्राप्त टिंबर पांच प्रतिशत
(iv) कोर्इ अन्य वनोत्पाद, जो टिंबर नहीं है पंद्रह प्रतिशत :

परन्तु जहां निर्धारण अधिकारी क्रेता द्वारा किए गए आवेदन पर विहित प्ररूप में यह प्रमाणपत्र देता है कि उसके सर्वोत्तम विश्वास के अनुसार पूर्वोक्त सारणी में निर्दिष्ट किसी माल का वस्तुओं या चीजों के बनाए जाने, प्रसंस्करण करने या उत्पादन के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाना है न कि व्यापारिक प्रयोजनों के लिए, वहां इस उपधारा के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तक वह प्रमाणपत्र प्रवर्तन में रहता है।"

20. नियम 37ग और प्ररूप सं. 27ग देखिए।

21. "ऐसी रकम" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डाइरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

22. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापित किए जाने से पूर्व सारणी निम्न प्रकार थी :

"सारणी

क्रम सं. माल की प्रकृति प्रतिशत
(1) (2) (3)
(i) मानव उपयोग के लिए एल्कोहाली लिकर (भारत में बनी विदेशी शराब से भिन्न) पंद्रह प्रतिशत
(ii) वन पट्टे के अधीन प्राप्त टिंबर पंद्रह प्रतिशत
(iii) वन पट्टे के अधीन विहित पद्धति से भिन्न पद्धति से प्राप्त टिंबर पांच प्रतिशत
(iv) कोर्इ अन्य वनोत्पाद, जो टिंबर नहीं है पंद्रह प्रतिशत "

23. नियम 37ग और प्ररूप सं. 27ग देखिए।

24. "प्रसंस्करण" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डाइरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

25. नियम 37घ और प्ररूप सं. 27घ देखिए।

26. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

27. नियम 37च के अधीन विहित प्राधिकारी निम्न प्रकार है :

(i) आय-कर मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा इस प्रकार पदाभिहित निर्धारण अधिकारी, जिसकी अधिकारिता क्षेत्र में उस व्यक्ति का कार्यालय स्थित है, जो अध्याय 17ख के अधीन कर की कटौती के लिए उत्तरदायी है; या

(ii) किसी अन्य मामले में, वह निर्धारण अधिकारी जिसकी अधिकारिता क्षेत्र में उस व्यक्ति का कार्यालय स्थित है, जो अध्याय 17ख के अधीन कर की कटौती के लिए उत्तरदायी है।

28. नियम 37ड़ और प्ररूप सं. 27ड़क से 27ड़घ तक देखिए।

29. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से उपधारा (5ख) और (5ग) अंत:स्थापित।

30. नियम 37ड़क और प्ररूप सं. 27ख देखिए।

31. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से उपधारा (9), (10) और (11) के स्थान प्रतिस्थापित।

32. नियम 37छ और 37ज तथा प्ररूप सं. 27च और 27छ देखिए।

33. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट