आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 206

निर्धारित रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए कर कटौती के व्यक्तियों

धारा

धारा संख्या

206

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

निर्धारित रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए कर कटौती के व्यक्तियों

निर्धारित रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए कर कटौती के व्यक्तियों

6[कर की कटौती करने वाले व्यक्तियों द्वारा विहित विवरणी का दिया जाना

7206. 8[(1)] सरकार के हर कार्यालय की दशा में विहित व्यक्ति9, हर कंपनी की दशा में प्रधान अधिकारी, हर स्थानीय प्राधिकारी या अन्य लोक निकाय या संगम की दशा में विहित व्यक्ति9, हर प्राइवेट नियोजक और हर ऐसा अन्य व्यक्ति, जो इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन कर की कटौती करने के लिए उत्तरदायी है, 10[प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् विहित समय के भीतर, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से सत्यापित कराकर और ऐसी विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, विवरणियां11 तैयार करेगा और उन्हें विहित आय-कर प्राधिकारी12 को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा]।]

13[(2) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी फ्लापी, डिस्केट, मैग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सी.डी.-रोम और किसी अन्य कम्प्यूटर पठनीय संचार माध्यम पर, जो बोर्ड विनिर्दिष्ट करे (जिसे इसमें आगे कम्प्यूटर संचार माध्यम कहा गया है), फाइल की गर्इ विवरणी के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस धारा और उसके अधीन बनाए गए नियमों14 के प्रयोजनों के लिए विवरणी है और मूल की किसी अंतर्वस्तु या उसमें उल्लिखित किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में मूल के पेश किए जाने के और सबूत के बिना, उसके अधीन किसी कार्यवाही में ग्राह्य होगा।

(3) उपधारा (2) के अधीन फाइल की गर्इ विवरणी निम्नलिखित शर्तों को पूरा करेगी, अर्थात्:--

() कम्प्यूटर संचार माध्यम पर विवरणियां प्राप्त करते समय, कम्प्यूटर संचार माध्यम पर फाइल की गर्इ दस्तावेजों का सूक्ष्मवीक्षण करके आवश्यक नियंत्रण रखा जाएगा और ऐसे संचार माध्यम को निर्धारण अधिकारी द्वारा सम्यक् रूप से अधिप्रमाणित किया जाएगा; और

() निर्धारण अधिकारी, डाटा को क्षति पहुंचाए बिना अनुलिपि करके, अंतरण करके, चित्रांकन करके अथवा स्टोर करके ऐसे कम्प्यूटर संचार माध्यम को बनाए रखने में सम्यक् सावधानी बरतेगा।]

 

6. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से अंत:स्थापित। प्रतिस्थापित किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से यथासंशोधित धारा 206 निम्न प्रकार थी :

"206. वेतन देने वाले व्यक्ति का विहित विवरणी देना--(1) सरकार के प्रत्येक कार्यालय की दशा में विहित व्यक्ति, प्रत्येक कंपनी की दशा में प्रधान अधिकारी, प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण या अन्य लोक निकाय या एसोसिएशन की दशा में विहित व्यक्ति और प्रत्येक प्राइवेट नियोजक एक ऐसी लिखित विवरणी तैयार करेगा और हर वर्ष मार्च के 31वें दिन से तीस दिन के भीतर विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित कराकर आय-कर अधिकारी को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा, जिसमें--

() ऐसे प्रत्येक व्यक्ति का नाम और जहां तक ज्ञात हो, उसका पता उल्लिखित होगा जो "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य उसकी कोर्इ ऐसी रकम, जैसी विहित की जाए, यथास्थिति, सरकार, कंपनी, प्राधिकारी, निकाय, संगम या प्राइवेट नियोजक से मार्च के 31वें दिन प्राप्त कर रहा था या जिसे उस तारीख को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान प्राप्त हुर्इ थी या देय हर्इ थी;

() ऐसे प्रत्येक व्यक्ति द्वारा प्राप्त या उसको देय आय की रकम और वह समय या वे समय जब वह, यथास्थिति, संदत्त की गर्इ थी या देय थी, दर्शित होंगी;

() ऐसे प्रत्येक व्यक्ति की आय से आय-कर की बाबत काटी गर्इ रकम दर्शित होगी।

(2) जहां कोर्इ नियोजक अनुमोदित अधिवार्षिकी विधि के लिए कर्मचारी के किन्हीं अभिदायों की कटौती कर्मचारी को दी गर्इ परिलब्धियों से करता है या उसकी ओर से उनका संदाय करता है वहां वह ऐसी सब कटौतियों या संदाय की राशियों को उस विवरणी में शामिल करेगा जिसकी उससे इस धारा के अधीन देने की अपेक्षा की गर्इ है।"

7. परिपत्र सं. 719, तारीख 22.8.1995, परिपत्र सं. 744, तारीख 6.5.1996, परिपत्र सं. 796, तारीख 10.10.2000 और परिपत्र सं. 797, तारीख 10.10.2000 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

8. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 से धारा 206 को उपधारा (1) के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया।

9. विहित व्यक्तियों के लिए नियम 36 देखिए।

10. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 27.9.1991 से "प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् विहित समय के भीतर परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

11. नियम 36 और 37 तथा प्ररूप सं. 24, 25, 26, 26क, 26ख, 26खख, 26ग, 26घ, 26च, 26छ, 26ज, 26झ, 26ञ और 26ट देखिए। नियम 37क तथा प्ररूप सं. 27 भी देखिए।

12. नियम 36क देखिए। नियम 36क के अधीन विहित प्राधिकारी निम्न प्रकार है :

(i) आय-कर मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा पदाभिहित निर्धारण अधिकारी, जिसकी अधिकारिता क्षेत्र में उस व्यक्ति का कार्यालय स्थित है जो अध्याय 17ख के अधीन कर की कटौती के लिए उत्तरदायी है; या

(ii) किसी अन्य मामले में, वह निर्धारण अधिकारी, जिसकी अधिकारिता क्षेत्र में उस व्यक्ति का कार्यालय स्थित है जो अध्याय 17ख के अधीन कर की कटौती के लिए उत्तरदायी है।

13. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 से उपधारा (2) और (3) अंत:स्थापित।

14. नियम 37ख और प्ररूप 27क देखिए।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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