कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम
कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम63
201. 64[(1) जहां ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है,–
(क) जिससे इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किसी राशि की कटौती करने की अपेक्षा की जाती है ; या
(ख) जो धारा 192 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट नियोजक होते हुए,
इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन यथा अपेक्षित संपूर्ण कर की या उसके किसी भाग की कटौती नहीं करता है अथवा उसका संदाय नहीं करता है या इस प्रकार कटौती करने के पश्चात् उसका संदाय करने में असफल रहता है वहां ऐसा व्यक्ति, ऐसे किन्हीं अन्य परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो उसे उठाने पड़ें, ऐसे कर की बाबत व्यतिक्रम करने वाला निर्धारिती समझा जाएगा :
65-66[परंतु ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है, जो किसी निवासी को संदत्त राशि पर या किसी निवासी के खाते में जमा राशि पर इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है, ऐसे कर की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाएगा, यदि उस निवासी ने–
(i) धारा 139 के अधीन आय की अपनी विवरणी प्रस्तुत कर दी है;
(ii) आय की उस विवरणी में आय की संगणना करने के लिए ऐसी राशि को हिसाब में लिया है; और
(iii) ऐसी विवरणी में उसके द्वारा घोषित आय पर देय कर का संदाय कर दिया है,
और वह व्यक्ति किसी लेखापाल से इस आशय का एक प्रमाणपत्र, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, प्रस्तुत कर देता है :]
परन्तु 65-66[यह और कि] ऐसे व्यक्ति से धारा 221 के अधीन ऐसी कोर्इ शास्ति तब तक प्रभारित नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारण अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसा व्यक्ति, ऐसे कर की कटौती करने और उसका संदाय करने में, ठोस और पर्याप्त कारणों के बिना, असफल रहा है।]
67-68[(1क) जहां उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि ऐसा कोर्इ व्यक्ति, प्रधान अधिकारी या कंपनी, जो उस उपधारा में निर्दिष्ट है, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन यथा अपेक्षित संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती नहीं करती है या कटौती करने के पश्चात् कर का संदाय करने में असफल रहती है वहां वह,–
(i) उस तारीख से, जिसको ऐसे कर की कटौती की जानी थी, उस तारीख तक, जिसको ऐसे कर की कटौती की गर्इ थी, ऐसे कर की रकम पर प्रत्येक मास या मास के भाग के लिए एक प्रतिशत की दर से; और
(ii) उस तारीख से जिसको ऐसे कर की कटौती की गर्इ थी, उस तारीख तक, जिसको ऐसे कर का वस्तुत: संदाय किया गया था, ऐसे कर की रकम पर प्रत्येक मास या मास के भाग के लिए डेढ़ प्रतिशत की दर से, साधारण ब्याज का संदाय करने के दायित्वाधीन होगा या होगी और ऐसे ब्याज का संदाय धारा 200 की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार विवरण प्रस्तुत किए जाने से पूर्व किया जाएगा:]
69[परंतु यदि कोर्इ व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है, किसी निवासी को संदत्त राशि पर या किसी निवासी के खाते में जमा राशि पर इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है, किंतु उसे उपधारा (1) के पहले परंतुक के अधीन व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाता है, तो खंड (i) के अधीन ब्याज उस तारीख से, जिसको ऐसा कर कटौती योग्य था, ऐसे निवासी द्वारा आय की विवरणी फाइल करने की तारीख तक के लिए संदेय होगा।]
(2) जहां कटौती करने के पश्चात् यथापूर्वोक्त रूप में कर का संदाय नहीं किया गया है वहां 70[कर की रकम और उस पर उपधारा (1क) में निर्दिष्ट साधारण ब्याज की रकम] उपधारा (1) में निर्दिष्ट यथास्थिति, उस व्यक्ति या कंपनी की संपूर्ण आस्तियों पर प्रभार होगी।
71[(3) भारत में निवासी किसी व्यक्ति से संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहने के लिए किसी व्यक्ति को व्यतिक्रमी निर्धारिती माने जाने संबंधी कोर्इ आदेश उपधारा (1) के अधीन-
(i) उस मामले में जिसमें धारा 200 में निर्दिष्ट विवरण फाइल किया गया है, उस वित्तीय वर्ष की, जिसमें विवरण फाइल किया जाता है, समाप्ति से दो वर्ष के पश्चात् किसी समय नहीं किया जाएगा;
(ii) किसी अन्य मामले में, उस वित्तीय वर्ष की, जिसमें संदाय किया जाता है या प्रत्यय दिया जाता है, समाप्ति से 72[छह] वर्ष के पश्चात् किसी समय नहीं किया जाएगा:
परंतु 1 अप्रैल, 2007 को या उससे पूर्व प्रारंभ होने वाले किसी वित्तीय वर्ष के लिए ऐसा आदेश 31 मार्च, 2011 को या उससे पूर्व किसी समय पारित किया जा सकेगा।
(4) धारा 153 की उपधारा (3) के उपखंड (ii) और धारा 153 के स्पष्टीकरण 1 के उपबंध, जहां तक हो सके, उपधारा (3) में विहित समय-सीमा को लागू होंगे।]
73[स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "लेखापाल" पद का वही अर्थ है जो धारा 288 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में उसका है]
63. परिपत्र सं. 685, 686 और 696, क्रमश: तारीख 17.6.1994, 12.8.1994 और 28.2.1995 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
64. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2002 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम 2002 द्वारा 1.6.2002 से, वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से और वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से यथा संशोधित उपधारा (1) इस प्रकार थी:
"(1) यदि धारा 200 में निर्दिष्ट ऐसा कोर्इ व्यक्ति और धारा 194 में निर्दिष्ट दशाओं में प्रधान अधिकारी और वह कंपनी, जिसका वह प्रधान अधिकारी है संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती नहीं करती है या कटौती करने के पश्चात् उसे इस अधिनियम के द्वारा या इसके अधीन अपेक्षित रूप में संदत्त करने में असफल रहती है तो ऐसे किन्हीं अन्य परिणामों पर, जो उस पर पड़ सकते हैं, कोर्इ प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उसे उस कर की बाबत व्यतिक्रम करने वाला निर्धारिती समझा जाएगा :
परन्तु ऐसे व्यक्ति, प्रधान अधिकारी या कंपनी पर धारा 221 के अधीन कोर्इ शास्ति तब तक अधिरोपित नहीं की जाएगी जब तक निर्धारण अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता कि, यथास्थिति, ऐसा व्यक्ति या प्रधान अधिकारी या कंपनी कर की कटौती करने मंध और उसका संदाय करने में ठोस या पर्याप्त कारणों के बिना असफल रही है।"
65-66. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
67-68. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.7.2010 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से, वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से, वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1962 से और वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से यथासंशोधित धारा (1क) इस प्रकार थी :
"(1क) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यदि उस उपधारा में उल्लिखित कोर्इ ऐसा व्यक्ति, प्रधान अधिकारी या कंपनी संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती नहीं करती है या कटौती करने के पश्चात् उसे इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अपेक्षित रूप में संदत्त करने में असफल रहती है तो वह उस तारीख से, जिसको ऐसे कर की कटौती की जानी थी, उस तारीख तक जिसको ऐसा कर वास्तव में संदत्त किया गया था, ऐसे कर की रकम पर प्रत्येक मास या उसके किसी भाग के लिए एक प्रतिशत* की दर पर साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगी और ऐसा ब्याज धारा 200 की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार विवरण प्रस्तुत किए जाने से पूर्व संदत्त किया जाएगा।"
*ब्याज की दर से संबधित उपबंध का वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से, वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से, वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.10.1967 से संशोधन किया गया था।
69. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
70. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से ''यह'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
71. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से अंत:स्थापित।
72. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2010 से "चार" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
73. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

