आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 201

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम

धारा

धारा संख्या

201

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2020

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम

201. (1) जहां ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है,—

() जिससे इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किसी राशि की कटौती करने की अपेक्षा की जाती है ; या

() जो धारा 192 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट नियोजक होते हुए,

इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन यथा अपेक्षित संपूर्ण कर की या उसके किसी भाग की कटौती नहीं करता है अथवा उसका संदाय नहीं करता है या इस प्रकार कटौती करने के पश्चात् उसका संदाय करने में असफल रहता है वहां ऐसा व्यक्ति, ऐसे किन्हीं अन्य परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो उसे उठाने पड़ें, ऐसे कर की बाबत व्यतिक्रम करने वाला निर्धारिती समझा जाएगा :

परंतु ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है, जो किसी 2ग[आदाता] को संदत्त राशि पर या किसी 2ग[आदाता] के खाते में जमा राशि पर इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है, ऐसे कर की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाएगा, यदि उस 2ग[आदाता] ने—

(i) धारा 139 के अधीन आय की अपनी विवरणी प्रस्तुत कर दी है;

(ii) आय की उस विवरणी में आय की संगणना करने के लिए ऐसी राशि को हिसाब में लिया है; और

(iii) ऐसी विवरणी में उसके द्वारा घोषित आय पर देय कर का संदाय कर दिया है,

और वह व्यक्ति किसी लेखापाल से इस आशय का एक प्रमाणपत्र, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, प्रस्तुत कर देता है :

परन्तु यह और कि ऐसे व्यक्ति से धारा 221 के अधीन ऐसी कोर्इ शास्ति तब तक प्रभारित नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारण अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसा व्यक्ति, ऐसे कर की कटौती करने और उसका संदाय करने में, ठोस और पर्याप्त कारणों के बिना, असफल रहा है।

(1क) जहां उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि ऐसा कोर्इ व्यक्ति, प्रधान अधिकारी या कंपनी, जो उस उपधारा में निर्दिष्ट है, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन यथा अपेक्षित संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती नहीं करती है या कटौती करने के पश्चात् कर का संदाय करने में असफल रहती है वहां वह,—

(i) उस तारीख से, जिसको ऐसे कर की कटौती की जानी थी, उस तारीख तक, जिसको ऐसे कर की कटौती की गर्इ थी, ऐसे कर की रकम पर प्रत्येक मास या मास के भाग के लिए एक प्रतिशत की दर से; और

(ii) उस तारीख से जिसको ऐसे कर की कटौती की गर्इ थी, उस तारीख तक, जिसको ऐसे कर का वस्तुत: संदाय किया गया था, ऐसे कर की रकम पर प्रत्येक मास या मास के भाग के लिए डेढ़ प्रतिशत की दर से, साधारण ब्याज का संदाय करने के दायित्वाधीन होगा या होगी और ऐसे ब्याज का संदाय धारा 200 की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार विवरण प्रस्तुत किए जाने से पूर्व किया जाएगा:

परंतु यदि कोर्इ व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है, किसी 2घ[आदाता] को संदत्त राशि पर या किसी 2घ[आदाता] के खाते में जमा राशि पर इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है, किन्तु उसे उपधारा (1) के पहले परंतुक के अधीन व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाता है, तो खंड (i) के अधीन ब्याज उस तारीख से, जिसको ऐसा कर कटौती योग्य था, ऐसे 2घ[आदाता] द्वारा आय की विवरणी फाइल करने की तारीख तक के लिए संदेय होगा।

(2) जहां कटौती करने के पश्चात् यथापूर्वोक्त रूप में कर का संदाय नहीं किया गया है वहां कर की रकम और उस पर उपधारा (1क) में निर्दिष्ट साधारण ब्याज की रकम उपधारा (1) में निर्दिष्ट यथास्थिति, उस व्यक्ति या कंपनी की संपूर्ण आस्तियों पर प्रभार होगी।

(3) उपधारा (1) के अधीन, भारत में निवासी किसी व्यक्ति को संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफलता के लिए व्यतिक्रमी निर्धारिती माने जाने वाला कोर्इ आदेश, उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से, जिसमें संदाय किया जाता है या प्रत्यय दिया जाता है, 2ड़[या उस वित्तीय वर्ष, जिसमें धारा 200 की उपधारा (3) के परंतुक के अधीन संशोधन विवरण परिदत्त किया जाता है, के अंत से दो वर्ष, जो भी पश्चातवर्ती हो] सात वर्ष की समाप्ति के पश्चात् किसी समय नहीं किया जाएगा।

(4) धारा 153 की उपधारा (3) के उपखंड (ii) और धारा 153 के स्पष्टीकरण 1 के उपबंध, जहां तक हो सके, उपधारा (3) में विहित समय-सीमा को लागू होंगे।

स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "लेखापाल" पद का वही अर्थ है जो धारा 288 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में उसका है

 

2ग. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से "निवासी" शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

2घ. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से "निवासी" शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

2ड़. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से अंत:स्थापित ।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

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