आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 201

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम

धारा

धारा संख्या

201

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम

कटौती करने की या संदाय करने में असफल रहने के परिणाम57क

201. (1) 58[यदि धारा 200 में निर्दिष्ट ऐसा कोर्इ व्यक्ति] और धारा 194 में निर्दिष्ट दशाओं में प्रधान अधिकारी और वह कंपनी, जिसका वह प्रधान अधिकारी है 59[संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती] नहीं करती है या कटौती करने के पश्चात् उसे इस अधिनियम के द्वारा या इसके अधीन अपेक्षित रूप में संदत्त करने में असफल रहती है तो ऐसे किन्हीं अन्य परिणामों पर, जो उस पर पड़ सकते हैं, कोर्इ प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उसे उस कर की बाबत व्यतिक्रम करने वाला निर्धारिती समझा जाएगा :

परन्तु ऐसे व्यक्ति, प्रधान अधिकारी या कंपनी पर धारा 221 के अधीन कोर्इ शास्ति तब तक अधिरोपित नहीं की जाएगी जब तक 60[निर्धारण] अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता कि, यथास्थिति, ऐसा व्यक्ति या प्रधान अधिकारी या कंपनी कर की कटौती करने में और उसका संदाय करने में 61[ठोस या पर्याप्त कारणों के बिना] असफल रही है।

62[(1क) 63उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यदि उस उपधारा में उल्लिखित कोर्इ ऐसा व्यक्ति, प्रधान अधिकारी या कंपनी 64[संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती] नहीं करती है या कटौती करने के पश्चात् उसे इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अपेक्षित रूप में संदत्त करने में असफल रहती है तो वह उस तारीख से, जिसको ऐसे कर की कटौती की जानी थी, उस तारीख तक जिसको ऐसा कर वास्तव में संदत्त किया गया था, ऐसे कर की रकम पर 65[पन्द्रह] प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर पर साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगी।]

(2) जहां कटौती करने के पश्चात् यथापूर्वोक्त रूप में कर का संदाय नहीं किया गया है वहां 66[कर की रकम और उस पर उपधारा (1क) में निर्दिष्ट साधारण ब्याज की रकम] उपधारा (1) में निर्दिष्ट यथास्थिति, उस व्यक्ति या कंपनी की संपूर्ण आस्तियों पर प्रभार होगी।

 

57क. परिपत्र सं. 685, 686 और 696, क्रमश: तारीख 17.6.1994, 12.8.1994 और 28.2.1995 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

58. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से "यदि ऐसा कोर्इ व्यक्ति" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

59. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1962 से, भूतलक्षी प्रभाव से "कर की कटौती" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

60. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''आय-कर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

61. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से ''जानबूझकर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

62. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

63. नियम 119क देखिए।

64. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से "कर की कटौती" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

65. कराधन विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से "पंद्रह" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से ''अठारह'' के स्थान पर "पन्द्रह" रखा गया था, वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से ''पंद्रह'' के स्थान पर ''अठारह'' रखा गया था, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से ''बारह'' के स्थान पर ''पंद्रह'' रखा गया था, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से ''नौ'' के स्थान पर ''बारह'' रखा गया था और कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.10.1967 से ''छह'' के स्थान पर ''नौ'' रखा गया था।

66. वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से ''यह'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

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