आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 200

कर की कटौती करने वाले व्यक्ति का कर्त्तव्य

धारा

धारा संख्या

200

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2010

कर की कटौती करने वाले व्यक्ति का कर्त्तव्य

कर की कटौती करने वाले व्यक्ति का कर्त्तव्य

कर की कटौती करने वाले व्यक्ति का कर्त्तव्य56

200. 57[(1)] 58कोर्इ व्यक्ति, जो 59[इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों] के अनुसार किसी राशि की कटौती करता है, इस प्रकार कटौती की गर्इ राशि का संदाय विहित समय के भीतर केन्द्रीय सरकार के जमा खाते में, या जैसा बोर्ड निर्दिष्ट करे, करेगा।

60[(2) धारा 192 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट कोर्इ व्यक्ति, जो नियोजक है, विहित समय के भीतर केंद्रीय सरकार के जमा खाते में या जैसा बोर्ड निर्देश दे कर का संदाय करेगा।]

61[(3) यथास्थिति, ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जो इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार 1 अपै्रल, 2005 को या उसके पश्चात् किसी राशि की कटौती करता है या ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जो धारा 192 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट कोर्इ नियोजक है, कटौती किए गए कर का केंद्रीय सरकार के जमा खाते में विहित समय के भीतर संदाय करने के पश्चात् 61क[ऐसी अवधि के लिए, जो विहित की जाए, ऐसे विवरण तैयार करेगा] और ऐसा विवरण ऐसे प्ररूप62 में और ऐसी रीति में सत्यापित कराकर तथा उसमें ऐसी विशिष्टियों का उल्लेख करते हुए और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, विहित आय-कर प्राधिकारी 62क को या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा।]

 

56. परिपत्र सं. 685, 686 और 696, क्रमश: तारीख 17.6.1994, 12.8.1994 और 28.2.1995 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

57. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से धारा 200 उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनर्संख्यांकित।

58. नियम 30 देखिए।

59. वित्त (संñ 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से "धारा 192 से" शब्दों से प्रारम्भ होने वाले और "धारा 196घ के उपबंधों" से समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (संñ 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से, वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से, प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.11.1989 से, वित्त (संñ 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से, वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.6.1993 से, वित्त अधिनियम, 1994, द्वारा 1.6.1994 से, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से और वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से यथासंशोधित कोट किया गया भाग इस प्रकार था :

"धारा 192 से धारा 194 तक, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194खख, धारा 194ग, धारा 194घ, धारा 194ड़, धारा 194ड़ड़, धारा 194च, धारा 194छ, धारा 194ज, धारा 194झ, धारा 194ञ, धारा 194ट, धारा 194ठ, धारा 195, धारा 196क, धारा 196ख, धारा 194ग और धारा 194घ के उपबंधों"

60. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अन्त:स्थापित।

61. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

61क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से "प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसम्बर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि के लिए तिमाही विवरण तैयार करेगा" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

62. नियम 31क और प्ररूप सं. 24थ और 26थ देखिए।

62क. विहित प्राधिकारी आय-कर महानिदेशक (प्रणाली)/एन.एस.डी.एल. है।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा संशोधित रूप में]

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