परिभाषाएँ
परिभाषाएँ।
2.इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,—
| (क) | "अपीलीय न्यायाधिकरण" का अर्थ है धारा 8 की उप-धारा (1) के तहत स्थापित एक अपीलीय न्यायाधिकरण; | |
| (ख) | "आवेदन" का अर्थ है धारा 19 के तहत न्यायाधिकरण को दिया गया आवेदन; | |
| (ग) | किसी न्यायाधिकरण या अपील न्यायाधिकरण के संबंध में, "नियत दिन" का अर्थ है वह तारीख, जिसको ऐसा न्यायाधिकरण, यथास्थिति, धारा 3 की उप-धारा (1) या धारा 8 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित किया जाता है; | |
| (घ) | "बैंक" का अर्थ है— |
| ( i) | एक बैंकिंग कंपनी; | |
| (ii) | एक संबंधित नया बैंक; | |
| (iii) | भारतीय स्टेट बैंक; | |
| (iv) | एक सहायक बैंक; या | |
| (v) | एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक; | |
| [( vi ) | एक बहु-राज्य सहकारी बैंक;] |
| (ड़) | “बैंकिंग कंपनी” का अर्थ, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 का 1949) की धारा 5 के उपधारा (ग) में प्रदत्त होगा; | |
| [( ड़क ) | "अध्यक्ष" का अर्थ है धारा 9 के तहत नियुक्त अपीलीय न्यायाधिकरण का अध्यक्ष;] | |
| (च) | “संबंधित नया बैंक” का अर्थ, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 का 1949) की धारा 5 के उपधारा (घक) में प्रदत्त होगा; | |
| [(छ) | "ऋण" का अर्थ है किसी व्यक्ति [या प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 की धारा 2 के खंड (घक) में परिभाषित संयुक्त निवेश माध्यम] से किसी बैंक या वित्तीय संस्थान या बैंकों या वित्तीय संस्थानों के संघ द्वारा किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के दौरान नकद या अन्यथा के रूप में दावा किया जाता है, चाहे वह सुरक्षित हो या असुरक्षित, या समनुदेशित हो; या किसी सिविल न्यायालय के आदेश या किसी मध्यस्थता पुरस्कार या अन्यथा या बंधक के तहत देय हो और आवेदन की तिथि को अस्तित्व में हो और कानूनी रूप से वसूली योग्य हो [और इसमें ऋण प्रतिभूतियों के प्रति कोई देयता शामिल है जो डिबेंचर ट्रस्टी या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा उधारकर्ता को दिए गए नब्बे दिनों के नोटिस के बाद पूर्ण या आंशिक रूप से अवैतनिक रह जाती है, जिसके पक्ष में ऋण प्रतिभूतियों के धारकों के लाभ के लिए सुरक्षा हित बनाया जाता है या;]] | |
| [ ( छक ) | "ऋण प्रतिभूतियाँ" का अर्थ है; भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों के अनुसार सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियाँ;] | |
| (ज) | “वित्तीय संस्था” का अर्थ— |
| ( i) | कंपनियों अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क के अर्थ में एक सार्वजनिक वित्तीय संस्था; | |
| [(iक) | प्रतिभूतिकरण कंपनी या पुनर्निर्माण कंपनी जिसने वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (2002 का 54) की धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया है;] | |
| [(झ ख) | बोर्ड के साथ पंजीकृत और सुरक्षित ऋण प्रतिभूतियों के लिए नियुक्त एक डिबेंचर ट्रस्टी; ] | |
| (ii) | ऐसी अन्य संस्था जिसे केन्द्रीय सरकार, उसकी कारबार गतिविधि तथा भारत में उसके कार्य क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट कर सकती है; |
| [ (जक) | "वित्तीय पट्टा" का अर्थ है, परक्राम्य लिखत या परक्राम्य दस्तावेज से भिन्न, मूर्त परिसंपत्ति के पट्टा करार के अधीन पट्टा, जिसमें पट्टाकर्ता का अधिकार पट्टेदार को एक निश्चित समय के लिए, समय-समय पर सहमत राशि के भुगतान के बदले में हस्तांतरित किया जाता है और जहां पट्टेदार, पट्टे की अवधि की समाप्ति पर या, यथास्थिति, सहमत अवशिष्ट राशि के भुगतान पर, ऐसी परिसंपत्तियों का स्वामी बन जाता है;] | |
| ( i) | "अधिसूचना" का अर्थ है राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना; | |
| (ञ) | "निर्धारित" का अर्थ है इस अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित; | |
| [( त्रक ) | "पीठासीन अधिकारी" का अर्थ है धारा 4 की उप-धारा (1) के तहत नियुक्त ऋण वसूली न्यायाधिकरण का पीठासीन अधिकारी;] | |
| [ ( ञख ) | संपत्ति का अर्थ है- |
| (क) | अचल संपत्ति; | |
| (ख) | चल संपत्ति; | |
| (ग) | कोई भी ऋण या धन का भुगतान प्राप्त करने का कोई अधिकार, चाहे वह सुरक्षित हो या असुरक्षित; | |
| (घ) | वर्तमान या भविष्य के सभी प्राप्य; | |
| (ङ) | अमूर्त आस्तियां, जैसे तकनीकी ज्ञान, पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, लाइसेंस, फ्रेंचाइजी या इसी प्रकार का कोई अन्य व्यवसाय या वाणिज्यिक अधिकार, जैसा कि केंद्रीय सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से निर्धारित किया जा सकता है;] |
| (ट) | "वसूली अधिकारी" का अर्थ है धारा 7 की उप-धारा (1) के तहत प्रत्येक न्यायाधिकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक वसूली अधिकारी; | |
| (ठ) | "क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक" का अर्थ है क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (1976 का 21) की धारा 3 के तहत स्थापित एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक; | |
| [(झक) | "सुरक्षित ऋणदाता" का वही अर्थ होगा जो वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (2002 का 54) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (यघ) में दिया गया है; | |
| (झख) | "सुरक्षा हित" का अर्थ है किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के पक्ष में बनाया गया बंधक, भार, दृष्टिबंधक, समनुदेशन या संपत्ति पर किसी भी प्रकार का कोई अन्य अधिकार, शीर्षक या हित और इसमें शामिल हैं- |
| (क) | मूर्त परिसंपत्ति पर ऐसा अधिकार, शीर्षक या हित, जो बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा संपत्ति के स्वामी के रूप में रखा जाता है, किराए या वित्तीय पट्टे या सशर्त बिक्री पर दिया जाता है जो परिसंपत्ति के खरीद मूल्य के किसी भी न चुकाए गए हिस्से का भुगतान करने के दायित्व को सुरक्षित करता है या उधारकर्ता को मूर्त परिसंपत्ति प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए कोई दायित्व या कोई ऋण प्रदान किया जाता है; या | |
| (ख) | किसी अमूर्त आस्ति में ऐसा अधिकार, हक या हित या किसी अमूर्त आस्ति का लाइसेंस, जो अमूर्त आस्ति के क्रय मूल्य के किसी अदत्त हिस्से का भुगतान करने के दायित्व को सुरक्षित करता है या उधारकर्ता को अमूर्त आस्ति या अमूर्त आस्ति के लाइसेंस को अर्जित करने में सक्षम बनाने के लिए उपगत दायित्व या दिए गए किसी ऋण को सुरक्षित करता है;] |
| (ड) | "भारतीय स्टेट बैंक" का अर्थ भारतीय स्टेट बैंक से है, जिसकी स्थापना भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) की धारा 3 के अंतर्गत की गई है; | |
| (ढ) | "समनुषंगी बैंक" का वही अर्थ होगा जो भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 2 के खंड (ट) में है; | |
| (ण) | "न्यायाधिकरण" का अर्थ है धारा 3 की उप-धारा (1) के तहत स्थापित न्यायाधिकरण |

