आय-कर
अध्याय 2
आय - कर की दरें
आय-कर।
2. वित्त अधिनियम, 2023 (2023 का 8) की धारा 2 और पहली अनुसूची के उपबंध, 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले, यथास्थिति, निर्धारण वर्ष या वित्तीय वर्ष के लिए आय-कर के संबंध में, निम्नलिखित उपांतरणों सहित, उसी प्रकार लागू होंगे, जिस प्रकार वे 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले, यथास्थिति, निर्धारण वर्ष या वित्तीय वर्ष के लिए आय-कर के संबंध में लागू होते हैं, अर्थात् :—
(क) धारा 2 में—
(i) उपधारा (1) में, "2023" अंकों के स्थान पर, "2024 " अंक रखे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्:—
'(2) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 1 का पैरा क लागू होता है, या उन दशाओं में, जहां आय आय कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) (जिसे इसमें इसके पश्चात् आय कर अधिनियम कहा गया है) की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, और जहां निर्धारिती की, पूर्ववर्ष में, कुल आय के अतिरिक्त, पांच हजार रुपए से अधिक कोई शुद्ध कृषि आय है, और कुल आय दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक हो जाती है, वहां-
(क) शुद्ध कृषि आय को कुल आय के संबंध में केवल आय- कर प्रभारित करने के प्रयोजन के लिए, खंड (ख) में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा, [अर्थात् मानो शुद्ध कृषि आय कुल आय के प्रथम दो लाख पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में समाविष्ट हो, किंतु कर के दायित्वाधीन न हो] ; और
(ख) प्रभार्य आय-कर, निम्नानुसार परिकलित किया जाएगा, अर्थात् :—
(i) कुल आय और शुद्ध कृषि आय को संकलित कर दिया जाएगा और संकलित आय के संबंध में आय-कर की रकम, उक्त पैरा क या धारा 115खकग की उपधारा (1क) में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुल आय थी
(ii) शुद्ध कृषि आय में दो लाख पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि - आय के संबंध में आय-कर की रकम, उक्त पैरा क या धारा 115खकग की उपधारा (1क) में विनिर्दिष्ट दरों से ऐस अवधारित की जाएगी, मानो इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि - आय कुल आय थी ;
(iii) उपखंड (i) के अनुसार अवधारित आय-कर की रकम में से उपखंड (ii) के अनुसार अवधारित आय-कर की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार प्राप्त राशि कुल आय के संबंध में आय-कर होगी :
परन्तु पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद (ii) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष का या उससे अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो लाख पचास हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, "तीन लाख रुपए " शब्द रखे गए हों :
परन्तु यह और कि पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद (iii) में निर्दिष्ट, प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "पांच लाख रुपए " शब्द रखे गए हों :
परन्तु यह भी कि उस दशा में, जहां आय आय कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के उपबंधों के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "तीन लाख रुपए " शब्द रखे गए हों ।' ;
(iii) उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्
'(3) उन दशाओं में, जिनमें आयकर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञख या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12 चख या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के उपबंध लागू होते हैं, प्रभार्य कर का अवधारण, उस अध्याय या उस धारा में यथाउपबंधित रीति से, और, यथास्थिति, उपधारा (1) द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से किया जाएगा :
परन्तु आयकर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, पहली अनुसूची के भाग 1 के, यथास्थिति, पैरा क, पैरा ख, पैरा ग, पैरा घ और पैरा ङ में यथाउपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा, सिवाय उस देशी कंपनी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है या उस व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या व्यक्तियों के संगम या व्यष्टि- निकाय, चाहे निगमित हो या न हो, या आय कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी आय आय कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, या भारत में निवासी उस सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकघ या धारा 115खकङ के अधीन कर से प्रभार्य है :
परन्तु यह और कि किसी ऐसी आय के संबंध में, जो आय-कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ख, धारा 115खक, धारा 115 खख, धारा 115खखक, धारा 115खखग, धारा 115 खखच, धारा 115 खखछ, धारा 115खखज, धारा 115खखझ, धारा 115खखञ, धारा 115ङ, धारा 115ञख या धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम में, —
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या ऐसे व्यक्तियों के संगम, जो केवल कंपनियों के इसके सदस्यों से मिलकर बना है, के मामले के सिवाय, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि - निकाय, चाहे निगमित हो या न हो, या आय कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति, जिसकी आय कर अधिनियम की धारा 115कघ के अधीन कोई आय नहीं है, और जिसकी आय कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1) के अधीन कर से प्रभार्य कोई आय नहीं है, की दशा में, जहां-
(i) कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) कुल आय दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से और;
(iv) कुल आय पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से ;
(ख) ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या ऐसे व्यक्तियों के संगम, सिवाय ऐसे व्यक्तियों के संगम के, जो सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बना है, व्यक्ति संगम या व्यष्टि - निकाय, चाहे वह निगमित हो या न हो, या आय कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति, जिसकी आय कर अधिनियम की धारा 115कघ के अधीन आय है और जिसकी आय कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य कोई आय नहीं है, की दशा में,-
(i) कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) कुल आय [ लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय को छोड़कर ] दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से; और
(iv) कुल आय (लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय को छोड़कर) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से; और
(v) कुल आय (लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय सम्मिलित) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु जो उपखंड (iii) और उपखंड (iv) के अधीन नहीं आती है, ऐसे आय कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु उस दशा में, जहां कुल आय में, लाभांश के रूप में आय या आय कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय सम्मिलित है, आय के उस भाग के संबंध में संगणित आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह और कि जहां ऐसे व्यक्ति, जो आय कर अधिनियम की धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में निर्दिष्ट, विनिर्दिष्ट निधि है, की कुल आय में आय कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन कोई आय सम्मिलित है, आय के उस भाग के संबंध में संगणित आय-कर की रकम पर कोई अधिभार नहीं बढ़ाया जाएगा;
(ग) उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा में,-
(i) जहां कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अनधिक है, वहां ऐसे आय कर के दस प्रतिशत की दर से
(ii) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसी आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(घ) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी, सिवाय ऐसी सहकारी सोसाइटी, जिसकी आय आय कर अधिनियम की धारा 115खकघ या धारा 115खकङ के अधीन कर से प्रभार्य है, की दशा में, —
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है किंतु दस करोड़ रुपए से अनधिक है, वहां ऐसे आय कर के सात प्रतिशत की दर से
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे आय कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ङ) प्रत्येक फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे आय कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(च) प्रत्येक देशी कंपनी, सिवाय ऐसी देशी कंपनी की, जिसकी आय, आयकर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है, की दशा में,-
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के सात प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(छ) देशी कंपनी से भिन्न, प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दो प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि उपरोक्त (क) और (ख) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिसकी कुल आय आय कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय,-
(i) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर आय- कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है ;
(ii) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(iii) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दो करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह दो करोड़ रुपए से अधिक है।
(iv) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम पांच करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पांच करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि उपरोक्त (ग) में वर्णित व्यक्तियों के संगम की दशा में, जिनकी कुल आय आय कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है, और ऐसी आय, —
(i) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर आय- कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है :
(ii) एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परंतु यह भी कि उपरोक्त (घ) में वर्णित सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय आय कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय, -
(i) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(ii) दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह दस करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि उपरोक्त (ङ) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिसकी कुल आय आय कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय, एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आयकर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय आय कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आयकर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दस करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि आयकर अधिनियम की धारा 115खखङ की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम को ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि ऐसी प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में, जिसकी आय आय कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम को ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार द्वारा, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि किसी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब या व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय, चाहे वह निगमित हो या न हो, या आयकर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य आय के संबंध में, -
(i) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के माध्यम से आय सम्मिलित है) पचास लाख रुपए से अधिक, किंतु एक करोड़ रुपए से अनधिक है, इस उपधारा के अधीन इस प्रकार संगणित आय-कर को, ऐसी आय कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के माध्यम से आय सम्मिलित है) एक करोड़ रुपए रुपए से अधिक, किंतु दो करोड़ रुपए से अनधिक है, इस उपधारा के अधीन इस प्रकार संगणित आय-कर को, ऐसी आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के माध्यम से आय अपवर्जित है) दो करोड़ रुपए रुपए से अधिक है, इस उपधारा के अधीन इस प्रकार संगणित आय-कर को, ऐसी आय-कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से; और
(iv) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के माध्यम से आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु उपरोक्त खंड (iii) के अधीन नहीं आती है, इस उपधारा के अधीन इस प्रकार संगणित आय-कर को, ऐसी आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु यह भी कि ऐसी दशा में, जहां धारा 115खकग की उपधारा (1क) के उपबंध लागू होते हैं तथा कुल आय के अंतर्गत आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के माध्यम से आय सम्मिलित है, आय के उस भाग के संबंध में आय-कर पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह भी कि आयकर अधिनियम की धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में निर्दिष्ट, किसी विनिर्दिष्ट निधि की दशा में, जिसकी आय आय कर अधिनियम की धारा 115 खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है और जहां ऐसी आय में आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन कोई आय सम्मिलित है, आय के उस भाग पर परिकलित आय-कर को किसी अधिभार से नहीं बढ़ाया जाएगा :
परन्तु यह भी कि व्यक्तियों के संगम की दशा में, जो उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बना है और जिसकी आय धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, आयकर पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह भी कि प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब या व्यक्तियों के संगम, या व्यष्टियों के निकाय, चाहे वह निगमित हो या न हो, या आयकर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी आय कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य आय है, और ऐसी आय, —
(i) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर आय- कर के रूप में संदेय, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है;
(ii) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(iii) दो करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दो करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह दो करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि भारत में निवासी ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय आय कर अधिनियम की धारा 115खकघ और धारा 115खकङ के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर को ऐसे आय कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार से, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।" ;
(iv) उपधारा (9) में, —
(अ) दूसरे परंतुक में, "निवासी सहकारी सोसाइटी " शब्दों के स्थान पर, "भारत में निवासी सहकारी सोसाइटी " शब्द रखे जाएंगे
(आ) चौथे परंतुक में, खंड (क) से खंड (घ) को उसके खंड (i) से खंड (iv) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ;
(इ) पांचवें परंतुक में, —
(I) प्रारंभिक भाग में, "वर्णित व्यक्तियों" शब्दों के पश्चात्, " के संगम" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(II) खंड (क) और खंड (ख) को उसके खंड (i) और खंड (ii) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ;
(ई) छठे परंतुक में, —
(I) प्रारंभिक भाग में, "वर्णित व्यक्तियों" शब्दों के स्थान पर, " वर्णित कोई सहकारी सोसाइटी " शब्द रखे जाएंगे ;
(II) खंड (क) और खंड (ख) को उसके खंड (i) और खंड (ii) के रूप में पुन: संख्यांकित किया जाएगा ;
(उ) सोलहवें परंतुक में,-
(I) प्रारंभिक भाग में, "धारा 115खकग" शब्द, अंकों और अक्षरों के पश्चात्, "की उपधारा (1क) " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(II) खंड (क) से खंड (ग) को उसके खंड (i) से खंड (iii) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ;
(ऊ) सत्रहवें परंतुक में, "निवासी सहकारी सोसाइटी" शब्दों के स्थान पर, "भारत में निवासी सहकारी सोसाइटी" शब्द रखे जाएंगे ;
(v) उपधारा (10) में, —
(अ) प्रारंभिक भाग में, "या आयकर अधिनियम की धारा 2" शब्दों और अंक से आरंभ होने वाले और " की दशा में, जिसकी" शब्दों पर समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर, "उस दशा में, जहां" शब्द रखे जाएंगे ;
(आ) तीसरे परंतुक में, "या आय कर अधिनियम की धारा 2" शब्दों और अंक से आरंभ होने वाले और "जो निवासी है, जिसकी" शब्दों पर समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर, "उस दशा में, जहां " शब्द रखे जाएंगे :
(vi) उपधारा (13) के खंड (क) में, "2023" अंकों के स्थान पर, "2024" अंक रखे जाएंगे ;
(ख) पहली अनुसूची में, —
(i) भाग 1 और भाग 2 के स्थान पर, निम्नलिखित भाग रखे जाएंगे, अर्थात्
भाग 1
आय-कर
पैरा क
(1) इस पैरा की मद (II) और मद (III) में निर्दिष्ट व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति संगम या व्यष्टि - निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vi) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो ऐसी दशा नहीं है, जिसमें इस भाग का कोई अन्य पैरा लागू होता है, -
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुछ नहीं ; | |
| (2) जहां कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक है किंतु 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 5 प्रतिशत, जिससे कुल आय 2,50,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | 12,500 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है | |
| (4) जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक है | 1,12,500 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
(II) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है-
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक नहीं | कुछ नहीं ; | |
| (2) जहां कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 5 प्रतिशत, जिससे कुल आय 3,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है | |
| (3) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | 10,000 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (4) जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक | 1,10,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
(III) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है-
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक नहीं | कुछ नहीं ; | |
| (2) जहां कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक है किंतु 10,00,000 रुपए से अधिक नहीं है | उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) जहां कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक | 1,00,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रुपए से अधिक हो जाती है । |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आयकर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति संगम या व्यष्टि - निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में,-
(क) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दस प्रतिशत की दर से
(ख) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से
(ग) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित नहीं है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ;
(घ) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित नहीं है) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से; और
(ङ) जिसकी कुल आय (जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या लाभांश के रूप में आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु वह खंड (ग) और खंड (घ) के अंतर्गत नहीं आती है, ऐसे आय कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु उस दशा में, जहां कुल आय में लाभांश के रूप में आय या आय कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय सम्मिलित है, वहां आय के उस भाग के संबंध में संगणित आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परंतु यह और कि व्यक्तियों के संगम की दशा में, जो केवल कंपनियों से उसके सदस्यों के रूप में मिलकर बनी है, आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी:
परन्तु यह भी कि ऊपर उल्लिखित व्यक्तियों की दशा में,-
(क) जिनकी कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, पचास लाख रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पचास लाख रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ;
(ख) जिनकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ;
(ग) जिनकी कुल आय दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दो करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दो करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है और
(घ) जिनकी कुल आय पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, पांच करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पांच करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा ख
प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, -
आय-कर की दरें
| (1) जहां कुल आय 10,000 रुपए से अधिक नहीं है | कुल आय का 10 प्रतिशत ; | |
| (2) जहां कुल आय 10,000 रुपए से अधिक है किंतु 20,000 रुपए से अधिक नहीं है | 1,000 रुपए धन उस रकम का 20 प्रतिशत जिससे कुल आय 10,000 रुपए से अधिक हो जाती है ; | |
| (3) जहां कुल आय 20,000 रुपए से अधिक है | 3,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रतिशत जिससे कुल आय 20,000 रुपए से अधिक हो जाती है। |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आयकर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा मैं, -
(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के सात प्रतिशत की दर से ;
(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय कर के बारह प्रतिशत की दर से;
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परंतु यह और कि प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा ग
प्रत्येक फर्म की दशा में,-
आय-कर की दर
| संपूर्ण कुल आय पर | 30 प्रतिशत | |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आयकर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में ऐसी प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय कर के बारह प्रतिशत की दर से संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु ऊपर उल्लिखित प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा घ
प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में,-
आय-कर की दर
| संपूर्ण कुल आय पर | 30 प्रतिशत | |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आयकर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय कर के बारह प्रतिशत की दर से संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु ऊपर उल्लिखित प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा ङ
किसी कंपनी की दशा में,-
आय-कर की दरें
I. देशी कंपनी की दशा में,-
| (i) जहां पूर्ववर्ष 2021-2022 में इसका कुल आवर्त या कुल प्राप्तियां कुल आय का चार अरब रुपए से अधिक न हो | कुल आय का 25 प्रतिशत ; | | ||
| (ii) मद (i) में निर्दिष्ट के सिवाय | कुल आय का 30 प्रतिशत ; |
II. देशी कंपनी से भिन्न कंपनी की दशा में,-
| (i) कुल आय के उतने भाग पर, जो निम्नलिखित के रूप में है - | 50 प्रतिशत : | ||
| (क) उसके द्वारा 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व ; या | |||
| (ख) उसके द्वारा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए उस सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त फीस, | |||
और जहां, ऐसा करार दोनों में से प्रत्येक दशा में, केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है
| (ii) कुल आय के अतिशेष पर, यदि कोई हो | 40 प्रतिशत | |
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आयकर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में निम्नलिखित दर से,-
(i) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,-
(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के सात प्रतिशत की दर से; और
(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ii) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दो प्रतिशत की दर से; और
(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आयकर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परन्तु यह और कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस रकम से, उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
भाग 2
कतिपय दशाओं में स्रोत पर कर की कटौती की दरें
ऐसी प्रत्येक दशा में, जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 193, धारा 194क, धारा 194ख, 194खक, धारा 194खख, धारा 194घ, धारा 194ठखक, धारा 194ठखख धारा 194ठखग और धारा 195 के उपबंधों के अधीन कर की कटौती प्रवृत्त दरों से की जानी है, आय में से कटौती निम्नलिखित दरों पर कटौती के अधीन रहते हुए की जाएगी :-
| आय-कर की दर | |
| 1. कंपनी से भिन्न व्यक्ति की दशा में,- | |
(क) जहां व्यक्ति भारत में निवासी है, - |
|
(i) प्रतिभूतियों पर ब्याज " से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत : |
(ii) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत (आनलाइन खेल से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत : |
(iii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत : |
(iv) आनलाइन खेलों से जीत के रूप में आय |
30 प्रतिशत : |
(v) बीमा कमीशन के रूप में आय पर |
5 प्रतिशत : |
(vi) निम्नलिखित पर संदेय ब्याज के रूप में आय पर- |
10 प्रतिशत : |
(अ) किसी केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी स्थानीय प्राधिकरण या निगम द्वारा या उसकी ओर से धन के लिए पुरोधृत किए गए कोई डिबेंचर या प्रतिभूतियां : |
|
(आ) किसी कंपनी द्वारा पुरोधृत किए गए कोई डिबेंचर, जहां ऐसे डिबेंचर, भारत में मान्यताप्राप्त किसी स्टाक एक्सचेंज में प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अनुसार सूचीबद्ध हैं; |
|
(इ) केंद्रीय या राज्य सरकार की कोई प्रतिभूति ; |
|
(vii) किसी अन्य आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(ख) जहां व्यक्ति भारत में निवासी नहीं है, - |
|
(i) किसी अनिवासी भारतीय की दशा में,- |
|
(अ) विनिधान से किसी आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(आ) धारा 115ङ या धारा 112 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(इ) धारा 112क में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में एक लाख रुपए से अधिक आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(ई) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर [ जो धारा 10 के खंड (33) और खंड (36) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है ] |
20 प्रतिशत ; |
(उ) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर |
15 प्रतिशत ; |
(ऊ) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है) |
20 प्रतिशत ; |
(ऋ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1) के पहले परन्तुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आयकर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परन्तुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है |
20 प्रतिशत ; |
(ए) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [जो उपमद (ख) (i) (ऋ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है], आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(ऐ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(ओ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(औं) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(अं) आनलाइन खेलों से जीत से आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(अ:) धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (अ) के परंतुक में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(ऑ) उपमद (ख) (i) (अ) में निर्दिष्ट आय से भिन्न लाभांश के रूप में आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(र) अन्य सम्पूर्ण आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(ii) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में,— |
|
(अ) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है) |
20 प्रतिशत ; |
(आ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परन्तुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आयकर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परन्तुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है |
20 प्रतिशत ; |
(इ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां यह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [जो उपमद (ख) (ii) (आ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं हैं], आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(ई) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, वहां उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा प्रत्येक तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(उ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(ऊ) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(ऋ) आनलाइन खेल से जीत के रूप में आय |
30 प्रतिशत ; |
(ए) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर |
15 प्रतिशत ; |
(ऐ) धारा 112 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(ओ) धारा 112क में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में एक लाख रुपए से अधिक अन्य आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(औ) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर [जो धारा 10 के खंड (33) और खंड (36) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है ] |
20 प्रतिशत ; |
(अं) धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (अ) के परंतुक में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(अ:) उपमद (ख) (ii)(अं) में निर्दिष्ट आय से भिन्न लाभांश के रूप में आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(ऑ) अन्य सम्पूर्ण आय पर |
30 प्रतिशत ; |
2. किसी कंपनी की दशा में,- |
|
(क) जहां कंपनी देशी कंपनी है,- |
|
(i) "प्रतिभूतियों पर ब्याज " से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(ii) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(iii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(iv) आनलाइन खेल से जीत के रूप में आय |
30 प्रतिशत ; |
(v) किसी अन्य आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(ख) जहां कंपनी देशी कंपनी नहीं है,- |
|
(i) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेलों से जीत (आनलाइन खेलों से जीत से भिन्न) के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(ii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर |
30 प्रतिशत ; |
(iii) आनलाइन खेलों से जीत के रूप में आय |
30 प्रतिशत ; |
(iv) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा किसी विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है) |
20 प्रतिशत ; |
(v) उसके द्वारा 31 मार्च, 1976 के पश्चात् सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आयकर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परन्तुक में निर्दिष्ट विषय की किसी पुस्तक प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परन्तुक में निर्दिष्ट किसी कंप्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है |
20 प्रतिशत ; |
(vi) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसरण में है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर [जो मद (ख) (v) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है ] - |
|
(अ) जहां करार 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है |
50 प्रतिशत ; |
(आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है |
20 प्रतिशत ; |
(vii) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए, संदेय फीस के रूप में आय पर, - |
|
(अ) जहां करार 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है |
50 प्रतिशत ; |
(आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है |
20 प्रतिशत ; |
(viii) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर |
15 प्रतिशत ; |
(ix) धारा 112 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(x) धारा 112क में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में एक लाख रुपए से अधिक आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(xi) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर [ जो धारा 10 के खंड (33) और खंड (36) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है। |
20 प्रतिशत ; |
(xii) धारा 115क की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (अ) के परंतुक में निर्दिष्ट, लाभांश के रूप में आय पर |
10 प्रतिशत ; |
(xiii) मद (ख) (xii) में निर्दिष्ट आय से भिन्न लाभांश के रूप में आय पर |
20 प्रतिशत ; |
(xiv) किसी अन्य आय पर |
40 प्रतिशत ; |
स्पष्टीकरण.—इस भाग की मद 1 (ख) (i) के प्रयोजनों के लिए, "विनिधान से आय" और "अनिवासी भारतीय " के वही अर्थ हैं, जो आय कर अधिनियम के अध्याय 12क में उनके हैं ।
आय-कर पर अधिभार
निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कटौती की गई आय-कर की रकम में,-
(i) इस भाग की मद 1 के उपबंधों के अनुसार-
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम, उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्ति निकाय की दशा के सिवाय, या व्यष्टि- निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो अनिवासी है,-
I. जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सम्मिलित है) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;
II. जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय- कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सम्मिलित है) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से;
III.. जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय- कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सम्मिलित नहीं है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ;
IV. जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय- कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सम्मिलित नहीं है) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से; और
V. जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय- कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु वह उपखंड III और उपखंड IV के अंतर्गत नहीं आती है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से :
परन्तु उस दशा में, जिसमें कुल आय में लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सम्मिलित है, आय के उस भाग के संबंध में कटौती किए गए आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परंतु यह और कि जहां ऐसे व्यक्ति की आय आय कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, अधिभार की दर पच्चीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ;
(ख) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी, जो अनिवासी है, की दशा में,-
I. जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, वहां ऐसे कर के सात प्रतिशत की दर से ;
II जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, दस करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से,
(ग) किसी व्यक्तियों के संगम, जो अनिवासी है, और उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बना है, की दशा में,-
I. जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, वहां ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;
II जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से :
(घ) प्रत्येक फर्म, जो अनिवासी है, की दशा में जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से,
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ;
(ii) इस भाग की मद 2 के उपबंधों के अनुसार, संघ के प्रयोजनों के लिए, किसी देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(क) जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से ;
(ख) जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से,
संगणित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।';
(ii) भाग 3 के पैरा ङ में, "आय कर की दरें" शीर्षक के अधीन खंड (1) के उपखंड (i) में, "2021-2022" अंकों के स्थान पर, "2022 2023" अंक रखे जाएंगे
(iii) भाग 4 में, नियम 8 के स्थान पर निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थात्
"नियम 8—(1) जहां निर्धारिती की, 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में कोई कृषि आय है और 1 अप्रैल, 2016 या 1 अप्रैल, 2017 या 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्षों में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि - आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि है, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए,-
(i) 1 अप्रैल, 2016 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2017 या 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(ii) 1 अप्रैल, 2017 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(iii) 1 अप्रैल, 2018 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है;
(iv) 1 अप्रैल, 2019 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि - आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(v) 1 अप्रैल, 2020 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vi) 1 अप्रैल, 2021 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vii) 1 अप्रैल, 2022 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vii) 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि,
1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कृषि आय के प्रति मुजरा की जाएगी । ।
(2) जहां निर्धारिती की, 1 अप्रैल, 2025 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में या, यदि आय कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर, आय-कर उस पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है तो ऐसी अन्य अवधि में, कोई कृषि आय है और 1 अप्रैल, 2017 या 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्षों में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि - आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि है, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (10) के प्रयोजनों के लिए, -
(i) 1 अप्रैल, 2017 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2018 या 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(ii) 1 अप्रैल, 2018 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2019 या 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(iii) 1 अप्रैल, 2019 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2020 या 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है;
(iv) 1 अप्रैल, 2020 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2021 या 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि - आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(v) 1 अप्रैल, 2021 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2022 या 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vi) 1 अप्रैल, 2022 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2023 या 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vii) 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है :
(viii) 1 अप्रैल, 2024 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि,
1 अप्रैल, 2025 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कृषि आय के प्रति मुजरा की जाएगी।
(3) जहां किसी स्रोत से कृषि आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति का, कोई अन्य व्यक्ति, विरासत से भिन्न रीति से, उसी हैसियत में उत्तराधिकारी हो गया है, वहां उपनियम (1) या उपनियम (2) की कोई बात, हानि उठाने वाले व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को, यथास्थिति, उपनियम (1) या उपनियम (2) के अधीन मुजरा कराने का हकदार नहीं बनाएगी ।
(4) इस नियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी हानि, जिसे निर्धारण अधिकारी द्वारा इन नियमों के या वित्त अधिनियम, 2016 (2016 का 28) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2017 (2017 का 7) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2018 (2018 का 13) की पहली अनुसूची या वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2019 (2019 का 23) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2020 (2020 का 12) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2021 (2021 का 13) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2022 (2022 का 6) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2023 (2023 का 8) की पहली अनुसूची में अंतर्विष्ट नियमों के उपबंधों के अधीन अवधारित नहीं किया गया है, यथास्थिति, उपनियम (1) या उपनियम (2) के अधीन मुजरा नहीं की जाएगी । " ।

