आय-कर
अध्याय 2
आय-कर की दरें
आय-कर ।
2. (1) उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए आय-कर, पहली अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट दरों से प्रभारित किया जाएगा और ऐसे कर में, प्रत्येक दशा में, उसमें उपबंधित रीति से, परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा।
(2) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 1 का पैरा क लागू होता है, जहां निर्धारिती की, पूर्ववर्ष में, कुल आय के अतिरिक्त, पांच हजार रुपए से अधिक कोई शुद्ध कृषि-आय है, और कुल आय दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक हो जाती है वहां,—
(क) शुद्ध कृषि-आय को, कुल आय के संबंध में केवल आय-कर प्रभारित करने के प्रयोजन के लिए, खंड (ख) में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा, [अर्थात् मानो शुद्ध कृषि-आय कुल आय के प्रथम दो लाख पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में समाविष्ट हो, किंतु कर के दायित्वाधीन न हो] ; और
(ख) प्रभार्य आय-कर निम्नानुसार परिकलित किया जाएगा, अर्थात् :—
(i) कुल आय और शुद्ध कृषि-आय को संकलित कर दिया जाएगा और संकलित आय के संबंध में आय-कर की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुल आय थी ;
(ii) शुद्ध कृषि-आय में दो लाख पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि-आय के संबंध में आय-कर की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी, मानो इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि-आय कुल आय हो ;
(iii) उपखंड (i) के अनुसार अवधारित आय-कर की रकम में से उपखंड (ii) के अनुसार अवधारित आय-कर की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार प्राप्त राशि, कुल आय के संबंध में आय-कर होगी :
परन्तु पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद (ii) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष का या उससे अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "तीन लाख रुपए" शब्द रखे गए हों :
परन्तु यह और कि पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद (iii) में निर्दिष्ट, प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "पांच लाख रुपए" शब्द रखे गए हों ।
(3) उन दशाओं में, जिनमें आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) (जिसे इसमें इसके पश्चात् आय-कर अधिनियम कहा गया है) के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञख या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चख या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के उपबंध लागू होते हैं, प्रभार्य कर का अवधारण, उस अध्याय या उस धारा में यथाउपबंधित रीति से, और, यथास्थिति, उपधारा (1) द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से किया जाएगा :
परन्तु आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, पहली अनुसूची के भाग 1 के, यथास्थिति, पैरा क, पैरा ख, पैरा ग, पैरा घ और पैरा ङ में यथाउपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा, सिवाय उस देशी कंपनी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है या उस सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकघ के अधीन कर से प्रभार्य है :
परन्तु यह और कि किसी ऐसी आय के संबंध में, जो आय-कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख, धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ख, धारा 115खक, धारा 115खख, धारा 115खखक, धारा 115खखग, धारा 115खखच, धारा 115खखछ, धारा 115खखज, धारा 115खखझ, धारा 115ङ, धारा 115ञख या धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम में,—
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या ऐसे व्यक्तियों के संगम जो केवल कंपनियों के इसके सदस्यों से मिलकर बना है, के मामले के सिवाय, व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय, चाहे निगमित हो या न हो, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ के अधीन कोई आय नहीं है, की दशा में, जहां,—
(i) कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) कुल आय दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ; और
(iv) कुल आय पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से ;
(ख) ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या ऐसे व्यक्तियों के संगम, सिवाय ऐसे व्यक्तियों के संगम के, जो सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बना है, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या न हो, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ के अधीन आय है,—
(i) कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) कुल आय (आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय या प्रकृति की आय को छोड़कर) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ; और
(iv) कुल आय (आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय या प्रकृति की आय को छोड़कर) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से ; और
(v) कुल आय (आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय या प्रकृति की आय सम्मिलित) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु जो उपखंड (iii) और उपखंड (iv) के अधीन नहीं आती है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु उस दशा में, जहां कुल आय में, आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट लाभांश के रूप में आय या प्रकृति की आय सम्मिलित है, आय के उस भाग के संबंध में संगणित आय-कर की रकम पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ;
(ग) व्यक्तियों का संगम जो इसके सदस्यों के रूप में कंपनियों से मिलकर बना है, की दशा में,—
(i) जहां कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अनधिक है, वहां ऐसे आय-कर का दस प्रतिशत की दर से;
(ii) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसी आय का पन्द्रह प्रतिशत की दर से, संगणित किया जाएगा;
(घ) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी, सिवाय ऐसी सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकघ के अधीन कर से प्रभार्य है,—
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे आय-कर का सात प्रतिशत की दर से;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है वहां ऐसे आय-कर का बारह प्रतिशत की दर से;
(ङ) प्रत्येक फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है वहां ऐसे आय-कर का बारह प्रतिशत की दर से;
(च) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में, सिवाय ऐसी देशी कंपनी के, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है,—
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(छ) देशी कंपनी से भिन्न, प्रत्येक कंपनी की दशा में,—
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दो प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि उपरोक्त (क) और (ख) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिसकी कुल आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय,—
(i) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है ;
(ii) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(iii) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दो करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह दो करोड़ रुपए से अधिक है ;
(iv) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम पांच करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पांच करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि उपरोक्त (ग) में वर्णित व्यक्तियों के संगम की दशा में, जिनकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है,—
(i) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है ;
(ii) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परंतु यह भी कि उपरोक्त (घ) में वर्णित सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय,—
(i) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(ii) दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय रकम, आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जितनी वह दस करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि उपरोक्त (ङ) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिसकी कुल आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय, एक करोड़ रुपए से अधिक है, उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दस करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा 115खखङ की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम को ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि ऐसी प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम को ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम को, पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क में यथा उपबंधित रीति से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि ऐसी प्रत्येक निवासी सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकघ के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम को ऐसे "आय-कर" के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(4) उन दशाओं में, जिनमें कर, आय-कर अधिनियम की धारा 92गङ की उपधारा (2क) या धारा 115थक या धारा 115नघ के अधीन प्रभारित और संदत्त किया जाना है, कर उन धाराओं में यथा विनिर्दिष्ट दर से प्रभारित और संदत्त किया जाएगा और उसमें ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(5) उन दशाओं में, जिनमें कर, आय-कर अधिनियम की धारा 193, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194खक, धारा 194खख, धारा 194घ, धारा 194ठखक, धारा 194ठखख, धारा 194ठखग और धारा 195 के अधीन, प्रवृत्त दरों से काटा जाना है, उनमें कटौतियां पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों से की जाएगी और उन मामलों में, जहां कहीं विहित किया गया हो, उसमें उपबंधित रीति से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा ।
(6) उन दशाओं में, जिनमें कर, आय-कर अधिनियम की धारा 192क, धारा 194, धारा 194ग, धारा 194घक, धारा 194ङ, धारा 194ङङ, धारा 194च, धारा 194छ, धारा 194ज, धारा 194झ, धारा 194झक, धारा 194झख, धारा 194झग, धारा 194ञ, धारा 194ठक, धारा 194ठख, धारा 194ठखक, धारा 194ठखख, धारा 194ठखग, धारा 194ठग, धारा 194ठघ, धारा 194ट, धारा 194ड, धारा 194ढ, धारा 194ण, धारा 194थ, धारा 194द, धारा 194ध, धारा 196क, धारा 196ख, धारा 196ग और धारा 196घ के अधीन काटा जाना है, कटौतियां उन धाराओं में विनिर्दिष्ट दरों से की जाएगी और उसमें,—
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम, इसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनी से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा के सिवाय, या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो अनिवासी है, इस अधिनियम की धारा 196घ के अधीन लाभांश के रूप में आय की कटौती की दशा के सिवाय,—
(i) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ;
(iv) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से :
परंतु जहां ऐसे व्यक्ति की आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, वहां अधिभार की दर पच्चीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ;
(ख) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम, उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा के सिवाय, या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो अनिवासी है, आय-कर अधिनियम की धारा 196घ के अधीन लाभांश के रूप में आय की कटौती की दशा में,—
(i) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से ;
(ग) उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा में, जो अनिवासी है,—
(i) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए, पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से ;
(घ) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी, जो अनिवासी है, की दशा में,—
(i) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, किन्तु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के सात प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए दस करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ङ) प्रत्येक फर्म की दशा में, जो अनिवासी है, जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से संगणित की जाएगी ;
(च) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,—
(i) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौती के अधीन रहते हुए दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा ।
(7) उन दशाओं में, जिनमें कर का संग्रहण, आय-कर अधिनियम की धारा 194ख के परन्तुक के अधीन किया जाना है, ऐसा संग्रहण, पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों से किया जाएगा और उन दशाओं में, जहां कहीं विहित किया गया हो, उसमें उपबंधित रीति से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा ।
(8) उन दशाओं में, जिनमें कर का संग्रहण, आय-कर अधिनियम की धारा 206ग के अधीन किया जाना है, ऐसा संग्रहण, उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों से किया जाएगा और उसमें,—
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो अनिवासी है, जहां,—
(i) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से ;
(iv) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के सैंतीस प्रतिशत की दर से :
परंतु जहां ऐसे व्यक्ति की आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, वहां अधिभार की दर पच्चीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ;
(ख) उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा में, जो अनिवासी है और केवल कंपनियों के उसके सदस्यों के रूप में मिलकर बना है, ऐसे संगम की दशा में,—
(i) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(ग) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी, जो अनिवासी है, की दशा में,—
(i) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के सात प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(घ) प्रत्येक फर्म की दशा में, जो अनिवासी है, जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ङ) देशी कंपनी से भिन्न, प्रत्येक कंपनी की दशा में,—
(i) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जिन्हें संगृहीत किया गया है या जिनके संगृहीत किए जाने की संभावना है और संग्रहण के अधीन रहते हुए, दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा ।
(9) उपधारा (10) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उन दशाओं में, जिनमें आय-कर, प्रवृत्त दर या दरों से, आय-कर अधिनियम की धारा 172 की उपधारा (4) या धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभारित किया जाना है या उक्त अधिनियम की धारा 192 के अधीन "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय में से काटा जाना है, या उस पर संदत्त किया जाना है या उक्त अधिनियम की धारा 194त के अधीन कटौती की जानी है अथवा उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" की संगणना की जानी है, यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर", पहली अनुसूची के भाग 3 में विनिर्दिष्ट दर या दरों से इस प्रकार प्रभारित किया जाएगा, काटा जाएगा या संगणित किया जाएगा और ऐसे कर में, प्रत्येक दशा में, उसमें उपबंधित रीति से, परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु उन दशाओं में, जिनमें आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञख या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चख या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के उपबंध लागू होते हैं, "अग्रिम कर" की संगणना, यथास्थिति, इस उपधारा द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से की जाएगी :
परन्तु यह और कि आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगणित "अग्रिम कर" की रकम में, पहली अनुसूची के भाग 3 के, यथास्थिति, पैरा क, पैरा ख, पैरा ग, पैरा घ और पैरा ङ में यथा उपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा, सिवाय किसी देशी कंपनी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है, किसी व्यष्टि या अविभक्त हिंदू कुटुंब या व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, या किसी निवासी सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकघ के अधीन या धारा 115खकङ के अधीन कर से प्रभार्य है :
परन्तु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख, धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ख, धारा 115खक, धारा 115खख, धारा 115खखक, धारा 115खखग, धारा 115खखच, धारा 115खखछ, धारा 115खखज, धारा 115खखझ, 115खखञ, धारा 115ङ, धारा 115ञख या धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में पहले परन्तुक के अधीन संगणित "अग्रिम कर" में,—
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा में, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ के अधीन कोई आय नहीं है और जिसकी कोई ऐसी आय नहीं है जो धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, जहां,—
(i) जहां कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) जहां कुल आय दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के पच्चीस प्रतिशत की दर से ;
(iv) जहां कुल आय पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के सैंतीस प्रतिशत की दर से ;
(ख) प्रत्येक व्यष्टि की दशा में या उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा में के सिवाय, या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ के अधीन कोई आय है और जिसकी कोई ऐसी आय नहीं है जो धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, जहां,—
(i) जहां कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(iii) जहां कुल आय (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय सम्मिलित नहीं है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के पच्चीस प्रतिशत की दर से ;
(iv) जहां कुल आय (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय सम्मिलित नहीं है) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के सैंतीस प्रतिशत की दर से ;
(v) जहां कुल आय (जिसमें लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय सम्मिलित है) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु जो उपखंड (iii) और उपखंड (iv) के अंतर्गत नहीं आती है, ऐसे "अग्रिम कर" के पन्द्रह प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु उस दशा में, जहां कुल आय में लाभांश के रूप में आय या आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की आय सम्मिलित है, वहां आय के उस भाग पर संगणित अग्रिम कर पर अधिभार की दर पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी :
परंतु यह और कि किसी व्यक्ति की कुल आय जो आय-कर अधिनियम की धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट निधि है, जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन कोई आय सम्मिलित है, आय के उस भाग पर संगणित अग्रिम कर को किसी अधिभार द्वारा नहीं बढ़ाया जाएगा ;
(ग) उसके सदस्यों के रूप में केवल कंपनियों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा में,—
(i) जहां कुल आय पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के दस प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के पन्द्रह प्रतिशत की दर से ;
(घ) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी, ऐसी सहकारी सोसाइटी के सिवाय, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकघ और धारा 115खकङ के अधीन कर से प्रभार्य है, की दशा में,—
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के सात प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ङ) प्रत्येक फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के बारह प्रतिशत की दर से ;
(च) प्रत्येक देशी कंपनी, ऐसी देशी कंपनी के सिवाय, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है, की दशा में,—
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के सात प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के बारह प्रतिशत की दर से ;
(छ) देशी कंपनी से भिन्न, प्रत्येक कंपनी की दशा में,—
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के दो प्रतिशत की दर से ;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि उपरोक्त (क) और (ख) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय,—
(क) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है ;
(ख) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(ग) दो करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम दो करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दो करोड़ रुपए से अधिक है ;
(घ) पांच करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम पांच करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पांच करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु उपरोक्त (ग) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय,—
(क) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है ;
(ख) एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु उपरोक्त (घ) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय,—
(क) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(ख) दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दस करोड़ रुपए से अधिक है ;
परन्तु उपरोक्त (ङ) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि ऐसी प्रत्येक कंपनी की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि ऐसी प्रत्येक कंपनी की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दस करोड़ रुपए से अधिक है :
परन्तु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा 115खखङ की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन कर से प्रभार्य पहले परन्तुक के अधीन संगणित "अग्रिम कर" को ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परन्तु यह भी कि ऐसी प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम को ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य आय के संबंध में, पहले परंतुक के अनुसार संगणित "अग्रिम कर", संघ के प्रयोजनों के लिए व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में संगणित अधिभार द्वारा बढ़ा दिया जाएगा,—
(i) पांच लाख रुपए से अधिक किंतु एक करोड़ रुपए से अनधिक कुल आय वाले, (आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश या आय के माध्यम से आय सहित), "ऐसे अग्रिम कर के दस प्रतिशत की दर पर" ;
(ii) एक करोड़ रुपए से अधिक किंतु दो करोड़ रुपए से अनधिक कुल आय वाले, (आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश या आय के माध्यम से आय सहित), "ऐसे अग्रिम कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर पर" ;
(iii) दो करोड़ रुपए से अधिक कुल आय वाले, (आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश या आय के माध्यम से आय को छोड़कर), "ऐसे अग्रिम कर के बीस प्रतिशत की दर पर" ; और
(iv) दो करोड़ रुपए से अधिक कुल आय वाले, किंतु ऊपर खंड (iii) के अंतर्गत नहीं आने वाले (आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन लाभांश या आय के माध्यम से आय सहित), "ऐसे अग्रिम कर के पन्द्रह प्रतिशत की दर पर" :
परंतु यह भी कि जहां धारा 115खकग की उपधारा (1क) के लागू होने की दशा में तथा कुल आय के अंतर्गत आय-कर अधिनियम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन प्रभार्य लाभांश भी है, आय के उस भाग के संबंध में "अग्रिम कर" पर अधिभार की दर भी है, पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगा :
परंतु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी विनिर्दिष्ट निधि की दशा में, जिसकी आय, धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है और जहां ऐसी आय में आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन कोई आय सम्मिलित है, आय के उस भाग पर संगणित अग्रिम कर को किसी अधिभार द्वारा नहीं बढ़ाया जाएगा :
परंतु यह भी कि केवल कंपनियों के इसके सदस्यों से मिलकर बने व्यक्तियों के संगम की दशा में तथा धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन प्रभार्य आय पर, "अग्रिम कर" पर अधिभार की दर भी है, पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगा :
परन्तु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा (2) के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं, या प्रत्येक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय निम्नलिखित से अधिक है,—
(क) पचास लाख रुपए से अधिक है, किंतु एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम पचास लाख रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो पचास लाख रुपए से अधिक है ;
(ख) एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दो करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है ;
(ग) दो करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम दो करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दो करोड़ रुपए से अधिक है ;
परन्तु यह भी कि ऐसी प्रत्येक निवासी सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी आय, आय-कर अधिनियम की धारा 115खकघ या धारा 115खकङ के अधीन कर से प्रभार्य है, पहले परंतुक के अनुसार संगणित आय-कर की रकम को ऐसे "अग्रिम कर" के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(10) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 3 का पैरा 'क' लागू होता है या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति या हिंदू अविभक्त कुटुंब या व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं या प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति, जो एक निवासी है, की दशा में, जिसकी आय आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, वहां निर्धारिती ने पूर्ववर्ष में या, यदि आय-कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर आय-कर पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है, ऐसी अन्य अवधि में कुल आय के अतिरिक्त पांच हजार रुपए से अधिक कोई शुद्ध कृषि-आय भी है और कुल आय दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां प्रवृत्त दर या दरों से, उक्त अधिनियम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन आय-कर प्रभारित करने में अथवा उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" की संगणना करने में,—
(क) शुद्ध कृषि-आय को, कुल आय के संबंध में, केवल यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" प्रभारित या संगणित करने के प्रयोजन के लिए, खंड (ख) में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा, मानो शुद्ध कृषि-आय कुल आय के प्रथम दो लाख पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में समाविष्ट हो, किंतु कर के दायित्वाधीन न हो ; और
(ख) यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" निम्नलिखित रीति से प्रभारित या संगणित किया जाएगा, अर्थात् :—
(i) कुल आय और शुद्ध कृषि-आय को संकलित किया जाएगा और संकलित आय के संबंध में आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम, उक्त पैरा क या धारा 115खकग की उपधारा (1क) में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुल आय हो ;
(ii) शुद्ध कृषि-आय में दो लाख पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि-आय के संबंध में आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम, उक्त पैरा क या धारा 115खकग की उपधारा (1क) में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी, मानो शुद्ध कृषि-आय, कुल आय हो ;
(iii) उपखंड (i) के अनुसार अवधारित आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम में से उपखंड (ii) के अनुसार अवधारित, यथास्थिति, आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार प्राप्त राशि, कुल आय के संबंध में, यथास्थिति, आय-कर या "अग्रिम कर" होगी :
परन्तु ऐसे प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो पहली अनुसूची के भाग 3 के पैरा क की मद (II) में निर्दिष्ट भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या उससे अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम की आयु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "तीन लाख रुपए" शब्द रखे गए हों :
परन्तु यह और कि ऐसे प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो पहली अनुसूची के भाग 3 के पैरा क की मद (III) में निर्दिष्ट भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक की आयु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "पांच लाख रुपए" शब्द रखे गए हों :
परन्तु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं या प्रत्येक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति, की दशा में जो निवासी है, जिसकी आय आय-कर अधिनियम की धारा 115खकग की धारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के उपबंधों का वैसे ही प्रभाव होगा मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "तीन लाख रुपए" शब्द रख दिए गए हों :
परंतु यह भी कि इस प्रकार संकलित आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम पर, प्रत्येक दशा में परिकलित अधिभार इस धारा में उपबंधित रीति में, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा ;
(11) उपधारा (1) से उपधारा (3) में यथा विनिर्दिष्ट और उसमें उपबंधित रीति से परिकलित, संघ के प्रयोजनों के लिए, अधिभार द्वारा बढ़ाई गई आय-कर की रकम को, ऐसे आय-कर और अधिभार पर चार प्रतिशत की दर से परिकलित "आय-कर पर स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर" नाम से ज्ञात, अतिरिक्त अधिभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और बढ़ा दिया जाएगा, जिससे सार्वत्रिक स्तर की क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवाओं तथा बुनियादी शिक्षा और माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपलब्ध और उसका वित्तपोषण करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके ।
(12) उपधारा (4) से उपधारा (10) में यथा विनिर्दिष्ट और उसमें उपबंधित रीति से परिकलित, संघ के प्रयोजनों के लिए, अधिभार द्वारा बढ़ाई गई आय-कर की रकम को, ऐसे आय-कर और अधिभार पर चार प्रतिशत की दर से परिकलित "आय-कर पर स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर" नाम से ज्ञात, अतिरिक्त अधिभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और बढ़ा दिया जाएगा, जिससे सार्वत्रिक स्तर की क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी शिक्षा और माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपलब्ध कराने और उसका वित्तपोषण करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात, उन दशाओं में लागू नहीं होगी, जिनमें उपधारा (5), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा (8) में उल्लिखित आय-कर अधिनियम की धाराओं के अधीन कर की कटौती या संग्रहण किया जाना है, यदि स्रोत पर कर की कटौती या स्रोत पर कर के संग्रहण के अधीन रहते हुए आय को देशी कंपनी और किसी अन्य व्यक्ति को, जो भारत में निवासी है, संदत्त किया जाता है :
परंतु यह और कि इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात, आय-कर अधिनियम की धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी विनिर्दिष्ट निधि के आय-कर की बाबत जैसा कि उपधारा (9) में विनिर्दिष्ट किया गया है, जिसकी संगणना आय-कर अधिनियम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट आय पर की गई है, लागू नहीं होगी।
(13) इस धारा और पहली अनुसूची के प्रयोजनों के लिए,—
(क) "देशी कंपनी" से कोई भारतीय कंपनी या कोई अन्य ऐसी कंपनी अभिप्रेत है, जिसने 1 अप्रैल, 2023 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए, आय-कर अधिनियम के अधीन आय-कर के दायित्वाधीन अपनी आय के संबंध में ऐसी आय में से संदेय लाभांशों (जिनके अंतर्गत अधिमानी शेयरों पर लाभांश भी हैं) की घोषणा और भारत में उनके संदाय के लिए इंतजाम कर लिए हैं ;
(ख) "बीमा कमीशन" से बीमा कारबार की याचना करने या उसे उपाप्त करने के लिए (जिसके अन्तर्गत बीमा पालिसियों को जारी रखने, उनका नवीकरण या उन्हें पुनरुज्जीवित करने से संबंधित कारबार है) कमीशन के रूप में या अन्यथा कोई पारिश्रमिक या इनाम अभिप्रेत है ;
(ग) किसी व्यक्ति के संबंध में, "शुद्ध कृषि-आय" से, पहली अनूसूची के भाग 4 में अंतर्विष्ट नियमों के अनुसार संगणित, उस व्यक्ति की किसी भी स्रोत से व्युत्पन्न कृषि-आय की कुल रकम अभिप्रेत है ;
(घ) अन्य सभी शब्दों या पदों के, जो इस धारा में या पहली अनुसूची में प्रयुक्त हैं, किन्तु इस उपधारा में परिभाषित नहीं हैं और आय-कर अधिनियम में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उनके उस अधिनियम में हैं ।

