आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 2

परिभाषाएँ

धारा

धारा संख्या

2

अध्याय शीर्षक

अध्याय I - प्रारंभिक

अधिनियम

बीमांकक अधिनियम, 2006

वर्ष

परिभाषाएँ

परिभाषाएँ

2. (1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,—

(क) “एक्चुअरी” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो भावी आकस्मिक घटनाओं के वर्तमान प्रभावों का निर्धारण करने में, अथवा बीमा के विभिन्न क्षेत्रों में वित्तीय मॉडलिंग और जोखिम विश्लेषण में, अथवा जीवन हितों और बीमा जोखिमों के मूल्य की गणना करने में, अथवा पॉलिसियों के अभिकल्पन और मूल्य निर्धारण में, लाभों का निर्धारण करने में, बीमा व्यवसाय, वार्षिकी, बीमा और पेंशन दरों से संबंधित दरों की संस्तुति करने में, अनुभवजन्य आधार पर तैयार की गई तालिकाओं के आधार पर दक्ष हो, और इसमें ऐसा सांख्यिकीविद् भी सम्मिलित है जो ऐसी प्रौद्योगिकी, कराधान, कर्मचारी लाभ तथा अन्य जोखिम प्रबंधन और निवेश में संलग्न हो, और जो संस्थान का फेलो सदस्य हो; और “एक्चुअरियल विज्ञान ” पद का अर्थ भी तदनुसार समझा जाएगा;

(ख) “एक्चुअरियल संस्था” से आशय 1860 के संस्था पंजीकरण अधिनियम (1860 का 21) तथा बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट्स अधिनियम, 1950 (1950 का बॉम्बे अधिनियम संख्‍या XXXIX) के अंतर्गत पंजीकृत भारतीय  एक्चुअरियल संस्था से है;

(ग) “नियुक्त दिवस” से आशय वह तिथि है, जिस तिथि को धारा 3 की उप-धारा (1) के अंतर्गत संस्थान का गठन किया जाता है;

(घ) “प्राधिकरण” से आशय धारा 32 में उल्लिखित अपीलीय प्राधिकरण से है;

(ङ) “बोर्ड” से आशय धारा 43 की उप-धारा (1) के अंतर्गत गठित गुणवत्ता समीक्षा बोर्ड से है;

(च) “परिषद” से आशय धारा 12 में उल्लिखित संस्थान की परिषद से है;

(छ) “फेलो” से आशय संस्थान का फेलो सदस्य है;

(ज) “संस्थान” से आशय धारा 3 के अंतर्गत गठित भारतीय एक्चुअरियल संस्थान से है;

(झ) “सदस्य” से आशय ऐसा व्यक्ति है, जिसका नाम संस्थान द्वारा अनुरक्षित  सदस्यों के रजिस्टर में अंकित है;

(ञ) “निर्धारित” से आशय इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित है;

(ट) “अध्यक्ष” से आशय परिषद के अध्यक्ष से है;

(ठ) “रजिस्टर” से आशय इस अधिनियम के अंतर्गत संस्थान द्वारा अनुरक्षित सदस्यों के रजिस्टर से है;

(ड) “निर्दिष्ट” से आशय इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों द्वारा निर्दिष्ट है;

(ढ) “अधिकरण” से आशय धारा 16 की उप-धारा (1) के अंतर्गत स्थापित अधिकरण से है;

(ण) “उपाध्यक्ष” से आशय परिषद के उपाध्यक्ष से है;

(त) “वर्ष” से आशय किसी वर्ष की 1 अप्रैल से आरंभ होकर उसके पश्चातवर्ती वर्ष की 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि से है।

(2) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित होने के सिवाय, संस्थान का कोई सदस्य, तब “अभ्यास में होना” समझा जाएगा, जब वह व्यक्तिगत रूप से या अभ्यासरत एक्चुरिज के साथ साझेदारी में, किसी कंपनी के सदस्य या कर्मचारी के रूप में, चाहे उसे पारिश्रमिक प्राप्त हुआ हो या प्राप्त होना हो,—

(i) एक्चुअरियल व्यवसाय में संलग्न हो; या

(ii) बीमा, पेंशन, निवेश, वित्त और प्रबंधन के क्षेत्रों में एक्चुअरियल तकनीकों के अनुप्रयोग से संबंधित सेवाएँ प्रदान करने का प्रस्ताव करे या ऐसी सेवाएँ प्रदान करे; या

(iii) ऐसी अन्य सेवाएँ प्रदान करे, जिन्हें परिषद की राय में अभ्यासरत एक्चुअरी द्वारा प्रदान किया जाता है या किया जा सकता है; या

(iv) ऐसे किसी व्यक्ति के नियोजन में हो, जो उपर्युक्त वाक्यांश (क), (ख) और (ग) में उल्लिखित एक या अधिक गतिविधियों में संलग्न हो,

और “अभ्यासरत” शब्द तथा उसके व्याकरणिक रूपों और समानार्थी अभिव्यक्तियों का अर्थ भी तदनुसार समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण— इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिए, पद “कंपनी”  में कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क में परिभाषित सार्वजनिक वित्तीय संस्था भी सम्मिलित होगी।

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