आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 199

कटौती किए गए कर की बाबत मुजरा

धारा

धारा संख्या

199

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

कटौती किए गए कर की बाबत मुजरा

कटौती किए गए कर की बाबत मुजरा

42-55[कटौती किए गए कर की बाबत मुजरा

199. (1) ऐसी कोर्इ कटौती, जो इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार की गर्इ है और केन्द्रीय सरकार को संदत्त की गर्इ है, यथास्थिति, उस व्यक्ति की ओर से, जिसकी आय से कटौती की गर्इ थी या, यथास्थिति, प्रतिभूति के स्वामी की ओर से या निक्षेपकर्ता की ओर से या संपत्ति के स्वामी की ओर से या यूनिट धारक की ओर से अथवा शेयरधारक की ओर से कर का संदाय समझी जाएगी।

(2) ऐसी कोर्इ राशि, जो धारा 192 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट है और केन्द्रीय सरकार को संदत्त की गर्इ है, ऐसे व्यक्ति की ओर से, जिसकी आय की बाबत कर का ऐसा संदाय किया गया है, संदत्त कर समझी जाएगी।

(3) बोर्ड, इस अध्याय के उपबंधों के निबंधनों के अनुसार कटौती किए गए कर या संदत्त कर की बाबत मुजरा देने के प्रयोजनों के लिए, ऐसे नियम बना सकेगा, जो आवश्यक हों, जिनके अंतर्गत उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यक्तियों से भिन्न किसी व्यक्ति को और उस निर्धारण वर्ष के प्रति, जिसके लिए ऐसा मुजरा दिया जा सकेगा, मुजरा देने के प्रयोजनों के लिए नियम भी हैं।]

 

42-55. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2008 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से, वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2005 से, वित्त (सं.2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005/ 1.10.2004 से, वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से, वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से, वित्त (सं.2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से, वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.6.1993 से, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से, वित्त (सं.2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से, प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.11.1989 से प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से, वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से, वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से, वित्त अधिनियम 1968 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से, वित्त (सं.2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से और वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से यथासंशोधित धारा 199 इस प्रकार थी:

"199. कटौती किए गए कर की बाबत मुजरा–(1) कोर्इ कटौती जो इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार की गर्इ है और केन्द्रीय सरकार को संदत्त की गर्इ है, यथास्थिति, उस व्यक्ति की ओर से, जिसकी कटौती की गर्इ थी या प्रतिभूति के स्वामी की या निक्षेपकर्ता या संपत्ति के स्वामी अथवा यूनिटधारक की या शेयरधारक की ओर से कर का संदाय समझी जाएगी और इस प्रकार कटौती की गर्इ रकम, धारा 203 के अधीन दिया गया प्रमाणपत्र पेश करने पर इस अधिनियम के अधीन उस निर्धारण वर्ष के लिए, जिसके लिए ऐसी आय निर्धारणीय है, किए गए निर्धारण में मुजरा की जाएगी :

परन्तु

(i) ऐसी दशा में, जहां ऐसा व्यक्ति या स्वामी या निक्षेपकर्ता या यूनिट धारक या शेयरधारक ऐसा व्यक्ति है, जिसकी आय धारा 60, धारा 61, धारा 64, धारा 93 या धारा 94 के उपबंधों के अधीन अन्य व्यक्ति की कुल आय में सम्मिलित की गर्इ है वहां यह समझा जाएगा कि ऐसा संदाय ऐसे अन्य व्यक्ति की ओर से किया गया है और रकम ऐसे भिन्न व्यक्ति को मुजरा की जाएगी;

(ii) किसी अन्य दशा में जहां किसी शेयर पर लाभांश किसी शेयरधारक से भिन्न व्यक्ति की आय के रूप में निर्धारणीय है वहां यह समझा जाएगा कि संदाय ऐसे भिन्न व्यक्ति की ओर से किया गया है और रकम ऐसी परिस्थितियों में, जो विहित की जाएं, ऐसे भिन्न व्यक्ति को मुजरा की जाएगी :

परन्तु यह और कि जहां कोर्इ संपत्ति, निक्षेप, प्रतिभूति, यूनिट या शेयर संयुक्त रूप से दो या दो से अधिक ऐसे व्यक्तियों के स्वामित्वाधीन है, जो भागीदारी गठित नहीं करते, वहां यह समझा जाएगा कि संदाय ऐसे हर व्यक्ति की ओर से उसी अनुपात में किया गया है और रकम ऐसे हर एक व्यक्ति के नाम उसी अनुपात में मुजरा की जाएगी जिसमें ऐसे निक्षेप पर या प्रतिभूति पर किराया, ब्याज या यूनिट की बाबत आय अथवा शेयर पर लाभांश उसकी कुल आय के रूप में निर्धारणीय है।

(2) धारा 192 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट और केंद्रीय सरकार को संदत्त कोर्इ राशि उस व्यक्ति की ओर से संदत्त कर समझी जाएगी जिसकी आय की बाबत कर का ऐसा संदाय किया गया है और उस निर्धारण वर्ष के लिए जिसके लिए ऐसी आय निर्धारणीय है, इस अधिनियम के अधीन निर्धारण में धारा 203 के अधीन दिए गए प्रमाणपत्र को पेश करने पर इस प्रकार संदत्त राशि के लिए उसको मुजरा की जाएगी।

(3) जहां कोर्इ कटौती, इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार 1 अपै्रल, 2008 को या उसके पश्चात् की जाती है और केंद्रीय सरकार को संदत्त की जाती है, वहां कटौती किए गए और धारा 203कक में निर्दिष्ट विवरण में विनिर्दिष्ट कर की रकम, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यक्तियों की ओर से संदत्त कर मानी जाएगी और इस अधिनियम के अधीन किए गए निर्धारण में इस प्रकार कटौती की गर्इ रकम उसे उस निर्धारण वर्ष के लिए, जिसके लिए ऐसी आय निर्धारणीय है, प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए बिना, मुजरा की जाएगी।"

परिपत्र सं. 3-डी(XXI-20), तारीख 30.3.1967 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इनकम टैक्स ऐक्ट।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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