आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 197क

कुछ दशाओं में कटौती का न किया जाना

धारा

धारा संख्या

197क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

कुछ दशाओं में कटौती का न किया जाना

कुछ दशाओं में कटौती का न किया जाना

19[कुछ दशाओं में कटौती का न किया जाना

20197क. 21(1) 22[* * *] धारा 194 23[* * *] 24[या धारा 194ड़ड़] में किसी बात के होते हुए भी, भारत में निवासी किसी व्यष्टि की दशा में उक्त धाराओं में से किसी के भी अधीन कर की कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि ऐसा व्यष्टि, यथास्थिति, 25[* * *] धारा 194 26[27[* * *] या धारा 194ड़ड़] में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को लिखित रूप में इस आशय की घोषणा दो-दो प्रतियों में विहित फार्म में और विहित रीति से सत्यापित करके देता है कि 28[उसकी उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय पर कर शून्य होगा]।

29[(1क) 30[धारा 193 या] धारा 194क या धारा 194ट में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में (जो कंपनी या फर्म नहीं है) 31[उक्त किसी भी धारा के] अधीन कर की कटौती नहीं की जाएगी, यदि ऐसा व्यक्ति, यथास्थिति 30[धारा 193 या] धारा 194क या धारा 194ट में निर्दिष्ट प्रकृति की आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को विहित फार्म में और विहित रीति से सत्यापित करके, लिखित रूप में इस आशय की घोषणा की दो प्रतियां देता है कि उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना करने में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय पर कर शून्य होगा।]

32[(1ख) इस धारा के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे जहां, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (1क) में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी आय की रकम या ऐसी आय राशियों का योग जो, उस पूर्ववर्ष के दौरान, जिसमें ऐसी आय सम्मिलित की जानी है, जमा की गर्इ है या संदाय की गर्इ है या जमा किए जाने या संदाय किए जाने की संभावना है, उस अधिकतम रकम से अधिक है, जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है।]

33[(1ग) धारा 193 या धारा 194 या धारा 194क या धारा 194ड़ड़ या धारा 194ट या इस धारा की उपधारा (1ख) में किसी बात के होते हुए भी, भारत में निवासी किसी ऐसे व्यष्टि की दशा में कर की कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय 33क[साठ] वर्ष या उससे अधिक की आयु का है 34[***], यदि ऐसा व्यष्टि, यथास्थिति, धारा 193 या धारा 194 या धारा 194क या धारा 194ड़ड़ या धारा 194ट में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी आय के संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को विहित प्ररूप में35 दो प्रतियों में लिखित रूप में और विहित रीति में सत्यापित इस आशय का एक घोषणापत्र प्रस्तुत कर देता है कि उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना करने में सम्मिलित की जानी है, उसकी अनुमानित कुल आय पर, कर शून्य होगा।

36[(1घ) इस धारा में की किसी बात के होते हुए भी, किसी अपतट बैंककारी यूनिट द्वारा–

() किसी अनिवासी या ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो भारत में मामूली तौर पर निवासी नहीं हो, 1 अपै्रल, 2005 को या उसके पश्चात् किए गए निक्षेप पर; या

() किसी अनिवासी या ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो भारत में मामूली तौर पर निवासी नहीं है, 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् लिए गए उधार पर,

संदत्त ब्याज से कर की कटौती नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "अपतट बैंककारी यूनिट" का वही अर्थ है, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड () में उसका है।]

36क[(1ड़) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, धारा 10 के खंड (44) में निर्दिष्ट नर्इ पेंशन प्रणाली न्यास के लिए या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को किए गए किसी संदाय से कर की कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।]

36ख[(1) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी संस्था, संगम या निकाय या संस्थाओं, संगमों या निकायों के वर्ग को ऐसे विनिर्दिष्ट संदाय से कर की कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, जो केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचित किए जाएं।]

(2) उपधारा (1) 37[या उपधारा (1क)] 38[या उपधारा (1ग)] में विनिर्दिष्ट प्रकृति की आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति उपधारा (1) 37[या उपधारा (1क)] 38[या उपधारा (1ग)] में निर्दिष्ट घोषणा की एक प्रति, उसे घोषणा दिए जाने के ठीक आगामी मास की सातवीं तारीख को या उसके पहले 39[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] को परिदत्त करेगा या कराएगा।]

 

19. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.6.1982 से अंत:स्थापित।

20. परिपत्र सं. 351, तारीख 26.11.1982 और परिपत्र सं. 4/2002, तारीख 16.7.2002 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

21. नियम 29ग और प्ररूप सं. 15छ और 15ज देखिए।

22. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से ''धारा 193 या'' शब्दों का लोप किया गया।

23. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से ''या धारा 194क'' शब्दों का लोप किया गया।

24. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।

25. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "धारा 193 या" शब्दों का लोप किया गया।

26. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से ''या धारा 194क'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

27. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से ''या धारा 194क'' शब्दों का लोप किया गया।

28. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से ''उसकी उस पूर्व वर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय आय-कर के लिए दायी न्यूनतम से कम होगी'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

29. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापित किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से यथा अंत:स्थापित उपधारा (1क) निम्न प्रकार थी :

''(1क) धारा 194क में किसी बात के होते हुए भी किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में (जो कंपनी या फर्म नहीं है) उस धारा के अधीन कर की कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी यदि ऐसा व्यक्ति उस धारा में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी आय का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को विहित फार्म में और विहित रीति से सत्यापित करके, लिखित रूप में इस आशय की घोषणा दो प्रतियों में देता है कि उसकी उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना करने में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय पर कर शून्य होगा।''

30. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।

31. यथोक्त द्वारा ''उक्त धाराओं में से किसी के'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

32. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित।

33. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।

33क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "पैंसठ" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

34. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2006 से भूतलक्षी प्रभाव से "और जो धारा 88ख में निर्दिष्ट अपनी कुल आय पर आयकर की रकम से कटौती के लिए हकदार है" शब्दों का लोप किया गया।

35. नियम 29ग और प्ररूप सं. 15ज देखिए।

36. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा 10.2.2006 से अंत:स्थापित।

36क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से अंत:स्थापित।

36ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।

37. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से अंत:स्थापित।

38. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।

39. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''आयुक्त'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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