आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
सुलभता विकल्प
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 197क

कुछ मामलों में किए जाने के लिए कोई कटौती

धारा

धारा संख्या

197क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2001

कुछ मामलों में किए जाने के लिए कोई कटौती

कुछ मामलों में किए जाने के लिए कोई कटौती

77[कुछ दशाओं में कटौती का न किया जाना

78197क. 79(1) 80[* * *] धारा 194 81[* * *] 82[या धारा 194ड़ड़] में किसी बात के होते हुए भी, भारत में निवासी किसी व्यष्टि की दशा में उक्त धाराओं में से किसी के भी अधीन कर की कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि ऐसा व्यष्टि, यथास्थिति, 80[* * *] धारा 194 83[84[* * *] 82[या धारा 194ड़ड़] में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को लिखित रूप में इस आशय की घोषणा दो-दो प्रतियों में विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित करके देता है कि 85[उसकी उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय पर कर शून्य होगा]।

86[(1क) 87[धारा 193 या] धारा 194क या धारा 194ट में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में (जो कंपनी या फर्म नहीं है) 88[उक्त किसी भी धारा के] अधीन कर की कटौती नहीं की जाएगी, यदि ऐसा व्यक्ति, यथास्थिति 87[धारा 193 या] धारा 194क या धारा 194ट में निर्दिष्ट प्रकृति की आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित करके, लिखित रूप में इस आशय की घोषणा की दो प्रतियां देता है कि उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना करने में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय पर कर शून्य होगा।]

(2) उपधारा (1) 89[या उपधारा (1क)] में विनिर्दिष्ट प्रकृति की आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति उपधारा (1) 89[या उपधारा (1क)] में निर्दिष्ट घोषणा की एक प्रति, उसे घोषणा दिए जाने के ठीक आगामी मास की सातवीं तारीख को या उसके पहले 90[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] को परिदत्त करेगा या कराएगा।]

 

77. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.6.1982 से अंत:स्थापित।

78. परिपत्र सं. 351, तारीख 26.11.1982 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

79. नियम 29ग और प्ररूप सं. 15छ, 15ज और 15झ देखिए।

80. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "धारा 193 या" शब्दों का लोप किया गया।

81. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से "या धारा 194क" शब्दों का लोप किया गया।

82. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।

83. यथोक्त द्वारा "या धारा 194क" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

84. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से "या धारा 194क" शब्दों का लोप किया गया।

85. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से "उसकी उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय आय-कर के लिए दायी न्यूनतम से कम होगी" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

86. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापित किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से यथा अंत:स्थापित उपधारा (1क) निम्न प्रकार थी :

"(1क) धारा 194क में किसी बात के होते हुए भी किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में (जो कंपनी या फर्म नहीं है) उस धारा के अधीन कर की कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी यदि ऐसा व्यक्ति उस धारा में निर्दिष्ट प्रकृति की किसी आय का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित करके, लिखित रूप में इस आशय की घोषणा दो प्रतियों में देता है कि उसकी उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसी आय उसकी कुल आय की संगणना करने में सम्मिलित की जानी है, प्राक्कलित कुल आय पर कर शून्य होगा।"

87. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।

88. यथोक्त द्वारा "उक्त धाराओं में से किसी के" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

89. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से अंत:स्थापित।

90. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

© कॉपीराइट. टैक्समैन पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड

फ़ुटनोट