आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 197

निम्नतर दर पर कटौती के लिए प्रमाणपत्र

धारा

धारा संख्या

197

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2001

निम्नतर दर पर कटौती के लिए प्रमाणपत्र

निम्नतर दर पर कटौती के लिए प्रमाणपत्र

निम्नतर दर पर कटौती के लिए प्रमाणपत्र

197. 63(1) 64[उपधारा (2क) के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, 65[64[जहां किसी व्यक्ति की आय की दशा में], यथास्थिति, जमा करते समय या संदाय करते समय, आय-कर की कटौती धारा 192, धारा 193 66[धारा 194], धारा 194क, धारा 194घ, 66क[धारा 194ज], 67[धारा 194झ], 68[धारा 194ट] 69[,धारा 194ठ] और धारा 195 के उपबंधों के अधीन प्रवृत्त दरों पर करना अपेक्षित है, वहां यदि निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि] पाने वाले की कुल आय 70[* * *] इतनी है कि यथास्थिति, आय-कर 71[* * *] की कटौती किन्हीं निम्नतर दरों के अनुसार करना या आय कर 71क[* * *] की कोर्इ कटौती नहीं करना न्यायोचित है तो 72[निर्धारण] अधिकारी, निर्धारिती द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर उसे ऐसा प्रमाणपत्र देगा, जो उचित हो।]

(2) जहां ऐसा कोर्इ प्रमाणपत्र दिया जाता है वहां आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति जब तक कि ऐसा प्रमाणपत्र 73[निर्धारण] अधिकारी द्वारा रद्द नहीं कर दिया जाता, आय-कर 74[* * *] की कटौती यथास्थिति ऐसे प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट दरों के अनुसार करेगा या कर की कटौती नहीं करेगा।

75[(2क) बोर्ड, निर्धारितियों की सुविधा को और राजस्व के हित को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे मामले में ऐसे नियम बना सकेगा जिनमें ऐसे मामले, और वे परिस्थितियां, जिनके अधीन, उपधारा (1) के अधीन प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जा सकता है और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए ऐसा प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा विनिर्दिष्ट होंगी और उससे संबंधित सभी अन्य विषयों का उपबंध होगा।]

(3) 76[* * *]

 

63. नियम 28(1), 28कक और 29 तथा प्ररूप सं. 13, 15 और 15कक देखिए।

पत्र [फा.सं. 1(54)-63/टी.पी.एल], तारीख 18.5.1963, पत्र [फा.सं. 20/23/67-आर्इ.टी.(ए-I)], तारीख 28.7.1967, परिपत्र सं. 761, तारीख 13.1.1998 और परिपत्र सं. 774, तारीख 17.3.1999 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

64. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से "कंपनी से भिन्न किसी व्यक्ति की आय की दशा में जहां" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

65. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से निम्नलिखित के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया :

"कंपनी से भिन्न किसी व्यक्ति की आय की दशा में, जहां--

() यथास्थिति, जमा किए जाने के समय या संदाय करते समय आय-कर की कटौती धारा 192, 193, 194क, 194घ और 195 के उपबंधों के अधीन प्रवृत्त दरों पर करना अपेक्षित हो,

() अनिवासी की दशा में, संदाय के समय धारा 194 के उपबंधों के अधीन प्रवृत्त दरों पर आय-कर की कटौती करना अपेक्षित हो,

वहां यदि निर्धारण अधिकारी का समाधान हो जाता है कि]

इससे पूर्व प्रतिस्थापित भाग में वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से, वित्त (सं 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से, वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से, वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से और प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अनेक संशोधन किए गए थे।

66. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.6.1993 से अंत:स्थापित।

66क. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से अंत:स्थापित।

67. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से अंत:स्थापित।

68. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित

69. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।

70. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से "या कुल विश्व आय" शब्दों का लोप किया गया।

71. यथोक्त द्वारा "या अधिकर" शब्दों का लोप किया गया।

71क. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से "या अधिकर" शब्दों का लोप किया गया।

72. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

73. यथोक्त द्वारा "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

74. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से "और अधिकर" शब्दों का लोप किया गया।

75. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से अंत:स्थापित।

76. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से उपधारा (3) का लोप किया गया। वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से यथा प्रतिस्थापित, उपधारा (3) लोप किए जाने से पूर्व, निम्न प्रकार थी :

"(3) जहां किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी यह मानता है कि धारा 80ट के उपबंधों के कारण धारा 194 में निर्दिष्ट पूर्ण लाभांश या उसका कोर्इ भाग प्राप्तिकर्ता की कुल आय की संगणना करने में कटौती योग्य होगा वहां वह उस लाभांश का शेयरधारक को संदाय करने या उसका चैक या वारंट जारी करने से पूर्व आय-कर अधिकारी को धारा 80ट के उपबंधों के अधीन कटौती किए जाने वाले लाभांश के आनुपातिक भाग का अवधारण करने के लिए आवेदन करेगा, और आय-कर अधिकारी द्वारा ऐसा अवधारण किए जाने पर ऐसी आनुपातिक राशि पर किसी कर की कटौती नहीं की जाएगी।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

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