सरकार, रिजर्व बैंक या कुछ निगमों को संदेय ब्याज या लाभांश या अन्य राशियां
83[सरकार, रिजर्व बैंक या कुछ निगमों को संदेय ब्याज या लाभांश या अन्य राशियां
196. इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, कर की कटौती किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी राशियों में से जो–
(i) सरकार को; या
(ii) भारतीय रिजर्व बैंक को; या
(iii) किसी केन्द्रीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित ऐसे निगम को, जिसको अपनी आय पर तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन आय-कर से छूट प्राप्त है; या
(iv) धारा 10 के खंड (23घ) के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि को,
संदेय है, उस दशा में नहीं की जाएगी, जिसमें ऐसी राशि उसे अपने स्वामित्व में की किन्हीं प्रतिभूतियों या शेयरों की बाबत ब्याज या लाभांश के रूप में संदेय है या जिसमें उसका पूर्ण फायदाप्रद हित है या उसे कोर्इ अन्य आय प्रोद्भूत या उद्भूत होती है।]
83. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित। इससे पहले यह वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से प्रतिस्थापित किया गया था।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

