आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 195क

आय, जिस पर "शुद्ध कर" संदेय है

धारा

धारा संख्या

195क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

आय, जिस पर "शुद्ध कर" संदेय है

आय, जिस पर "शुद्ध कर" संदेय है

80[आय, जिस पर "शुद्ध कर" संदेय है81

195क. 82[धारा 192 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट दशा से भिé किसी दशा में, जहां किसी करार या अन्य ठहराव के अधीन], इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में निर्दिष्ट किसी आय पर प्रभार्य कर किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा वहन किया जाना है, जिसके द्वारा आय संदेय है, वहां उन उपबंधों के अधीन कर की कटौती के प्रयोजनों के लिए, ऐसी आय उतनी रकम तक बढ़ा दी जाएगी जो उस वित्तीय वर्ष के लिए, जिसमें ऐसी आय संदेय है, प्रवृत्त दरों पर उसमें से कर की कटौती करने के पश्चात् ऐसे करार या ठहराव के अधीन शुद्ध रकम के बराबर होगी।]

 

80. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से अंत:स्थापित।

81. परिपत्र सं. 785, तारीख 24.11.1999 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

82. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से "जहां किसी करार या ठहराव के अधीन" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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