कतिपय व्यष्टियों या हिंदू अविभक्त कुटुंब द्वारा कतिपय राशियों का संदाय
1क[कतिपय व्यष्टियों या हिंदू अविभक्त कुटुंब द्वारा कतिपय राशियों का संदाय
194ड (1) कोर्इ व्यक्ति, जो व्यष्टि या कोर्इ हिंदू अविभक्त कुटुंब है (उनसे भिन्न, जिनसे धारा 194ज या धारा 194ञ के उपबंधों के अनुसार आय-कर की कटौती करना अपेक्षित है) और जो वित्तीय वर्ष के दौरान किसी संविदा के अनुसरण में किसी संकर्म (जिसके अंतर्गत किसी संकर्म को करने के लिए श्रम की आपूर्ति भी है) को करने के लिए या किसी कमीशन (जो धारा 194घ में निर्दिष्ट बीमा संबंधी कमीशन नही है) के माध्यम से या दलाली के माध्यम से या वृत्तिक सेवाओं हेतु फीस के माध्यम से किसी निवासी को किसी राशि का संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, ऐसी राशि को जमा करते समय या ऐसे राशि का नकद में या चेक या मांगदेय पत्र द्वारा या किसी अन्य पद्धति द्वारा संदाय करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, उस पर आय-कर के रूप में ऐसी राशि के पाँँच प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती करेगा:
परंतु इस धारा के अधीन उस समय कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि किसी वित्तीय वर्ष के दौरान निवासी को संदत्त, यथास्थिति, ऐसी राशि या ऐसी राशियों का योग पचास लाख रुपए से अधिक नहीं है।
(2) धारा 203क के उपबंध ऐसे किसी व्यक्ति को लागू नहीं होंगे, जिससे इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर की कटौती करना अपेक्षित है।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) "संविदा" का वही अर्थ होगा, जो धारा 194ग के स्पष्टीकरण के खंड (iii) में उसका है;
(ख) "कमीशन या दलाली " का वही अर्थ होगा, जो धारा 194ज के स्पष्टीकरण के खंड (i) में उसका है;
(ग) "वृत्तिक सेवाओं" का वही अर्थ होगा, जो धारा 194ञ के स्पष्टीकरण के खंड (क) में उसका है;
(घ) "संकर्म" का वही अर्थ होगा, जो धारा 194ग के स्पष्टीकरण के खंड (iv) में उसका है।
1क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.9.2019 से अंत:स्थापित ।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

