कतिपय कारबार में लगी हुर्इ भारतीय कंपनी से ब्याज के रूप में आय
61ग[कतिपय कारबार में लगी हुर्इ भारतीय कंपनी से ब्याज के रूप में आय
194ठग. (1) जहां उपधारा (2) में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में कोर्इ आय किसी अनिवासी को, जो कंपनी नहीं है या विदेशी कंपनी को किसी विनिर्दिष्ट कंपनी द्वारा संदेय है, वहां संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, ऐसी आय को पाने वाले के खाते में जमा करते समय या उसका नकद में या चेक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य ढंग से, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, संदाय करते समय उस पर पांच प्रतिशत की दर से आय-कर की कटौती करेगा।
(2) उपधारा (1) में विर्दिष्ट ब्याज, विनिर्दिष्ट कंपनी द्वारा–
(i) उसके द्वारा 1 जुलार्इ, 2012 को या उसके पश्चात्, किन्तु 1 जुलार्इ, 2015 के पूर्व किसी भी समय केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित,–
(क) किसी ऋण करार के अधीन; या
(ख) दीर्घकालिक अवसंरचना बंधपत्रों के निर्गमन के रूप में,
भारत के बाहर किसी स्रोत से विदेशी करेंसी में उधार ली गर्इ धनराशियों की बाबत; और
(ii) उस सीमा तक, जिस तक ऐसा ब्याज केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त, अनुमोदित दर पर ऋण या बंधपत्र और उसके प्रतिदाय के निबंधनों को ध्यान में रखते हुए, परिकलित ब्याज की रकम से अधिक नहीं है,
संदेय ब्याज के रूप में, आय होगी।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजन के लिए–
(क) "विदेशी करेंसी" पद का वही अर्थ है जो विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 2 के खंड (ड) में उसका है;
(ख) "विनिर्दिष्ट कंपनी" से कोर्इ भारतीय कंपनी अभिप्रेत है।]
61ग. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

