कतिपय स्थावर संपत्ति के अर्जन पर प्रतिकर का संदाय
61[कतिपय स्थावर संपत्ति के अर्जन पर प्रतिकर का संदाय
194ठक. कोर्इ व्यक्ति, जो किसी स्थावर संपत्ति (कृषि भूमि से भिन्न) के, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, अनिवार्य अर्जन के मद्दे प्रतिकर या वर्धित प्रतिकर या प्रतिफल के रूप में किसी राशि का किसी निवासी को संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, ऐसी राशि का नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से, इनमें से जो भी पहले हो, संदाय करते समय उस राशि के दस प्रतिशत के बराबर रकम की उस पर आय-कर के रूप में कटौती करेगा :
परंतु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती उस दशा में नहीं की जाएगी जहां कि वित्तीय वर्ष के दौरान किसी निवासी की यथास्थिति, ऐसे संदाय की रकम या ऐसे संदायों की कुल रकम 61क[दो] लाख रुपए से अधिक नहीं होती है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "कृषि भूमि" से भारत में की कृषि भूमि अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत धारा 2 के खंड (14) के उपखंड (iii) की मद (क) और मद (ख) में निर्दिष्ट किसी क्षेत्र में स्थित भूमि भी है;
(ii) "स्थावर संपत्ति" से कोर्इ भूमि (कृषि भूमि से भिन्न) या कोर्इ भवन या किसी भवन का भाग अभिप्रेत है।]
61. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
61क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "एक" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

