यूनिटों के संबंध में आय
95क[यूनिटों के संबंध में आय
194ट. कोर्इ व्यक्ति, जो किसी निवासी को,—
(क) धारा 10 के खंड (23घ) के अधीन विनिर्दिष्ट परस्पर निधि की यूनिटों; या
(ख) विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रशासक से यूनिटों; या
(ग) विनिर्दिष्ट कंपनी से यूनिटों,
के संबंध में किसी आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय जमा करते समय, किसी ढंग द्वारा उसका संदाय करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, उस पर दस प्रतिशत की दर से आयकर की कटौती करेगा:
परन्तु इस धारा के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे,—
(i) जहां, यथास्थिति, ऐसी आय की रकम का ऐसी राशियों की कुल रकम, जो पाने वाले के खाते में या पाने वाले को, उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा वित्तीय वर्ष के दौरान जमा की गर्इ है या उसको संदत्त की गर्इ हैं या जमा की जानी या संदत्त की जानी संभाव्य है, पांच हजार रुपए से अधिक नहीं होगी; या
(ii) यदि आय पूंजी अभिलाभ की प्रकृति की है।
स्पष्टीकरण 1—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) ''प्रशासक'' से ऐसा प्रशासक अभिप्रेत है जो भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की धारा 2 के खंड (क) में निर्दिष्ट है;
(ख) ''विनिर्दिष्ट कंपनी'' से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जो भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की धारा 2 के खंड (ज) में निर्दिष्ट है;
(ग) ''विनिर्दिष्ट उपक्रम'' का वही अर्थ होगा जो भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की धारा 2 के खंड (झ) में उसका है।
स्पष्टीकरण 2—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि जहां इस धारा में निर्दिष्ट ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा पुस्तकों में किसी खाते में, चाहे वह ''उचंत खाते'' के नाम से या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो, जमा की जाती है वहां ऐसा जमा किया जाना पाने वाले के खाते में ऐसा जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा की उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]
95क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

