इकाइयों के संबंध में आय
194ट. जहां धारा 10 के खंड (23घ) के विनिर्दिष्ट किसी पारस्परिक निधि या भारतीय यूनिट ट्रस्ट के यूनिटों के संबंध में किसी निवासी को कोर्इ आय संदेय है वहां उसका संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, पाने वाले के खाते में ऐसी आय जमा करते समय या उसका नकद में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से, इनमें से जो भी पहले हो, उसका संदाय करने के समय उस पर दस प्रतिशत की दर से आय-कर की कटौती करेगा :
परन्तु इस धारा के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे जहां, यथास्थिति, ऐसी आय या संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा पाने वाले के खाते में जमा की गर्इ या उसको संदत्त आय राशियों या ऐसी राशियों का जिसके पाने वाले के खाते में जमा किए जाने या उसको संदत्त किए जाने की संभावना है, योग 57[दो हजार पांच सौ] रुपए से अधिक नहीं है :
परन्तु यह और कि एक हजार रुपए* की रकम–
(क) यथास्थिति पारस्परिक निधि या भारतीय यूनिट ट्रस्ट के शाखा कार्यालय के संबंध में, और
(ख) किसी ऐसी विशिष्ट स्कीम के अधीन, जिसके अधीन यूनिटें जारी की गर्इ हैं,
जमा या संदत्त आय के प्रति निर्देश करते हुए संगणित की जाएगी:
58[परंतु यह भी कि 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् जमा की गर्इ या संदत्त किसी ऐसी आय से इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।]
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "भारतीय यूनिट ट्रस्ट" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट अभिप्रेत है;
(ख) जहां पूर्वोक्त कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे वह "उचंत खाते" के नाम से या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को पाने वाले के खाते में ऐसी रकम का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]
55. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से यथा अंत:स्थापित और वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से संशोधित धारा 194ट इस प्रकार थी:
’194ट. (1) जहां कोर्इ आय, धारा 10 के खंड (23घ) में विनिर्दिष्ट किसी पारस्परिक निधि या भारतीय यूनिट ट्रस्ट के यूनिटों के संबंध में किसी निवासी को संदेय है वहां उसका संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, पाने वाले के खाते में ऐसी आय जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से भुगतान करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, उस पर–
(क) यदि पाने वाली कंपनी है तो बीस प्रतिशत की दर से, और
(ख) अन्य पाने वालों की दशाओं में पन्द्रह प्रतिशत की दर से,
आय-कर की कटौती करेगा :
परन्तु इस उपधारा के अधीन कोर्इ कटौती किसी ऐसी आय से नहीं की जाएगी जो 1 जून, 1999 को या उसके पश्चात् जमा की गर्इ हो या जिसका संदाय किया गया हो।
(2) उपधारा (1) के उपबंध–
(i) वहां लागू नहीं होंगे जहां संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति द्वारा वित्तीय वर्ष के दौरान, यथास्थिति, पाने वाले के खाते में जमा की गर्इ या उसको संदत्त की गर्इ अथवा जमा की जाने या संदत्त किए जाने के लिए संभाव्य ऐसी आय की रकम या ऐसी आय की कुल रकम दस हजार रुपए से अधिक नहीं है :
परन्तु दस हजार रुपए की संगणना–
(क) यथास्थिति, पारस्परिक निधि या भारतीय यूनिट ट्रस्ट के शाखा कार्यालय के संबंध में; और
(ख) ऐसी किसी विशेष स्कीम के अधीन, जिसके अधीन यूनिट जारी किए गए हैं,
जमा या संदत्त की गर्इ आय के प्रति निर्देश से की जाएगी;
(ii) ऐसी रकम को लागू नहीं होंगे, जो 1 जुलार्इ, 1995 से पहले जमा की गर्इ है या संदत्त की गर्इ है;
(iii) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे, जो पारस्परिक निधि या भारतीय यूनिट ट्रस्ट की ऐसी स्कीम के अधीन, जो पहले से ही प्रवृत्त है और जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उसके अधीन यूनिटधारकों को आय देने की योजना को ध्यान में रखते हुए इस निमित्त विनिर्दिष्ट करें, पुरोधृत यूनिटों के संबंध में जमा की जाती है या संदत्त की जाती है; और
(iv) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे, जो भारतीय यूनिट ट्रस्ट की किसी स्कीम के अधीन पुरोधृत यूनिटों के संबंध में किसी ऐसी संस्था या निधि के खाते में जमा की गर्इ है या संदत्त की गर्इ है, जहां ऐसी आय धारा 11 और धारा 12 या धारा 10 के खंड (22) या खंड (22क) या खंड (23) या खंड (23कक) या खंड (23ग) के उपबंधों के अधीन उसकी कुल आय में सम्मिलित किए जाने के दायित्वाधीन नहीं है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "भारतीय यूनिट ट्रस्ट" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट अभिप्रेत है;
(ख) जहां पूर्वोक्त कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखाबहियों में किसी खाते में, चाहे वह उचंत खाते के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में ऐसी रकम का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।’
56. नियम 28(1), 28कक, 28कख, 29ग, 30, 31, 31क, 31कख और 37 तथा प्ररूप सं. 13, 15छ, 15ज, 16क, 26, 26कध और 26थ देखिए। परिपत्र सं. 715, तारीख 8.8.1995, परिपत्र सं. 3/2002, तारीख 28.6.2002, परिपत्र सं. 11, तारीख 22.11.2002, परिपत्र सं. 12, तारीख 22.11.2002, परिपत्र सं. 2/2003, तारीख 11.3.2003 और परिपत्र सं. 3/2003, तारीख 11.3.2003.
ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
57. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.8.2002 से भूतलक्षी प्रभाव से "एक हजार" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
58. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।
*"एक हजार रुपये" शब्दों के स्थान पर "दो हजार पाँच सौ रुपये" शब्द आने चाहिये।
[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

