कतिपय व्यष्टियों या हिन्दू अविभक्त कुटुंब द्वारा किराए का संदाय
93[कतिपय व्यष्टियों या हिन्दू अविभक्त कुटुंब द्वारा किराए का संदाय
194झख. (1) कोई व्यक्ति, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, (धारा 194झ के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट से भिन्न) और जो किसी पूर्ववर्ष के दौरान किसी मास या मास के भाग के लिए किराए द्वारा पचास हजार रुपए से अधिक किसी आय का संदाय किसी निवासी को करने के लिए उत्तरदायी है, वह ऐसी रकम के पांच प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती आय-कर के रूप में करेगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय-कर की कटौती, यथास्थिति, पूर्ववर्ष के अंतिम मास या किराएदारी के अंतिम मास, यदि वर्ष के दौरान संपत्ति रिक्त की जाती है, के लिए, ऐसी आय पर किराए को जमा करने के समय पाने वाले के खाते में या उसके नकद संदाय के समय या चेक अथवा ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य ढंग से जमा किए जाने के समय, इनमें जो पूर्वंतर हो, की जाएगी।
(3) धारा 203क के उपबंध, इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर की कटौती के लिए अपेक्षित किसी व्यक्ति को लागू नहीं होंगे ।
(4) ऐसे मामले में, जहां कर की कटौती 92कक[धारा 206कक 92ख[* * *] के उपबंधों] के अनुसार की जानी अपेक्षित है, ऐसी कटौती, यथास्थिति, पूर्ववर्ष के अंतिम मास या किराएदारी के अंतिम मास के लिए संदेय किराए की रकम से अधिक नहीं होगी।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "किराया" से किसी भूमि या भवन या दोनों के उपयोग के लिए किसी पट्टा, उप पट्टा, किराएदारी या किसी अन्य करार या ठहराव के अधीन किया गया कोई संदाय, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो, अभिप्रेत है।]
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

