आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 194झ

किराया

धारा

धारा संख्या

194झ

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2008

किराया

किराया


37[किराया

38194झ. कोर्इ व्यक्ति, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब नहीं है और जो 39[किसी निवासी] को किराए40 के रूप में किसी आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय जमा करते समय या उसे नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से संदाय करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, 41[उस पर–

42[() किसी मशीनरी या संयंत्र या उपस्कर के उपयोग के लिए दस प्रतिशत की दर से;

() जहां पाने वाला व्यष्टि या हिंदु अविभक्त कुटुंब है वहां किसी भूमि या भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन है) या भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन है) से संलग्न भूमि या फर्नीचर या फिटिंग के उपयोग के लिए पन्द्रह प्रतिशत की दर से;

() जहां पाने वाला व्यष्टि या हिंदु अविभक्त कुटुंब से भिन्न व्यक्ति है वहां किसी भूमि या भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन है) या भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन है) से संलग्न भूमि या फर्नीचर या फिटिंग के उपयोग के लिए बीस प्रतिशत की दर से,]

आय-कर की कटौती करेगा :]

परन्तु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती तब तक नहीं की जाएगी जब तक वित्तीय वर्ष के दौरान, पाने वाले के खाते में पूर्वोक्त व्यक्ति द्वारा जमा की गर्इ या उसको संदत्त की गर्इ या जमा किए जाने या संदत्त किए जाने के लिए संभाव्य, यथास्थिति, ऐसी आय की राशि या ऐसी आय की कुल राशि एक लाख बीस हजार रुपए से अधिक नहीं है :

43[परंतु यह और कि ऐसा कोर्इ व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब, जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या वृत्ति से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें किराए के रूप में ऐसी आय जमा या संदत्त की जाती है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमाओं से अधिक हो जाता है, इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती के लिए दायी होगा।]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

44[(i) "किराया" से किसी,–

() भूमि; या

() भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन भी है); या

() भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन भी है) से अनुलग्न भूमि, या

() मशीनरी; या

() संयंत्र; या

() उपस्कर; या

() फर्नीचर; और

() फिटिंग,

चाहे उपर्युक्त में से कोर्इ या सभी दाता के स्वामित्व में हैं अथवा नहीं, (पृथक रूप से या सामूहिक रूप से) के प्रयोग के लिए किसी पट्टे, उपपट्टे, किराएदारी या किसी अन्य करार या ठहराव के अधीन कोर्इ संदाय अभिप्रेत है, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो;]

(ii) जहां कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे वह "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में, ऐसी आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]

 

37. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से अंत:स्थापित।

38. परिपत्र सं. 699, तारीख 30.1.1995, परिपत्र सं. 715, तारीख 8.8.1995, परिपत्र सं. 718, तारीख 22.8.1995, परिपत्र सं. 735, तारीख 30.1.1996, परिपत्र सं. 736, तारीख 13.2.1996, परिपत्र सं. 5/2001, तारीख 2.3.2001, परिपत्र सं. 5/2002, तारीख 30.7.2002 तथा परिपत्र सं. 12/2002, तारीख 22.11.2002 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

नियम 28, 28कक, 28कख, 30, 31, 31क, 31कख और 37 तथा प्ररूप सं. 13, 16क, 26, 26कध और 26थ देखिए।

39. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से "किसी व्यक्ति" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

40. "किराया" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

41. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से "उस पर बीस प्रतिशत की दर से आय-कर की कटौती करेगा:" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

42. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से खंड () और () के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड () और () इस प्रकार थे :

"() पंद्रह प्रतिशत की दर से, यदि पाने वाला कोर्इ व्यष्टि या कोर्इ अविभक्त हिन्दू कुटुंब है; और

() अन्य मामलों में बीस प्रतिशत की दर से,"

43. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित।

44. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा 13.7.2006 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (i) इस प्रकार था :

"(i) 'किराया' से किसी भूमि या भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन भी है) और फर्नीचर, फिटिंग और उससे जुड़ी भूमि के प्रयोग के लिए किसी पट्टे, उप-पट्टे, किराएदारी या किसी अन्य करार या ठहराव के अधीन कोर्इ संदाय, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अभिप्रेत है, चाहे ऐसा भवन पाने वाले के स्वामित्वाधीन हो या नहीं;"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

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