आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 194ग

ठेकेदारों को संदाय

धारा

धारा संख्या

194ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

ठेकेदारों को संदाय

ठेकेदारों को संदाय

4-15[ठेकेदारों को संदाय

16194ग. (1) ठेकेदार और किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति के बीच किसी संविदा के अनुसरण में, कोर्इ काम (जिसके अधीन किसी काम को करने के लिए श्रम की आपूर्ति भी है) करने के लिए किसी निवासी को, (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् ठेकेदार 17 कहा गया है) किसी राशि का संदाय करने के लिए उत्तरदायी कोर्इ व्यक्ति, ऐसी राशि को ठेकेदार के खाते में जमा करने के समय या नकद में या चेक या ड्राफ्ट जारी करने या किसी अन्य रीति से उसका संदाय करने के समय, इनमें से जो भी पहले हो, ऐसी राशि के,-

(i) जहां संदाय या प्रत्यय किसी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब को किया जा रहा है, एक प्रतिशत;

(ii) जहां किसी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब से भिन्न किसी व्यक्ति को संदाय या प्रत्यय किया जा रहा है, वहां दो प्रतिशत,

के बराबर रकम की उसमें समाविष्ट आय पर आय-कर के रूप में कटौती करेगा।

(2) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ राशि ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे उसका नाम "उचंत खाता" या कोर्इ अन्य खाता हो, जमा की जाती है, वहां ऐसे जमा किए जाने को पाने वाले के खाते में ऐसी आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(3) जहां किसी राशि को स्पष्टीकरण के खंड (iv) के उपखंड (ड़) में वर्णित किसी काम को करने के लिए संदत्त या जमा किया जाता है वहां कर की स्रोत पर, कटौती-

(i) सामग्री के मूल्य को, यदि ऐसे मूल्य को पृथक् रूप से बीजक में वर्णित किया गया है, छोड़कर बीजक मूल्य पर की जाएगी; या

(ii) यदि सामग्री के मूल्य को पृथक् रूप से बीजक में वर्णित नहीं किया गया है, तो संपूर्ण बीजक मूल्य पर, की जाएगी।

(4) कोर्इ भी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब ठेकेदार के खाते में जमा या संदत्त राशि पर आय-कर की कटौती के लिए दायी नहीं होगा जहां ऐसी राशि ऐसे व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब के किसी सदस्य के व्यक्तिगत प्रयोजनों के लिए अनन्य रूप से जमा या संदत्त की जाती है।

(5) ठेकेदार के खाते में जमा की गर्इ या उसको संदत्त अथवा जमा या संदत्त की जाने वाली किसी संभावित राशि की रकम से कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि ऐसी राशि बीस हजार रुपए से अधिक न हो :

परंतु जहां वित्तीय वर्ष के दौरान जमा या संदत्त की गर्इ या जमा या संदत्त किए जाने वाली संभावित राशियों की कुल रकम पचास हजार रुपए से अधिक हो जाती है वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट ऐसी राशियों का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती करने के लिए दायी होगा।

(6) माल वाहन चलाने, उसे किराए या पट्टे पर देने के कारबार के अनुक्रम के दौरान, ठेकेदार के खाते में पूर्ववर्ष के दौरान जमा या संदत्त की गर्इ या जमा या संदत्त किए जाने वाली ऐसी किसी संभावित राशि से, ऐसी राशि का संदाय या जमा करने वाले व्यक्ति को उसके द्वारा स्थायी लेखा संख्यांक देने पर, कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।

(7) उपधारा (6) में निर्दिष्ट व्यक्ति को किसी राशि का संदाय करने या उसे जमा करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति विहित आय-कर प्राधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को ऐसी विशिष्टियां, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, देगा।

स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) "विनिर्दिष्ट व्यक्ति" से निम्नलिखित अभिप्रेत है, अर्थात् :-

(क) केंद्रीय सरकार या कोर्इ राज्य सरकार; या

(ख) कोर्इ स्थानीय प्राधिकारी; या

(ग) किसी केंद्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोर्इ निगम; या

(घ) कोर्इ कंपनी; या

(ड़) कोर्इ सहकारी सोसाइटी; या

(च) किसी विधि द्वारा या उसके अधीन भारत में गठित ऐसा कोर्इ प्राधिकरण, जो आवास स्थान की आवश्यकता से निपटने और उसे पूरा करने के प्रयोजन के लिए या नगरों, कस्बों और गांवों की योजना बनाने, उनका विकास या उनके सुधार करने के प्रयोजन के लिए या दोनों के लिए, काम में लगा हुआ है; या

(छ) सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन या भारत के किसी भाग में प्रवृत्त उस अधिनियम के तत्समान किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोर्इ सोसाइटी; या

(ज) कोर्इ न्यास; या

(झ) किसी केंद्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित या निगमित कोर्इ विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) की धारा 3 के अधीन विश्वविद्यालय के रूप में घोषित की जाने वाली कोर्इ संस्था; या

(ञ) किसी विदेशी राज्य की कोर्इ सरकार या कोर्इ विदेशी उद्यम या भारत के बाहर स्थापित कोर्इ संगम या निकाय; या

(ट) कोर्इ फर्म; या

(ठ) ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्तियों का संगम या व्यष्टियों का निकाय है, यदि ऐसा व्यक्ति,-

(अ) पूर्ववर्ती किसी उपखंड के अंतर्गत नहीं आता है; और

(आ) उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें ऐसी राशि ठेकेदार के खाते में जमा या संदत्त की जाती है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन लेखाओं की संपरीक्षा करने के लिए दायी है;

(ii) "माल वाहन" का वही अर्थ है जो धारा 44कड़ की उपधारा (7) के स्पष्टीकरण में उसका है;

(iii) "संविदा" के अंतर्गत उपसंविदा भी है;

(iv) "काम" के अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं,-

(क) विज्ञापन;

(ख) प्रसारण और दूर प्रसारण, जिसके अंतर्गत ऐसे प्रसारण या दूर प्रसारण के लिए कार्यक्रमों का निर्माण भी है;

(ग) रेल से भिन्न परिवहन के किसी ढंग द्वारा माल या यात्रियों का वहन;

(घ) खानपान;

(ड़) किसी ग्राहक की अपेक्षा या विनिर्देश के अनुसार ऐसे ग्राहक के क्रय किए गए माल का उपयोग करके किसी उत्पाद का विनिर्माण या प्रदाय,

किंतु इसके अंतर्गत ऐसे ग्राहक से भिन्न किसी व्यक्ति से क्रय किए गए माल का उपयोग करके ग्राहक की अपेक्षा या विनिर्देश के अनुसार किसी उत्पाद का विनिर्माण या प्रदाय करना नहीं आता है।]

 

4-15. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से, वित्त अधिनियम, 1982, द्वारा 1.6.1982 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से, वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.6.1988 से, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से, वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से, वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से, वित्त अधिनियम 2005 द्वारा 1.6.2005 से, वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से और वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2008 से यथा संशोधित धारा 194ग इस प्रकार थी :

"194ग. ठेकेदारों और उप-ठेकेदारों को भुगतान–(1) किसी निवासी को (जिसे इस धारा में इसके आगे ठेकेदार कहा गया है), ठेकेदार और–

() केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार; या

() किसी स्थानीय प्राधिकारी; या

() किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम; या

() किसी कंपनी; या

() किसी सहकारी सोसाइटी; या

() किसी विधि द्वारा या उसके अधीन भारत में गठित किसी प्राधिकरण जो आवास-सुविधा की आवश्यकता से निपटने और उसे पूरा करने के प्रयोजन के लिए या नगरों, कस्बों और ग्रामों की योजना, विकास या सुधार के प्रयोजन के लिए या दोनों के लिए, लगा हुआ है; या

() सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन या उस अधिनियम के समान ऐसी किसी विधि, जो भारत के किसी भाग में प्रवृत है, के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सोसाइटी; या

() किसी न्यास; या

() किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित या निगमित किसी विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) की धारा 3 के अधीन विश्वविद्यालय घोषित की गर्इ किसी संस्था; या

(ञ) किसी फर्म; या

() किसी व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब, या व्यक्ति संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो अथवा नहीं, उनसे भिन्न जो पूर्ववर्ती किसी खंड के अंतर्गत आते हैं, जिसके द्वारा किए गए कारबार या वृत्ति से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त उस वित्तीय वर्ष से, जिसमें ऐसी राशि ठेकेदार के खाते में जमा की जाती है या संदत्त की जाती है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमाओं से अधिक है,

के बीच संविदा के अनुसरण, में कोर्इ काम (जिसके अधीन कोर्इ काम करने के लिए श्रम की आपूर्ति भी है) करने के लिए किसी राशि का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, ऐसी राशि को ठेकेदार के खाते में जमा करने के समय या नकद या चैक या ड्राफ्ट जारी करने या किसी अन्य रीति से संदाय करने के समय, इनमें से जो भी पहले हो, ऐसी राशि के–

(i) विज्ञापन के मामले में, एक प्रतिशत;

(ii) किसी अन्य मामले में दो प्रतिशत,

के बराबर रकम की उस राशि में समाविष्ट आय पर आय-कर के रूप में कटौती करेगा:

परंतु जहां ऐसी राशि ऐसे व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब के किसी सदस्य के वैयाक्तिक प्रयोजनों के लिए अनन्य रूप से जमा या संदत्त की जाती है, वहां कोर्इ व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब ठेकेदार के खाते में जमा या संदत्त राशि पर आय-कर की कटौती करने का दायी नहीं होगा।]

(2) किसी निवासी को (जिसे इस धारा में इसके आगे उप-ठेकेदार कहा गया है) उप-ठेकेदार के साथ संविदा के अनुसार ठेकेदार द्वारा वचनबद्ध किए गए काम को पूर्ण रूप से या भागत: करने के लिए या उस काम को करने के लिए श्रमिक की आपूर्ति करने के लिए अथवा पूर्ण रूप से या भागत: किसी श्रमिक की आपूर्ति करने के लिए ठेकेदार ने वचनबद्ध किया है, कोर्इ राशि देने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति (जो ठेकेदार है और व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब नहीं है) उप-ठेकेदार के खाते में ऐसी राशि जमा करने के समय या नकद या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से उसका भुगतान करने के समय, इनमें से जो पहले हो, उस राशि के एक प्रतिशत के बराबर रकम उस राशि में सम्मिलित आय के संबंध में आय-कर के रूप में काटेगा :

परंतु ऐसा कोर्इ व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब, जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या वृत्ति से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें ऐसी रकम उप-ठेकेदार के खाते में जमा या संदत्त की जाती है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमाओं से अधिक हो जाता है, इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती के लिए दायी होगा।

स्पष्टीकरण I.–उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए "ठेकेदार" पद के अंतर्गत कोर्इ ऐसा ठेकेदार भी आता है जो ठेकेदार और किसी विदेशी राज्य की सरकार या किसी विदेशी उद्यम या भारत के बाहर स्थापित किसी संघ या निकाय के बीच किसी संविदा के अनुसार कोर्इ काम (जिसके अंतर्गत किसी काम को करने के लिए श्रमिक की आपूर्ति भी है) कर रहा है।

स्पष्टीकरण II.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए जहां उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोर्इ राशि ऐसी आय का भुगतान करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में, किसी खाते में, चाहे वह "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है, तो ऐसी राशि को जमा किया जाना पाने वाले के खाते में ऐसी आय के रूप में जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

स्पष्टीकरण III.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "काम" पद के अंतर्गत–

() विज्ञापन;

() प्रसारण और टेलीविजन प्रसारण, जिसके अंतर्गत ऐसे प्रसारण या टेलीविजन प्रसारण के लिए कार्यक्रमों का बनाना है;

() रेल से भिन्न परिवहन के किसी ढंग द्वारा माल और यात्रियों का वहन;

() खानपान,

भी हैं।

(शेष पृष्ठ 1.883 पर)

(पृष्ठ 1.882 से आगे)

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन–

(i) ऐसी किसी धनराशि से, ठेकेदार या उप-ठेकेदार के खाते में जमा की गर्इ या उसको संदत्त की गर्इ है या उसके खाते में जिसके जमा किए जाने या उसको संदत्त किए जाने की संभावना है, यदि ऐसी राशि बीस हजार रुपए से अधिक नहीं होती है :

परंतु जहां ऐसी राशि का योग, जो वित्तीय वर्ष के दौरान जमा या संदत्त की गर्इ है या जिसके जमा किए जाने या संदत्त किए जाने की संभावना है, पचास हजार रुपए से अधिक होता है तो, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट ऐसी राशियों का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती करने के लिए दायी होगा:

परन्तु यह और कि उपधारा (2) के अधीन माल वाहनों के चलाने, किराए पर देने या पट्टे पर देने के कारबार के दौरान उप-ठेकेदार के खाते में पूर्ववर्ष के दौरान जमा की गर्इ या संदत्त की गर्इ राशि से, अथवा उस राशि से जिसके जमा किए जाने या संदत्त किए जाने की संभावना है, संबद्ध व्यक्ति को, जो ऐसी रकम का संदत्त कर रहा है या जमा कर रहा है, विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, कोर्इ घोषणा प्रस्तुत करने पर, कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि ऐसा उप-ठेकेदार ऐसा कोर्इ व्यष्टि है, जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी भी समय दो से अधिक माल वाहनों का स्वामी नहीं था:

परन्तु यह भी कि वह व्यक्ति, जो दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट उप-ठेकेदार को यथापूर्वोक्त किसी राशि का संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, विहित आय-कर प्राधिकारी को या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, प्रस्तुत करेगा; या

(ii) 1972 के जून के प्रथम दिन के पहले खाते में जमा की गर्इ या संदाय की गर्इ किसी राशि से; या

(iii) किसी ठेकेदार और किसी सहकारी सोसाइटी के बीच हुर्इ संविदा के अनुसार या ऐसे ठेकेदार और किसी उप-ठेकेदार के बीच सहकारी सोसाइटी के लिए उस ठेकेदार द्वारा हाथ में लिए गए काम के संबंध में (जिसके अंतर्गत किसी काम को करने के लिए श्रम की आपूर्ति भी है) संविदा के अनुसार 1 जून, 1973 के प्रथम दिन के पहले खाते में जमा की गर्इ या संदाय की गर्इ राशि से,

कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–खंड (i) के प्रयोजनों के लिए, "माल वाहन" का वही अर्थ है जो उसका 44कड़ की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण में है।

(4) [***]

(5) [***]

16. परिपत्र सं. 433, तारीख 25.9.1985, परिपत्र सं. 487, तारीख 8.6.1987, परिपत्र सं. 502, तारीख 27.1.1988, परिपत्र सं. 558, तारीख 28.3.1990, परिपत्र सं. 681, तारीख 8.3.1994, परिपत्र सं. 713, तारीख 2.8.1995, परिपत्र सं. 714, तारीख 3.8.1995, परिपत्र सं. 715, तारीख 8.8.1995, परिपत्र सं. 723, तारीख 19.9.1995 और परिपत्र सं. 13/2006, तारीख 13.12.2006 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

17. "ठेकेदार" और "कोर्इ काम करने के लिए" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3।”

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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