ठेकेदारों और उप ठेकेदारों को भुगतान
85[ठेकेदारों और उप-ठेकेदारों को भुगतान
86194ग. 87(1) किसी निवासी को (जिसे इस धारा में इसके आगे "ठेकेदार" कहा गया है) ठेकेदार और--
(क) केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार; या
(ख) किसी स्थानीय प्राधिकारी; या
(ग) केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम; या
(घ) किसी कंपनी; 88[या]
88[(ड़) किसी सहकारी 89[सोसाइटी; या]]
90[(च) किसी विधि के द्वारा या उसके अधीन भारत में गठित किसी प्राधिकरण, जो आवास सुविधा की आवश्यकता से निपटने या उसे पूरा करने के प्रयोजनार्थ या नगरों, कस्बों और ग्रामों की योजना, विकास या सुधार के प्रयोजनार्थ या दोनों के प्रयोजनार्थ लगा हुआ हो;
(छ) सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन या उस अधिनियम के समान ऐसी किसी विधि, जो भारत के किसी भाग में प्रवृत्त हो, के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सोसाइटी; या
(ज) किसी न्यास; या
(झ) किसी केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन स्थापित या निगमित किसी विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) की धारा 3 के अधीन विश्वविद्यालय घोषित की गर्इ किसी संस्था; 91[या]
91[(ञ) किसी फर्म,]
के बीच संविदा के अनुसार कोर्इ काम (जिसके अधीन कोर्इ काम करने के लिए92 श्रम की आपूर्ति भी है) को करने के लिए किसी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति ऐसी राशि को ठेकेदार के खाते में जमा करने के समय या नकद या चैक या ड्राफ्ट जारी करने या किसी अन्य रीति से भुगतान करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, 93[ऐसी राशि के--
(i) विज्ञापन के मामले में, एक प्रतिशत के बराबर,
(ii) किसी अन्य मामले में, दो प्रतिशत के बराबर,
रकम को उस राशि में सम्मिलित आय पर, आय-कर के रूप में कटौती करेगा।]
(2) किसी निवासी को (जिसे इस धारा में इसके आगे उप-ठेकेदार कहा गया है) उप-ठेकेदार के साथ संविदा के अनुसार ठेकेदार द्वारा वचनबद्ध किए गए काम को पूर्ण रूप से या भागत: करने के लिए या उस काम को करने के लिए श्रमिक की आपूर्ति करने के लिए अथवा पूर्ण रूप से या भागत: किसी श्रमिक की आपूर्ति करने के लिए ठेकेदार ने वचनबद्ध किया है, कोर्इ राशि देने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति (जो ठेकेदार है और व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब नहीं है) उप-ठेकेदार के खाते में ऐसी राशि जमा करने के समय या नकद या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से उसका भुगतान करने के समय, इनमें से जो पहले हो, उस राशि के एक प्रतिशत के बराबर रकम उस राशि में सम्मिलित आय के संबंध में आय-कर के रूप में काटेगा।
94[स्पष्टीकरण 1.–उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए "ठेकेदार" पद के अंतर्गत कोर्इ ऐसा ठेकेदार भी आता है जो ठेकेदार और किसी विदेशी राज्य की सरकार या किसी विदेशी उद्यम या भारत के बाहर स्थापित किसी संघ या निकाय के बीच किसी संविदा के अनुसार कोर्इ काम (जिसके अंतर्गत किसी काम को करने के लिए श्रमिक की आपूर्ति भी है) कर रहा है।]
95[96[स्पष्टीकरण 2].–इस धारा के प्रयोजनों के लिए जहाँ उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोर्इ राशि ऐसी आय का भुगतान करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में, किसी खाते में, चाहे वह "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है, तो ऐसी राशि को जमा किया जाना पाने वाले के खाते में ऐसी आय के रूप में जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]
97[स्पष्टीकरण 3.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "काम" पद के अंतर्गत--
(क) विज्ञापन;
(ख) प्रसारण और टेलीविजन प्रसारण, जिसके अंतर्गत ऐसे प्रसारण या टेलीविजन प्रसारण के लिए कार्यक्रमों का बनाना है;
(ग) रेल से भिन्न परिवहन के किसी ढंग द्वारा माल और यात्रियों का वहन;
(घ) खानपान,
भी हैं।]
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन--
(i) ऐसी किसी संविदा के अनुसार, जिसके लिए प्रतिफल 98[बीस] हजार रुपए से अधिक नहीं है, खाते में जमा की गर्इ या संदाय की गर्इ किसी राशि से; या
(ii) 1972 के जून के प्रथम दिन के पहले खाते में जमा की गर्इ या संदाय की गर्इ किसी राशि से; 99[या]
99[(iii) किसी ठेकेदार और किसी सहकारी सोसाइटी के बीच हुर्इ संविदा के अनुसार या ऐसे ठेकेदार और किसी उप-ठेकेदार के बीच सहकारी सोसाइटी के लिए उस ठेकेदार द्वारा हाथ में लिए गए काम के संबंध में (जिसके अंतर्गत किसी काम को करने के लिए श्रम की आपूर्ति भी है) संविदा के अनुसार 1 जून, 1973 के प्रथम दिन के पहले खाते में जमा की गर्इ या संदाय की गर्इ राशि से,
कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।]
1(4) जहां 2[निर्धारण] अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ठेकेदार या उपठेकेदार की कुल आय इतनी है कि, यथास्थिति, निम्नतर दर पर आय-कर की कटौती करना या आय-कर की कटौती न करना न्यायोचित है वहां 2[निर्धारण] अधिकारी ठेकेदार या उप-ठेकेदार द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर उसे ऐसा प्रमाणपत्र देगा, जो उचित हो।
(5) जहां ऐसा कोर्इ प्रमाणपत्र दिया गया हो, वहां उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, जब तक ऐसा प्रमाणपत्र 2[निर्धारण] अधिकारी द्वारा रद्द न कर दिया जाए, यथास्थिति, ऐसे प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट दरों पर आय-कर की कटौती करेगा या किसी कर की कटौती नहीं करेगा।]
85. वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से अंत:स्थापित।
86. परिपत्र सं. 433, तारीख 25.9.1985, परिपत्र सं. 487, तारीख 8.6.1987, परिपत्र सं. 502, तारीख 27.1.1988, परिपत्र सं. 558, तारीख 28.3.1990, परिपत्र सं. 681, तारीख 8.3.1994, परिपत्र सं. 713, तारीख 2.8.1995, परिपत्र सं. 714, तारीख 3.8.1995, परिपत्र सं. 715, तारीख 8.8.1995, परिपत्र सं. 716, तारीख 9.8.1995, परिपत्र सं. 720, तारीख 30.8.1995 और परिपत्र सं. 723, तारीख 19.9.1995 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
87. नियम 28, 30, 31 और 37 तथा प्ररूप सं. 13ग, 16क और 26ग देखिए।
88. वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से अंत:स्थापित।
89. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से "सोसाइटी" शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित।
90. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से अंत:स्थापित।
91. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित।
92. "कोर्इ काम करने के लिए" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
93. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से "ऐसी राशि के दो प्रतिशत के बराबर रकम की उस राशि में सम्मिलित आय पर आय-कर के रूप में कटौती करेगा।" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
94. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से अंत:स्थापित।
95. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.6.1988 से अंत:स्थापित।
96. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से पुनर्संख्यांकित
97. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित
98. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से "दस" के स्थान पर रखा गया। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.6.1982 से "पांच" के स्थान पर "दस" रखा गया था।
99. वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से अंत:स्थापित।
1. नियम 28(2) और प्ररूप सं. 13ग देखिए।
2. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

