'प्रतिभूतियों पर ब्याज'' से भिन्न ब्याज
'प्रतिभूतियों पर ब्याज' से भिन्न ब्याज
194क. (1) ऐसा कोई व्यक्ति, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब नहीं है और जो प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में आय से भिन्न ब्याज के रूप में कोई आय निवासी को भुगतान करने का जिम्मेदार है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय को जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक काट कर या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य ढंग से, भुगतान करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, लागू दरों के अनुसार उस पर आय-कर की कटौती करेगा:
परंतु ऐसा कोई व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब, जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या वृति से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें ऐसा ब्याज जमा या संदत्त किया जाता है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान 90कक[कारबार की दशा में एक करोड़ रुपए या वृत्ति की दशा में पचास लाख रुपए] से अधिक हो जाता है, इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती के लिए दायी होगा।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां यथापूर्वोक्त ब्याज के रूप में कोई आय ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी किसी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे ''संदेय ब्याज खाते'' या ''उचंत खाते'' के नाम से या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो, जमा की जाती है वहां ऐसी जमा रकम को, पाने वाले के खाते में ऐसी आय की जमा रकम समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
(2) [वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से लोप किया गया।]
(3) उपधारा (1) के उपबंध,–
(i) वहां लागू नहीं होंगे जहां, यथास्थिति, ऐसी आय की रकम या ऐसी आय की रकमों का योग की जो उस वित्तीय वर्ष के दौरान उपधारा (1) में उल्लिखित व्यक्ति द्वारा पाने वाले को या उसके खाते में संदाय करने या जमा की जाने की संभावना है, निम्नलिखित से अधिक नहीं होता है–
(क) 91चक[चालीस] हजार रुपए, जहां संदायकर्ता ऐसी बैंककारी कंपनी है जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (इसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है);
(ख) 91चक[चालीस] हजार रुपए, जहां संदायकर्ता ऐसी कोई सहकारी सोसाइटी है जो बैंककारी कारबार करने में लगी हुई है;
(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई और उसके द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किसी स्कीम के अधीन डाकघर में किए गए किसी निक्षेप पर 91चक[चालीस] हजार रुपए; और
(घ) किसी अन्य दशा में पांच हजार रुपए:
परन्तु –
(क) किसी बैंककारी कंपनी में, जिसे बैंककारी (विनियमन) अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लिखित कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है) सावधिक निक्षेपों के संबंध में; या
(ख) बैंककारी के कारबार में लगी किसी सहकारी सोसाइटी में सावधिक निक्षेपों के संबंध में; या
(ग) किसी पब्लिक कंपनी में, जो आवासिक प्रयोजनों के लिए भारत में गृहों के संनिर्माण या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने का कारबार करने के मुख्य उद्देश्य से भारत में बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत की गई है और जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के अधीन कटौती के लिए पात्र है, निक्षेपों के संबंध में,
जमा की गई या संदत्त पूर्वोक्त रकम की संगणना, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या पब्लिक कंपनी की शाखा द्वारा खाते में जमा की गई या संदत्त आय के प्रति निर्देश से की जाएगी:
परन्तु यह और कि पहले परन्तुक में निर्दिष्ट रकम की संगणना, उस स्थिति में, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या पब्लिक कंपनी द्वारा जमा की गई या संदत्त की गई आय के प्रति निर्देश से की जाएगी, जहां ऐसी बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या पब्लिक कंपनी ने आंतरिक बैंककारी समाधानों को अंगीकार किया है:
92[परंतु यह भी कि किसी पाने वाले के मामले में, जो वरिष्ठ नागरिक है, उपखंड (क), उपखंड (ख) और उपखंड (ग) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो '' 91चक[चालीस] हजार रुपए'' शब्दों के स्थान पर, ''पचास हजार रुपए'' शब्द रख दिए गए थे। ]
स्पष्टीकरण - 91ख[* * *]
(ii) [* * *]
(iii) ऐसे आय को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित के खाते में जमा या संदत्त की गई है,–
(क) कोई बैंककारी कंपनी, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है या बैंककारी का कारबार करने में लगी हुई (जिसके अंतर्गत सहकारी भूमि बंधक बैंक भी है) कोई सहकारी सोसाइटी; या
(ख) किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या के अंतर्गत स्थापित कोई वित्तीय निगम; या
(ग) जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम; या
(घ) भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट; या
(ड़) बीमा कारबार चलाने वाली, कोई कंपनी या सहकारी सोसाइटी, या
(च) ऐसी अन्य संस्था, संगम या निकाय अथवा संस्थाओं, संगमों या निकायों का वर्ग जिसे केन्द्रीय सरकार लिखित में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से राजपत्र में इस संबंध में अधिसूचित करे;
91ग [परन्तु इस उपखंड के अधीन 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात् कोई अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी।]
(iv) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो किसी फर्म द्वारा फर्म के किसी भागीदार के खाते में जमा या उसे संदत्त की गई हो;
(v) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो किसी सहकारी सोसाइटी द्वारा (किसी सहकारी बैंक से भिन्न) उसके किसी सदस्य के या किसी सहकारी सोसाइटी द्वारा या किसी अन्य सहकारी सोसाइटी के नाम जमा की गई या संदत्त की गई है;
स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''सहकारी बैंक'' का वही अर्थ होगा जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के भाग 5 में है
(vi) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई और उसके द्वारा राजपत्र में इस संबंध में अधिसूचित किसी स्कीम के अंतर्गत निक्षेपों के संबंध में खाते में जमा की गई या संदत्त की गई है;
(vii) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो किसी बैंककारी कंपनी में, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है, (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लिखित बैंक या बैंककारी संस्था है) निक्षेपों के (जो 1 जुलाई, 1995 को या उसके पश्चात् किए गए सावधि निक्षेपों से भिन्न है) संबंध में खाते में जमा की गई है या संदत्त की गई है;
(viiक) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो–
(क) किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या प्राथमिक प्रत्यय सोसाइटी या किसी सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक में निक्षेपों के बारे में खाते में जमा की गई है या संदत्त की गई है;
(ख) उपखंड (क) में उल्लिखित सहकारी सोसाइटी या बैंक से भिन्न बैंककारी के कारबार में लगी सहकारी सोसाइटी (1 जुलाई, 1995 को या उसके पश्चात् किए गए सावधिक निक्षेपों से भिन्न निक्षेप) में निक्षेपों के बारे में खाते में जमा की गई है या संदत्त की गई है;
(viii) उस आय को लागू नहीं होंगे जो इस अधिनियम या भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या संपदा शुल्क अधिनियम, 1953 (1953 का 34) या धन कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) या दान-कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18) या अधिलाभ कर अधिनियम, 1963 (1963 का 14) या कंपनी (लाभ) अतिकर अधिनियम, 1964 (1964 का 7) या ब्याज कर अधिनियम, 1974 (1974 का 45) के किसी उपबंध के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा खाते में जमा की गई हो या संदत्त की गई हो;
(ix) मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा अधिनिण्र्ाीत प्रतिकर की रकम पर ब्याज के रूप में जमा की गई आयु को लागू नहीं होंगे;
(ixक) मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा अधिनिण्र्ाीत प्रतिकर की रकम पर ब्याज के रूप में जमा की गई या संदत्त ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जहां, यथास्थिति, ऐसी आय की रकम या वित्तीय वर्ष के दौरान जमा की गई या संदत्त ऐसी रकमों का योग पचास हजार रुपए से अधिक नहीं है;
(x) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे, जो किसी अवसंरचनात्मक पूंजी कंपनी या अवसंरचनात्मक पूंजी निधि 91गक[या अवसंरचनात्मक ऋण निधि] या पब्लिक सेक्टर कंपनी या अनुसूचित बैंक द्वारा 1 जून, 2005 को या उसके पश्चात् जारी किए गए किसी जीरो कूपन बंधपत्र के संबंध में ऐसी कंपनी या निधि या पब्लिक सेक्टर कंपनी या अनुसूचित बैंक द्वारा संदत्त की गई है या संदेय है।
(xi) किसी ऐसी आय को लागू होंगे, जो धारा 10 के खंड (23चग) में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में हो।
[92क'परंतु खंड (v) या खंड (viiक) में निर्दिष्ट सहकारी सोसाइटी, उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार, आय-कर की कटौती की दायी होगी, यदि,—
(क) उस वित्तीय वर्ष के ठीक पहले के वित्तीय वर्ष के दौरान, जिसमें उपधारा (1) में निर्दिष्ट ब्याज जमा या संदत्त किया जाता है, सहकारी सोसाइटी का कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त पचास करोड़ रुपए से अधिक है; और
(ख) वित्तीय वर्ष के दौरान जमा किया गया या ऐसे ब्याज की कुल संदत्त, जमा या संदाय के लिए संभाव्य ब्याज की रकम पाने वाले के वरिष्ठ नागरिक होने की दशा में पचास हजार रुपए तथा किसी अन्य दशा में चालीस हजार रुपए से अधिक है।;]
स्पष्टीकरण 1–खंड (i), खंड (vii) और खंड (viiक) के प्रयोजनों के लिए "सावधिक निक्षेप" से नियत अवधियों की समाप्ति पर प्रतिसंदेय निक्षेप (जिनके अंतर्गत आवर्ती निक्षेप भी है) अभिप्रेत हैं।
92क[स्पष्टीकरण 2—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ''वरिष्ठ नागरिक'' से भारत में निवासी व्यष्टि अभिप्रेत है, जो सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान किसी भी समय साठ वर्ष या अधिक आयु का है।]
(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति किसी ऐसी आधिक्य राशि या कम राशि का समायोजन करने के लिए, जो वित्तीय वर्ष के दौरान किसी पूर्ववर्ती कटौती से या कटौती न करने से पैदा होती है, इस धारा के अधीन कटौती की जाने वाली रकम को कटौती करते समय घटा या बढ़ा सकेगा।
92क[(5) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह उपबंधित कर सकेगी कि ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को ऐसे संदाय से, जो उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, कर की कटौती नहीं की जाएगी या ऐसी न्यून दर पर की जाएगी।]
स्पष्टीकरण–[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से लोप किया गया।]
91गक. वित अधिनियम 2021 दवारा 1.4.2021 से अंत:स्थापित।
90कक. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से ''धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमाओं'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
91चक. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2019 से "दस" शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित।
91ग. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित
91ख. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से लोप किया गया।लोप से पूर्व स्पष्टीकरण निम्न प्रकार था
"स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''वरिष्ठ नागरिक'' से भारत में निवासी व्यष्टि, जो सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान किसी भी समय साठ वर्ष या अधिक आयु का है, अभिपेरत है"।
92. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।
92क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

