"प्रतिभूतियों पर ब्याज" से भिन्न ब्याज
62["प्रतिभूतियों पर ब्याज" से भिन्न ब्याज
63194क. 64(1) ऐसा कोर्इ व्यक्ति65, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब नहीं है और जो 66[प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में] आय से भिन्न ब्याज के रूप में कोर्इ आय निवासी को भुगतान करने का जिम्मेदार है67, पाने वाले के खाते में ऐसी आय को जमा करते समय67 या उसका नकद रूप में या चैक काट कर या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य ढंग से, भुगतान करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, लागू दरों के अनुसार उस पर आय-कर की कटौती करेगा:
68[परंतु ऐसा कोर्इ व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब, जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या वृति से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें ऐसा ब्याज जमा या संदत्त किया जाता है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमाओं से अधिक हो जाता है, इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती के लिए दायी होगा।]
69[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां यथापूर्वोक्त ब्याज के रूप में कोर्इ आय ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी किसी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे "संदेय ब्याज खाते" या "उचंत खाते" के नाम से या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो, जमा की जाती है वहां ऐसी जमा रकम को, पाने वाले के खाते में ऐसी आय की जमा रकम समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]
(2) 70[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से लोप किया गया।]
(3) उपधारा (1) के उपबंध,–
71[(i) वहां लागू नहीं होंगे जहां, यथास्थिति, ऐसी आय की रकम या ऐसी आय की रकमों का योग की जो उस वित्तीय वर्ष के दौरान उपधारा (1) में उल्लिखित व्यक्ति द्वारा पाने वाले को या उसके खाते में संदाय करने या जमा की जाने की संभावना है, 72[निम्नलिखित से अधिक नहीं होता है–
(क) दस हजार रुपए, जहां संदायकर्ता ऐसी बैंककारी कंपनी है जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (इसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी है);
(ख) दस हजार रुपए, जहां संदायकर्ता ऐसी कोर्इ सहकारी सोसाइटी है जो बैंककारी कारबार करने में लगी हुर्इ है;
(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा बनार्इ गर्इ और उसके द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किसी स्कीम के अधीन डाकघर में किए गए किसी निक्षेप पर दस हजार रुपए; और
(घ) किसी अन्य दशा में पांच हजार रुपए:]
73[परन्तु –
(क) किसी बैंककारी कंपनी में, जिसे बैंककारी (विनियमन) अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लिखित कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी है) सावधिक निक्षेपों के संबंध में; या
(ख) बैंककारी के कारबार में लगी किसी सहकारी सोसाइटी में सावधिक निक्षेपों के संबंध में; या
(ग) किसी पब्लिक कंपनी में, जो आवासिक प्रयोजनों के लिए भारत में गृहों के संनिर्माण या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने का कारबार करने के मुख्य उद्देश्य से भारत में बनार्इ गर्इ और रजिस्ट्रीकृत की गर्इ है 74[और जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के अधीन कटौती के लिए पात्र है] 75[* * *], निक्षेपों के संबंध में,
76[* * *] जमा की गर्इ या संदत्त पूर्वोक्त रकम की संगणना, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या पब्लिक कंपनी की शाखा द्वारा खाते में जमा की गर्इ या संदत्त आय के प्रति निर्देश से की जाएगी;]
(ii) 77[* * *]
(iii) ऐसे आय को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित के खाते में जमा या संदत्त की गर्इ है,–
(क) कोर्इ बैंककारी कंपनी, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है या बैंककारी का कारबार करने में लगी हुर्इ (जिसके अंतर्गत सहकारी भूमि बंधक बैंक भी है) कोर्इ सहकारी सोसाइटी; या
(ख) किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या के अंतर्गत स्थापित कोर्इ वित्तीय निगम; या
(ग) जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम; या
(घ) भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट; या
(ड़) बीमा कारबार चलाने वाली, कोर्इ कंपनी या सहकारी सोसाइटी, या
(च) ऐसी अन्य संस्था, संगम या निकाय 78[अथवा संस्थाओं, संगमों या निकायों का वर्ग] जिसे केन्द्रीय सरकार लिखित में लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से राजपत्र में इस संबंध में अधिसूचित79 करे;
80[(iv) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो किसी फर्म द्वारा फर्म के किसी भागीदार के खाते में जमा या उसे संदत्त की गर्इ हो;]
(v) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो किसी सहकारी सोसाइटी द्वारा 81[उसके किसी सदस्य के या] किसी अन्य सहकारी सोसाइटी के नाम जमा की गर्इ या संदत्त की गर्इ है;]
82[(vi) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनार्इ गर्इ और उसके द्वारा राजपत्र में इस संबंध में अधिसूचित83 किसी स्कीम के अंतर्गत निक्षेपों के संबंध में खाते में जमा की गर्इ या संदत्त की गर्इ है;
84[(vii) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो किसी बैंककारी कंपनी में, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है, (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लिखित बैंक या बैंककारी संस्था है) निक्षेपों के (जो 1 जुलार्इ, 1995 को या उसके पश्चात् किए गए सावधि निक्षेपों से भिन्न है) संबंध में खाते में जमा की गर्इ है या संदत्त की गर्इ है;
(viiक) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो–
(क) किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या प्राथमिक प्रत्यय सोसाइटी या किसी सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक में निक्षेपों के बारे में खाते में जमा की गर्इ है या संदत्त की गर्इ है;
(ख) उपखंड (क) में उल्लिखित सहकारी सोसाइटी या बैंक से भिन्न बैंककारी के कारबार में लगी सहकारी सोसाइटी (1 जुलार्इ, 1995 को या उसके पश्चात् किए गए सावधिक निक्षेपों से भिन्न निक्षेप) में निक्षेपों के बारे में खाते में जमा की गर्इ है या संदत्त की गर्इ है;]
85[(viii) उस आय को लागू नहीं होंगे जो इस अधिनियम या भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या संपदा शुल्क अधिनियम, 1953 (1953 का 34) या धन कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) या दान-कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18) या अधिलाभ कर अधिनियम, 1963 (1963 का 14) या कंपनी (लाभ) अतिकर अधिनियम, 1964 (1964 का 7) या ब्याज कर अधिनियम, 1974 (1974 का 45) के किसी उपबंध के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा खाते में जमा की गर्इ हो या संदत्त की गर्इ हो;]
86[(ix) मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा अधिनिण्र्ाीत प्रतिकर की रकम पर ब्याज के रूप में जमा की गर्इ संदत्त ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जहां, यथास्थिति, ऐसी आय की रकम या वित्तीय वर्ष के दौरान जमा की गर्इ या संदत्त ऐसी रकमों का योग पचास हजार रुपए से अधिक नहीं है;]
87[(x) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे, जो किसी अवसंरचनात्मक पूंजी कंपनी या अवसंरचनात्मक पूंजी निधि या पब्लिक सेक्टर कंपनी 87क[या अनुसूचित बैंक] द्वारा 1 जून, 2005 को या उसके पश्चात् जारी किए गए किसी जीरो कूपन बंधपत्र के संबंध में ऐसी कंपनी या निधि या पब्लिक सेक्टर कंपनी 87क[या अनुसूचित बैंक] द्वारा संदत्त की गर्इ है या संदेय है।]
88[स्पष्टीकरण 1.–खंड (i), खंड (vii) और खंड (viiक) के प्रयोजनों के लिए "सावधिक निक्षेप" से नियत अवधियों की समाप्ति पर प्रतिसंदेय निक्षेप (जिनके अंतर्गत आवर्ती निक्षेप नहीं है) अभिप्रेत हैं।
स्पष्टीकरण 2.–89[***]]
90[(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति किसी ऐसी आधिक्य राशि या कम राशि का समायोजन करने के लिए, जो वित्तीय वर्ष के दौरान किसी पूर्ववर्ती कटौती से या कटौती न करने से पैदा होती है, इस धारा के अधीन कटौती की जाने वाली रकम को कटौती करते समय घटा या बढ़ा सकेगा।
स्पष्टीकरण.–[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से लोप किया गया।]
62. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।
63. तारीख 22.12.1980 का परिपत्र सं. 288, तारीख 29.5.1979 का परिपत्र सं. 256, तारीख 7.11.1968 के पत्र सं. [फा.सं. 12/23/68-आर्इ.टी.(बी)] द्वारा यथाउपांतरित, तारीख 28.3.1968/13.5.1968 का परिपत्र सं. 22/68-आर्इ.टी.(बी), तारीख 2.9.1971 का परिपत्र सं. 65, तारीख 23.9.1968 का पत्र सं. [फा.सं. 12/12/68-आर्इ.टी.(ए-II)], तारीख 28.10.1968 का पत्र [फा.सं. 12/113/68-आर्इ.टी.(ए-II)], तारीख 21.9.1994 का पत्र [फा.सं. 275/109/92-आर्इ.टी.(बी)], तारीख 5.12.1988 का परिपत्र सं. 526, तारीख 12.2.1992 का परिपत्र सं. 626, तारीख 23.1.1993 का परिपत्र सं. 643, तारीख 22.3.1993 का परिपत्र सं. 647, तारीख 8.8.1995 का परिपत्र सं. 715 और तारीख 9.8.1995 का परिपत्र सं. 716, तारीख 11.9.2002 का परिपत्र सं. 9/2002, तारीख 28.6.2002 का परिपत्र सं. 3/2002, तारीख 22.11.2002 का परिपत्र सं. 11/2002, तारीख 22.11.2002 का परिपत्र सं. 12/2002, तारीख 11.3.2003 का परिपत्र सं. 2/2003, तारीख 11.3.2003 का परिपत्र सं. 3/2003 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
64. नियम 28(1), 28कक, 28कख, 29ग, 30, 31, 31क, 31कख, 31कग, 31कगक और 37 तथा प्ररूप सं. 13, 15छ, 15ज, 16क, 26कध, 26थ, 26थक और 26धकक देखिए।
65. ''कोर्इ व्यक्ति'' पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
66. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से '''प्रतिभूतियों पर ब्याज'' शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
67. "भुगतान करने का जिम्मेदार है" और ''पाने वाले के खाते में ....... आय को जमा करते समय'' पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
68. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से परन्तुक का लोप किया गया था और लोप किए जाने से पूर्व, परंतुक निम्न प्रकार था :
''परन्तु उस दशा में, ऐसी कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी जिसमें ऐसी आय प्राप्त करने का हकदार व्यक्ति (जो कंपनी या रजिस्ट्रीकृत फर्म नहीं है) भुगतान करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को:–
(क) एक शपथ-पत्र, या
(ख) एक लिखित कथन,
यह घोषणा करते हुए देता है कि उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें आय जमा या संदत्त की जाती है, निकट आगामी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय उसकी प्राक्कलित कुल आय, आय-कर के दायित्वाधीन न्यूनतम से कम होगी।''
69. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से अंत:स्थापित।
70. लोप किए जाने से पूर्व उपधारा (2) वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से यथा संशोधित की गयी थी।
71. वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1975 से प्रतिस्थापित। खंड (i) के प्रतिस्थापन से संबंधित स्वतंत्र उपबंध वित्त अधिनियम, 1975 की धारा 20(2) से किया गया है धारा 20 की उपधारा (2) निम्न प्रकार है :
'(2) आय-कर अधिनियम की धारा 194क की उपधारा (3) के खंड (i) के प्रतिस्थापन के होते हुए भी, उक्त धारा 194क की उपधारा (1) के अंतर्गत 1 अप्रैल, 1975 को या उसके पश्चात् किन्तु 1 जून, 1975 से पूर्व जमा या संदत्त ''प्रतिभूतियों पर ब्याज'' शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य आय से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर, जहां इस प्रकार जमा या संदत्त रकम किसी भी समय चार सौ रुपए से अधिक न हो, आय-कर की कटौती करने में असफल रहने पर या उसके संबंध में उस अधिनियम की धारा 201 या धारा 276ख की कोर्इ बात इस धारा की उपधारा (1) पर लागू नहीं होगी।'
72. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से "पांच हजार रुपए से अधिक नहीं होता है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किए गए शब्दों को वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से तथा वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से संशोधित किया गया था।
73. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से यथाअंत:स्थापित परन्तुक निम्न प्रकार था :
'परन्तु किसी बैंककारी कंपनी में, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लिखित कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था है) सावधिक जमा के संबंध में या बैंककारी के कारबार में लगी किसी सहकारी सोसाइटी में सावधिक जमा के संबंध में जमा या संदत्त आय के संबंध में इस खंड के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो ''दो हजार पांच सौ रुपए'' शब्दों के स्थान पर ''दस हजार रुपए'' शब्द रख दिए गए हों और पूर्वोक्त रकम की संगणना, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी की शाखा द्वारा जमा की गर्इ या संदत्त आय के प्रति निर्देश से की जाएगी;'
74. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।
75. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से ''और जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा तत्समय अनुमोदित है'' शब्दों का लोप किया गया।
76. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से परन्तुक के निम्नलिखित भाग का लोप किया गया :
'इस खंड के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो ''दो हजार पांच सौ रुपए'' शब्दों के स्थान पर ''दस हजार रुपए" शब्द रख दिए गए हों और'
77. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से खंड (ii) का लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, खंड (ii) निम्न प्रकार था :
''(ii) ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो 1967 के अक्तूबर के प्रथम दिन के पूर्व जमा या संदत्त की गर्इ है;''
78. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से अंत:स्थापित।
79. अधिसूचित संस्थाओं की पूरी सूची के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
80. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से पुन: पुर:स्थापित। इससे पूर्व, इसका प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से लोप किया गया था। मूल खंड (iv) वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से अंत:स्थापित किया गया था।
81. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित।
82. वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित।
83. विनिर्दिष्ट प्रमाणपत्रों/जमा स्कीम के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
84. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से खंड (vii) के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (vii) वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से यथा संशोधित किया गया था।
85. वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1975 से अंत:स्थापित।
86. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से अंत:स्थापित।
87. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.6.2005 से अंत:स्थापित।
87क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2009 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
88. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.6.2005 से स्पष्टीकरण के स्थान पर स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम 1995 द्वारा 1.7.1995 से यथा अंत:स्थापित स्पष्टीकरण इस प्रकार था :
'स्पष्टीकरण.–खंड (i), खंड (vii) और खंड (viiक) के प्रयोजनों के लिए "सावधिक निक्षेप" से नियत अवधियों की समाप्ति पर प्रतिसंदेय निक्षेप (जिनके अंतर्गत आवर्ती निक्षेप नहीं है) अभिप्रेत हैं।'
89. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, स्पष्टीकरण 2 इस प्रकार था :
"स्पष्टीकरण 2.–खंड (x) के प्रयोजनों के लिए, "अवसंरचनात्मक पूंजी कंपनी" और "अवसंरचनात्मक पूंजी निधि" के क्रमश: वही अर्थ हैं जो उनके धारा 10 के खंड (23छ) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) और खंड (ख) में हैं।"
90. वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1975 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

