ई-वाणिज्य प्रचालक द्वारा र्इ-वाणिज्य सहभागियों को कतिपय राशियों का संदाय
1ग[र्इ-वाणिज्य प्रचालक द्वारा र्इ-वाणिज्य सहभागियों को कतिपय राशियों का संदाय
194ण. (1) इस अध्याय के भाग ख में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, जहां मालों का विक्रय या किसी र्इ-वाणिज्य सहभागी द्वारा सेवाओं की पूर्ति को किसी र्इ-वाणिज्य प्रचालक द्वारा अपने डिजिटल या इलैक्ट्रानिक सुविधा या प्लेटफार्म (चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो) के द्वारा सुकर बनाया जाता है, तो ऐसा प्रचालक किसी र्इ-वाणिज्य सहभागी के खाते में विक्रय या सेवाओं या दोनों की रकम को जमा करते समय किसी अन्य ढंग से ऐसे र्इ-वाणिज्य सहभागी को उसके संदाय के समय, जो भी पहले हो, ऐसे विक्रय या सेवाओं या दोनों की कुल रकम के एक प्रतिशत की दर पर आय-कर की कटौती करेगा।
स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजन के लिए र्इ-वाणिज्य प्रचालक द्वारा सुकर बनाए गए मालों के विक्रय या सेवाओं की पूर्ति या दोनों के लिए सीधे किसी र्इ-वाणिज्य सहभागी को माल के क्रेता या सेवा के प्राप्तिकर्ता द्वारा किया गया कोर्इ संदाय, र्इ- वाणिज्य प्रचालक द्वारा र्इ-वाणिज्य सहभागी को जमा या संदत्त की गर्इ रकम समझी जाएगी और इस उपधारा के अधीन आय-कर की कटौती के प्रयोजन के लिए ऐसे विक्रय या सेवाओं की कुल रकम में सम्मिलित की जाएगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती ऐसे किसी र्इ-वाणिज्य सहभागी के खाते में, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, पूर्ववर्ष के दौरान जमा या संदत्त की गर्इ अथवा जमा या संदत्त किए जाने के लिए संभाव्य किसी राशि से नहीं की जाएगी, जहां पूर्ववर्ष के दौरान ऐसे विक्रय या सेवाओं या दोनों की कुल रकम पांच लाख रुपए से अधिक नहीं है तथा ऐसे र्इ-वाणिज्य सहभागी ने र्इ-वाणिज्य प्रचालक को स्थायी लेखा संख्यांक या आधार संख्यांक प्रस्तुत कर दिया है।
(3) इस अध्याय के भाग ख में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसा कोर्इ संव्यवहार जिसके संबंध में र्इ-वाणिज्य प्रचालक द्वारा उपधारा (1) के अधीन कर की कटौती कर ली गर्इ है, या जो उपधारा (2) के अधीन कटौती के लिए दायी नहीं है, इस अध्याय के किसी अन्य उपबंध के अधीन स्रोत पर कर की कटौती का दायी नहीं होगा:
परंतु इस उपधारा का उपबंध किसी र्इ-वाणिज्य प्रचालक द्वारा विज्ञापन देने के लिए या ऐसी किन्हीं अन्य सेवाओं की पूर्ति के लिए, जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट माल या सेवाओं के विक्रय से संबंधित नहीं है, प्राप्त या प्राप्य किसी रकम या रकमों के योग को लागू नहीं होगा।
(4) यदि इस धारा के उपबंध को प्रभावी करने में कोर्इ कठिनार्इ उत्पन्न होता है तो, बोर्ड, केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से कठिनार्इ को दूर करने के प्रयोजन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत जारी कर सकेगा।
(5) उपधारा (4) के अधीन बोर्ड द्वारा जारी किया गया प्रत्येक मार्गदर्शक सिद्धांत संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा और वह आय-कर प्राधिकारियों तथा र्इ-वाणिज्य प्रचालक पर बाध्यकारी होगा।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए र्इ-वाणिज्य प्रचालक, र्इ-वाणिज्य सहभागी को संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजन के लिए,—
(क) ''इलैक्ट्रानिक वाणिज्य'' से मालों या सेवाओं अथवा दोनों का प्रदाय अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत डिजिटल या इलैक्ट्रानिक नेटवर्क पर डिजिटल उत्पाद भी हैं;
(ख) ''र्इ-वाणिज्य प्रचालक'' से ऐसा कोर्इ व्यक्ति अभिप्रेत है, जो इलैक्ट्रानिक वाणिज्य के लिए डिजिटल या इलैक्ट्रानिक सुविधा अथवा प्लेटफार्म का स्वामी है, प्रचालन करता है या प्रबंध करता है;
(ग) ''र्इ-वाणिज्य सहभागी'' से भारत में निवासी कोर्इ ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो माल का विक्रय करता है या सेवाओं की पूर्ति करता है अथवा दोनों करता है, और इसके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक वाणिज्य के लिए डिजिटल या इलैक्ट्रानिक सुविधा या प्लेटफार्म के माध्यम से डिजिटल उत्पाद भी हैं;
(घ) ''सेवा'' के अंतर्गत धारा धारा 194ञ के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित 'तकनीकी सेवाओं' के लिए फीस तथा वृत्तिक सेवाओं के लिए फीस है।]
1ग. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.10.2020 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

