लाभांश
लाभांश
55194. 56भारतीय कंपनी का या ऐसी कंपनी का प्रधान अधिकारी, जिसने भारत में लाभांशों की (जिसके अंतर्गत अधिमानी शेयरों पर लाभांश भी है) घोषणा और संदाय के लिए विहित इंतजाम कर लिए हैं, कोर्इ नकद संदाय करने के पूर्व या किसी लाभांश के संबंध में कोर्इ चैक जारी करने या अधिपत्र देने के पूर्व या धारा 2 के खंड (22) के उपखंड (क) या उपखंड (ख) या उपखंड (ग) या उपखंड (घ) या उपखंड (ड़) के अर्थ में किसी लाभांश का कोर्इ वितरण या संदाय शेयर धारक को 57[जो भारत में निवासी है] करने से पूर्व, ऐसे लाभांश की रकम में से प्रवृत्त दरों के अनुसार आय-कर 58[***] की कटौती करेगा :
59[परन्तु किसी शेयरधारक की दशा में, जो व्यष्टि हो, ऐसी कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि–
(क) कंपनी द्वारा लाभांश पाने वाले के खाते में देय चैक द्वारा संदत्त किया जाता है; और
(ख) यथास्थिति, ऐसे लाभांश की रकम या कंपनी द्वारा शेयर धारक को वितरित या संदत्त किए जाने की संभावना है, रकम का योग 60[दो हजार पांच सौ] रुपए से अधिक नहीं है :
परंतु यह और कि इस धारा के उपबंध, निम्नलिखित में जमा या को संदत्त ऐसी आय को लागू नहीं होंगे,–
(क) जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम को, ऐसे किन्हीं शेयरों की बाबत, जिन पर उसका स्वामित्व है या जिसमें उसका पूर्ण फायदाग्राही हित है;
(ख) साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन बनार्इ गर्इ स्कीमों के आधार पर बनाए गए भारतीय साधारण बीमा निगम (जिसे इस परंतुक में इसके पश्चात् निगम कहा गया है) को या चार नर्इ कंपनियों में से किसी को (जिसे इस परंतुक में इसके पश्चात् ऐसी कंपनी कहा गया है) ऐसे किन्हीं शेयरों की बाबत, जिन पर निगम या उस कंपनी का स्वामित्व है या जिनमें ऐसे निगम या ऐसी कंपनी का पूर्ण फायदाग्राही हित है ; या
(ग) किसी अन्य बीमाकर्ता को ऐसे किन्हीं शेयरों की बाबत, जिन पर उसका स्वामित्व है या जिसमें उसका पूर्ण फायदाग्राही हित है :]
61[परन्तु यह भी कि धारा 115ण में निर्दिष्ट किन्हीं लाभाशों की बाबत ऐसी कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।]
55. तारीख 8.1.1965 का परिपत्र सं. पी(xxi-16), तारीख 1.5.1966 का परिपत्र सं. 3पी(xxi-19) तारीख 11.3.2003 का परिपत्र सं. 2/2003 भी देखिए।
56. नियम 27, 28(1), 28कक, 28कख, 29, 29ग, 30, 31, 31क, 31कख, 37 और 37क तथा प्ररूप सं. 13, 15ज, 15छ, 16क, 26, 26कध, 26थ और 27 देखिए।
57. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।
58. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से ‘‘और अधिकर’’ का लोप किया गया।
59. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से पहले और दूसरे परन्तुक के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.10.1977 से यथा अंत:स्थापित। बाद में, वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.6.1984 से, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से, वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.6.1993 से यथासंशोधित पहला परन्तुक और वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से, वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से यथा अंत:स्थापित दूसरा परन्तुक इस प्रकार थे :
‘‘परन्तु किसी ऐसी कंपनी के, जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, ऐसे शेयरधारक की दशा में, जो व्यष्टि है, कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि–
(क) ऐसी कंपनी द्वारा लाभांश पाने वाले के खाते में देय चैक द्वारा संदाय किया जाता है; तथा
(ख) यथास्थिति, ऐसे लाभांश की रकम या कंपनी द्वारा शेयरधारक को किसी वित्तीय वर्ष के दौरान संवितरित या दिए गए या संवितरित या संदाय किए जाने वाले ऐसे लाभांश की रकम का योग दो हजार पांच सौ रुपए से अधिक नहीं है :
परन्तु यह और कि धारा 115ण में उल्लिखित किसी लाभांश के संबंध में कोर्इ ऐसी कटौती नहीं की जाएगी।’’
60. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.8.2002 से भूतलक्षी प्रभाव से “एक हजार” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
61. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2003 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

