लाभांश
लाभांश
40194. 41भारतीय कंपनी का या ऐसी कंपनी का प्रधान अधिकारी, जिसने भारत में लाभांशों की (जिसके अंतर्गत अधिमानी शेयरों पर लाभांश भी है) घोषणा और संदाय के लिए विहित इंतजाम कर लिए हैं, कोर्इ नकद संदाय करने के पूर्व या किसी लाभांश के संबंध में कोर्इ चैक जारी करने या अधिपत्र देने के पूर्व या धारा 2 के खंड (22) के उपखंड (क) या उपखंड (ख) या उपखंड (ग) या उपखंड (घ) के अर्थ में किसी लाभांश का कोर्इ वितरण या संदाय शेयर धारक को 42[जो भारत में निवासी है] करने से पूर्व, ऐसे लाभांश की रकम में से प्रवृत्त दरों के अनुसार आय-कर 43[* * *] की कटौती करेगा :
44[परन्तु किसी ऐसी कंपनी के, जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, शेयरधारक की दशा में, जो व्यष्टि है, 45[* * *] कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी, यदि--
(क) ऐसी कंपनी द्वारा लाभां्रश पाने वाले के खाते में देय चैक द्वारा संदाय किया जाता है; तथा
(ख) यथास्थिति, ऐसे लाभांश की रकम या कंपनी द्वारा शेयरधारक को किसी वित्तीय वर्ष के दौरान संवितरित या दिए गए या संवितरित या संदाय किए जाने वाले ऐसे लाभांश की रकम का योग 46[दो हजार पांच सौ रुपए] से अधिक नहीं है :
47[परन्तु यह और कि धारा 115ण में उल्लिखित किसी लाभांश के संबंध में कोर्इ ऐसी कटौती नहीं की जाएगी।]
40. तारीख 8.1.1965 का परिपत्र सं. पी(XXI-16) और तारीख 1.5.1966 का परिपत्र सं. 3पी (XXI-19) भी देखें। ब्यौरे के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
41. नियम 27, 28(1), 29, 29ग, 30, 30क, 31, 37 और 37क तथा प्ररूप सं. 13, 15, 15ख, 15छ, 16क, 26 और 27 देखिए।
42. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।
43. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से "और अधिकर" का लोप किया गया।
44. वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.6.1984 से प्रतिस्थापित। मूल परंतुक का वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.10.1977 से लोप किया गया था।
45. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से "और भारत में निवासी है" का लोप किया गया।
46. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से "एक हजार रुपए" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
47. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व, वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.10.1977 से और प्रत्यक्ष-कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से यथासंशोधित, दूसरे परंतुक का बाद में वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.6.1993 से लोप किया गया था।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

