आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 193

प्रतिभूतियों पर ब्याज

धारा

धारा संख्या

193

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

प्रतिभूतियों पर ब्याज

प्रतिभूतियों पर ब्याज

प्रतिभूतियों पर ब्याज

193. प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में किसी निवासी को किसी आय का संदाय करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति संदेय ब्याज की रकम पर, प्रवृत्त दरों के अनुसार, आय-कर की कटौती पाने वाले के खाते में ऐसी आय को जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य ढंग से भुगतान करते समय, इनमें से जो पहले हो, करेगा:

परन्तु यह कि किसी कर की कटौती–

(i) 4¼ प्रतिशत वाले राष्ट्रीय रक्षा बंधपत्र, 1972 पर संदेय ब्याज से उस दशा में नहीं की जाएगी जिसमें ऐसे बंधपत्र किसी ऐसे व्यष्टि द्वारा धारित है, जो अनिवासी नहीं है; या

(iक) 4¼ प्रतिशत वाले राष्ट्रीय रक्षा ऋण, 1968 या 4¾ प्रतिशत वाले राष्ट्रीय रक्षा ऋण, 1972 पर किसी व्यष्टि को संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या

(iख) राष्ट्रीय विकास बंधपत्रों पर संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या

(ii) [* * *]

(iiक) सात वष्र्ाीय राष्ट्रीय बचत पत्र (IV निर्गम) पर संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या

(iiख) किसी संस्था या प्राधिकारी या किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी या किसी सहकारी सोसाइटी (जिसके अंतर्गत सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक है) द्वारा जारी किए गए ऐसे डिबेंचरों पर, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में उल्लिखित करे, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी;

(iii) 6½ प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1977 पर या 7 प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1980 पर देय किसी ब्याज से उस दशा में नहीं की जाएगी जिसमें वे बंधपत्र किसी ऐसे व्यष्टि द्वारा धारित है, जो अनिवासी नहीं है, और उनका धारक ब्याज का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के समक्ष लिखित रूप में घोषणा करता है कि उनके द्वारा धारित, यथास्थिति, 6½ प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1977 या 7 प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1980 का (जिनके अंतर्गत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसकी ओर से धारित, यदि कोर्इ हो, ऐसे बंधपत्र भी हैं) कुल अंकित मूल्य दोनों में से किसी भी दशा में, उस कालावधि के दौरान, जिससे ब्याज संबंधित है, किसी भी समय दस हजार रुपए से अधिक नहीं हुआ था;

(iiiक) [* * *]

(iv) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की किसी प्रतिभूति पर संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी:

परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोर्इ बात वित्तीय वर्ष के दौरान 8 प्रतिशत वाले बचत (कराधेय) बंधपत्र, 2003 91[या 7.75% वाले बचत (कराधेय) बांड, 2018] पर संदेय दस हजार रुपए से अधिक के ब्याज के प्रति लागू नहीं होगी;

(v) किसी ऐसी कंपनी द्वारा, जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, जारी किए गए किसी डिबेंचर पर ऐसे किसी व्यष्टि या किसी हिन्दू अविभक्त कुटुंब को, जो भारत में निवासी है, संदेय कोर्इ ब्याज, यदि–

() कंपनी द्वारा एसे व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब को वित्तीय वर्ष के दौरान, ऐसे डिबेंचर पर, यथास्थिति, संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित ऐसे ब्याज की रकम या ऐसे ब्याज की रकमों का योग पांच हजार रुपए से अधिक नहीं है; और

() कंपनी द्वारा ऐसा ब्याज, पाने वाले के खाते में देय चेक द्वारा संदत्त किया जाता है;

(vi) जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम को, ऐसी किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत, जिन पर उसका स्वामित्व है या जिनमें उसका पूर्ण फायदाग्राही हित है, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी ; या

(vii) साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन बनार्इ गर्इ स्कीमों के आधार पर बनाए गए भारतीय साधारण बीमा निगम (जिसे इस खंड में इसके पश्चात् निगम कहा गया है) को या चार नर्इ कंपनियों में से किसी को (जिन्हें इस खंड में इसके पश्चात् ऐसी कंपनी कहा गया है) ऐसी किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत, जिन पर निगम या ऐसी कंपनी का स्वामित्व है या जिनमें ऐसे निगम या ऐसी कंपनी का पूर्ण फायदाग्राही हित है, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या

(viii) किसी अन्य बीमाकर्ता को ऐसी किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत, जिन पर उसका स्वामित्व है या जिसमें उसका पूर्ण फायदाग्राही हित है, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी;

(ix) किसी कंपनी द्वारा जारी किसी प्रतिभूति पर, जहां ऐसी प्रतिभूति डिमैटिरियलाइज रूप में है और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी किसी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में चाहे ''संदेय ब्याज खाते'' या ''उचंत खाते'' के नाम से या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो, जमा की जाती है वहां ऐसी जमा रकम, पाने वाले के खाते में ऐसी आय की जमा रकम समझी जाएगी और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

स्पष्टीकरण 2.–वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से लोप किया गया।

 

91. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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