आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 193

सिक्युरिटियों पर ब्याज

धारा

धारा संख्या

193

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2002

सिक्युरिटियों पर ब्याज

सिक्युरिटियों पर ब्याज

18प्रतिभूतियों पर ब्याज

19193. 20[प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में] किसी आय का संदाय करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति संदेय ब्याज की रकम पर, प्रवृत्त दरों के अनुसार, आय-कर 21[* * *] की कटौती 22[पाने वाले के खाते में ऐसी आय को जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य ढंग से भुगतान करते समय, इनमें से जो पहले हो], करेगा]।

23[* * *]

24[परन्तु यह 25[* * *] कि किसी कर की कटौती–

(i) 4¼ प्रतिशत वाले राष्ट्रीय रक्षा बंधपत्र, 1972 पर संदेय ब्याज से उस दशा में नहीं की जाएगी जिसमें ऐसे बंधपत्र किसी ऐसे व्यष्टि द्वारा धारित है, जो अनिवासी नहीं है; या

26[(iक) 4¼ प्रतिशत वाले राष्ट्रीय रक्षा ऋण, 1968 या 4¾ प्रतिशत वाले राष्ट्रीय रक्षा ऋण, 1972 पर किसी व्यष्टि को संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या]

27[(iख) राष्ट्रीय विकास बंधपत्रों पर संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या]

(ii) 28[* * *]

29[(iiक) सात वष्र्ाीय राष्ट्रीय बचत पत्र (IV निर्गम) पर संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या]

30[(iiख) किसी संस्था या प्राधिकारी या किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी या किसी सहकारी सोसाइटी (जिसके अंतर्गत सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक है) द्वारा जारी किए गए ऐसे डिबेंचरों पर, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना31 द्वारा इस संबंध में उल्लिखित करे, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी;]

32[* * *]]

(iii) 6½ प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1977 पर या 7 प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1980 पर देय किसी ब्याज से उस दशा में नहीं की जाएगी जिसमें वे बंधपत्र किसी ऐसे व्यष्टि द्वारा धारित है, जो अनिवासी नहीं है, और उनका धारक ब्याज का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के समक्ष लिखित रूप में घोषणा करता है कि उनके द्वारा धारित, यथास्थिति, 6½ प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1977 या 7 प्रतिशत वाले स्वर्ण बंधपत्र, 1980 का (जिनके अंतर्गत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसकी ओर से धारित, यदि कोर्इ हो, ऐसे बंधपत्र भी हैं) कुल अंकित मूल्य दोनों में से किसी भी दशा में, उस कालावधि के दौरान, जिससे ब्याज संबंधित है, किसी भी समय दस हजार रुपए से अधिक नहीं हुआ था;

(iiiक) 33[* * *]

34[(iv) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की किसी प्रतिभूति पर संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी;]

35[(v) किसी ऐसे कंपनी द्वारा जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, जारी किए गए डिबेंचरों पर, भारत में निवासी किसी व्यष्टि को संदेय ब्याज से नहीं की जाएगी, जो ऐसे डिबेंचर हैं, जो भारत में मान्यता प्राप्त किसी स्टाक एक्सचेंज में प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) और उसके अंतर्गत बनाए गए किन्हीं नियमों के अनुसार, सूचीबद्ध हैं, यदि–

() कंपनी द्वारा ब्याज, पाने वाले के खाते में चैक द्वारा संदत्त किया जाता है; और

() यथास्थिति, ऐसे ब्याज की रकम या कंपनी द्वारा ऐसे व्यष्टि को किसी वित्तीय वर्ष के दौरान, संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए ऐसे संभावित ब्याज की रकम का योग 36[दो हजार पांच सौ रुपए] से अधिक नहीं है]।

36क[(vi) जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम को, ऐसी किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत, जिन पर उसका स्वामित्व है या जिनमें उसका पूर्ण फायदाग्राही हित है, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी ; या

(vii) साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन बनार्इ गर्इ स्कीमों के आधार पर बनाए गए भारतीय साधारण बीमा निगम (जिसे इस खंड में इसके पश्चात् निगम कहा गया है) को या चार नर्इ कंपनियों में से किसी को (जिन्हें इस खंड में इसके पश्चात् ऐसी कंपनी कहा गया है) ऐसी किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत, जिन पर निगम या ऐसी कंपनी का स्वामित्व है या जिनमें ऐसे निगम या ऐसी कंपनी का पूर्ण फायदाग्राही हित है, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी ; या

(viii) किसी अन्य बीमाकर्ता को ऐसी किन्हीं प्रतिभूतियों की बाबत, जिन पर उसका स्वामित्व है या जिसमें उसका पूर्ण फायदाग्राही हित है, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी।]

37[स्पष्टीकरण.–38[* * *] इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी किसी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में चाहे "संदेय ब्याज खाते" या "उचंत खाते" के नाम से या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो, जमा की जाती है वहां ऐसी जमा रकम, पाने वाले के खाते में ऐसी आय की जमा रकम समझी जाएगी और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]

स्पष्टीकरण 2.–39[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से लोप किया गया।]

 

18. नियम 28(1), 28कक, 29ग, 30, 31, 37 और 37क तथा फार्म सं. 13, 15कक, 15ज, 16क, 25 और 27 देखिए।

19. तारीख 6.2.1969 का परिपत्र सं. 2, तारीख 16.5.1966 का परिपत्र सं. 2पी(XXXIV-4), तारीख 30.1.1996 का परिपत्र सं. 735, तारीख 18.4.1996 का परिपत्र सं. 741, तारीख 19.7.1996 का परिपत्र सं. 745 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

20. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से "'प्रतिभूतियों पर ब्याज" शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

21. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से "और अधिकर" का लोप किया गया।

22. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1989 से "भुगतान करते समय" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

23. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से यथा अंत:स्थापित, पहला परंतुक निम्न प्रकार था:

"परन्तु जहां अनुसूचित बैंक की दशा में, केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि बैंक की कुल आय निम्नतर दर पर आय-कर की कटौती को न्यायोचित ठहराती है वहां वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसी दर उल्लिखित करे, जिस दर पर इस धारा के अंतर्गत ऐसे बैंक की दशा में आय-कर की कटौती की जाएगी और ऐसी अधिसूचना का ऐसे तीन निर्धारण वर्षों से, जो अधिसूचना में विहित किए जाएं, अनधिक ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए, कोर्इ प्रभाव नहीं होगा:"

24. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1965 द्वारा 11.9.1965 से प्रतिस्थापित। मूल परंतुक, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1962 द्वारा 13.12.1962 से अंत:स्थापित किया गया था।

25. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से "और" शब्द का लोप किया गया। इससे पूर्व, "और" शब्द वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित किया गया था।

26. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1965 द्वारा 4.12.1965 से अंत:स्थापित।

27. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।

28. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, खंड (ii) निम्न प्रकार था :

"(ii) राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (पहला निर्गम) पर संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या"

29. वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित।

30. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.6.1986 से निम्नलिखित खंड (iiख) के स्थान पर प्रतिस्थापित, खंड (iiख) जिसे वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित किया गया था, निम्नलिखित रूप में था :

"(iiख) किसी सहकारी सोसाइटी (जिसमें अंतर्गत सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक भी है) या किसी अन्य संस्था या प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए ऐसे डिबेंचर पर जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस संबंध में उल्लिखित करे, संदेय किसी ब्याज से नहीं की जाएगी; या"

31. विनिर्दिष्ट डिबेंचरों/बंधपत्रों के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

32. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से स्पष्टीकरण का लोप किया गया। लोप किया गया स्पष्टीकरण, जिसे वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1986 से, खंड (iiख) को प्रतिस्थापित करते समय, अंत:स्थापित किया गया था, निम्न प्रकार था :

'स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "पब्लिक सेक्टर कंपनी" से केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत स्थापित कोर्इ निगम या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित सरकारी कंपनी अभिप्रेत है; या'

33. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.6.1982 से यथा अंत:स्थापित खंड (iiiक) निम्न प्रकार था :

"(iiiक) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की ऐसी प्रतिभूतियों पर ऐसे व्यक्तियों के वर्ग को संदेय ब्याज से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, नहीं की जाएगी जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में उल्लिखित करे;"

34. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.6.1997 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से यथा अंत:स्थापित खंड (iv) निम्न प्रकार था :

"(iv) केन्द्रीय या राज्य सरकार की किसी अन्य प्रतिभूति पर संदेय किसी ब्याज से उस दशा में नहीं की जाएगी जिसमें प्रतिभूति किसी ऐसे व्यष्टि द्वारा धारित है जो अनिवासी नहीं है और उसका धारक ब्याज का संदाय करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के समक्ष लिखित रूप में घोषणा करता है कि–

() वह इससे पूर्व इस अधिनियम के अंतर्गत या भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) के अधीन निर्धारित नहीं किया गया है;

() उसकी पूर्ववर्ष की कुल आय, जिस पर ब्याज संदेय है, कर से प्रभार्य न होने वाली अधिकतम रकम से अधिक होनी संभाव्य नहीं है; और

() उसके द्वारा धारित प्रतिभूतियों का (जिसके अंतर्गत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसकी ओर से धारित, यदि कोर्इ हो, ऐसी प्रतिभूतियां भी हैं) कुल अंकित मूल्य, उक्त पूर्ववर्ष के दौरान किसी भी समय ढार्इ हजार रुपए से अधिक नहीं था।"

35. वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.6.1984 से अंत:स्थापित।

36. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1989 से "एक हजार रुपए" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

36क. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से खंड (vi), (vii) और (viii) अंत:स्थापित।

37. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.6.1959 से अंत:स्थापित। मूल स्पष्टीकरण का, जिसे वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित किया गया था, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से लोप किया गया था।

38. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से "1" अंक का लोप किया गया। इससे पूर्व, स्पष्टीकरण को वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से स्पष्टीकरण 1 के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया था।

39. लोप किए जाने से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से यथा अंत:स्थापित, स्पष्टीकरण 2 निम्न प्रकार था :

"स्पष्टीकरण 2.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "अनुसूचित बैंक" पद का वही अर्थ है, जो उसका धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में है।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

© कॉपीराइट. टैक्समैन पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड

फ़ुटनोट