विघटित फर्म या बंद किया गया कारबार
विघटित फर्म या बंद किया गया कारबार
189. (1) जहां किसी फर्म के द्वारा चलाए गए किसी कारबार या वृत्ति को बंद कर दिया गया है या जहां फर्म विघटित कर दी जाती है, वहां निर्धारण अधिकारी फर्म की कुल आय का निर्धारण ऐसे करेगा मानो ऐसे कोई बंद किया जाना या विघटन हुआ ही नहीं था और इस अधिनियम के सब उपबंध, जिनके अंतर्गत इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन प्रभार्य शास्ति या किसी अन्य राशि के उद्ग्रहण संबंधी उपबंध भी हैं, ऐसे निर्धारण को यावत्शक्य लागू होंगे।
(2) पूर्वगामी उपधारा की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि यदि किसी ऐसी फर्म के संबंध में जो उस उपधारा में उल्लिखित की गई है, इस अधिनियम के अंतर्गत किसी कार्यवाही के अनुक्रम में निर्धारण अधिकारी या 1[संयुक्त आयुक्त (अपील) या आयुक्त (अपील)] का समाधान हो जाता है कि फर्म अध्याय 21 में उल्लिखित कार्यों में से किसी की दोषी थी तो वह उस अध्याय के उपबंधों के अनुसार शास्ति अधिरोपित कर सकेगा या अधिरोपित करने का निदेश दे सकेगा।
(3) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो ऐसे बंद किए जाने के समय या विघटन के समय फर्म का भागीदार था, और ऐसे किसी व्यक्ति का जिसकी मृत्यु हो चुकी है, विधिक प्रतिनिधि कर की रकम, शास्ति या अन्य संदेय राशि के लिए संयुक्त रूप से और पृथक् रूप से देनदार होगा और इस अधिनियम के सब उपबंध किसी ऐसे निर्धारण या शास्ति या अन्य राशि के अधिरोपण को यावत्शक्य लागू होंगे।
स्पष्टीकरण.–[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]
(4) जहां ऐसे बंद किया जाना या विघटन किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में किसी कार्यवाही के प्रारंभ हो जाने के पश्चात् होता है वहां उपधारा (3) में उल्लिखित व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही उस प्रक्रम से जारी रखी जा सकेगी जिस पर ऐसे बंद होने या विघटन के समय वह कार्यवाही थी और इस अधिनियम के सब उपबंध जहां तक हो सके तदनुसार लागू होंगे।
(5) इस धारा की कोई बात धारा 159 की उपधारा (6) के उपबंधों पर प्रभाव नहीं डालेगी।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

