आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 180

साहित्यिक या कलात्मक कृति के लिए स्वामिस्व या प्रतिलिप्याधिकार फीसें

धारा

धारा संख्या

180

अध्याय शीर्षक

अध्याय XV - विशेष मामले में देयता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

साहित्यिक या कलात्मक कृति के लिए स्वामिस्व या प्रतिलिप्याधिकार फीसें

साहित्यिक या कलात्मक कृति के लिए स्वामिस्व या प्रतिलिप्याधिकार फीसें

ढ–कुछ प्रकार की आय के लिए विशेष उपबंध

साहित्यिक या कलात्मक कृति के लिए स्वामिस्व या प्रतिलिप्याधिकार फीसें

180. जहां किसी साहित्यिक या कलात्मक कृति के रचयिता द्वारा उसके सृजन में लगाया गया समय बारह मास से अधिक है वहां उस कृति के प्रतिलिप्याधिकार में उसके हितों में से किसी के या उस कृति के संबंध में स्वामिस्वों या प्रतिलिप्याधिकार फीसों के समनुदेशन या अनुदान के लिए किसी एकमुश्त प्रतिफल के संबंध में किसी पूर्ववर्ष के दौरान उसके द्वारा प्राप्त या प्राप्य रकम का (चाहे एकमुश्त प्राप्य हो या अन्यथा) आबंटन, यदि वह ऐसा दावा करता है तो निर्धारण के प्रयोजनों के लिए ऐसी रीति में और ऐसी अवधि के लिए किया जाएगा, जैसी विहित की जाए :

परन्तु इस धारा की कोर्इ बात 1 अप्रैल, 2000 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के संबंध में लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''रचयिता'' पद के अंतर्गत संयुक्त ''रचयिता'' भी है, और स्वामिस्वों या प्रतिलिप्याधिकार फीसों के संबंध में ''एकमुश्त राशि'' पद के अंतर्गत स्वामिस्वों या प्रतिलिप्याधिकार फीसों के संबंध में ऐसा अग्रिम संदाय भी है जो वापसी योग्य नहीं है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

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