समापनाधीन कंपनी
समापनाधीन कंपनी
178. (1) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति–
(क) जो किसी ऐसी कंपनी का समापक है जिसका न्यायालय के आदेशों के अंतर्गत या अन्यथा परिसमापन किया जा रहा है, या
(ख) जो किसी कंपनी की किन्हीं आस्तियों का रिसीवर नियुक्त किया गया है,
(जिसे इसमें इसके पश्चात् समापक कहा गया है) ऐसा समापक होने के तीस दिन के अंदर ऐसे 69[निर्धारण] अधिकारी को, जो कंपनी की आय का निर्धारण करने का हकदार है, इस रूप में अपनी नियुक्ति की सूचना देगा।
(2) 69[निर्धारण] अधिकारी ऐसी जांच करने या ऐसी जानकारी मांगने के पश्चात्, जैसी वह ठीक समझे, उस तारीख से, जिसको वह समापक की नियुक्ति की सूचना प्राप्त करता है, तीन मास के भीतर समापक को वह रकम अधिसूचित करेगा जो 69[निर्धारण] अधिकारी की राय में ऐसे किसी कर के लिए उपबंध करने के लिए पर्याप्त होगी, जो कंपनी द्वारा उस समय संदेय है या जिसका बाद में संदेय होने की संभावना है।
72[(3) समापक,–
(क) कंपनियों की आस्तियों या अपने पास की संपत्तियों में से किसी को 73[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] की मंजूरी के बिना तब तक अलग नहीं करेगा जब तक कि उपधारा (2) के अंतर्गत 73क[निर्धारण] अधिकारी द्वारा उसे अधिसूचित न कर दिया गया हो; और
(ख) ऐसे अधिसूचित किए जाने पर, अधिसूचित रकम के बराबर रकम अलग रख देगा और कंपनी की आस्तियों या अपने पास की संपत्तियों में से किसी को तब तक अलग नहीं करेगा जब तक कि वह ऐसी रकम को इस प्रकार अलग नहीं रख देता :
परन्तु इस उपधारा में उल्लिखित कोर्इ बात कंपनी द्वारा संदेय कर के संदाय के प्रयोजन के लिए या ऐसे प्रतिभूत लेनदारों को, जिनके ऋण समापन की तारीख को सरकार को देय ऋणों से संदाय की पूर्विकता के लिए विधि के अंतर्गत हकदार है, कोर्इ संदाय करने के लिए या कंपनी के परिसमापन के ऐसे खर्चों और व्ययों को, जो 73[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] की राय में युक्तियुक्त हैं, पूरा करने के लिए ऐसी आस्तियों या संपत्तियों को अलग करने से समापक को विवर्जित नहीं करेगी।
(4) यदि समापक उपधारा (1) के अनुसार, सूचना देने में असफल रहता है, या उपधारा (3) में यथा अपेक्षित रकम अलग रखने में असफल रहता है या कंपनी की आस्तियों या अपने पास की संपत्तियों में से किसी को उस उपधारा के उपबंधों के उल्लंघन में अलग करता है तो वह उस कर के संदाय के लिए व्यक्तिगत रूप से दायी होगा जिसके संदाय के लिए कंपनी दायी हो :
परन्तु यदि कंपनी द्वारा संदेय किसी कर की रकम उपधारा (2) के अंतर्गत अधिसूचित की गर्इ है तो इस उपधारा के अधीन समापक का व्यक्तिगत दायित्व ऐसी रकम तक ही होगा।]
(5) जहां एक से अधिक समापक हैं वहां इस धारा के अधीन समापक से जुड़ी हुर्इ बाध्यताएं और दायित्व संयुक्त रूप से और पृथक् रूप से सभी समापकों से जुड़ी होंगी।
(6) इस धारा के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, प्रभावी होंगे।
69. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
70. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त (अपील) या" शब्दों का लोप किया गया। इससे पूर्व "उपायुक्त (अपील)" प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "सहायक आयुक्त (अपील)" के स्थान पर प्रतिस्थापित किये गये थे।
71. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
72. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से प्रतिस्थापित।
73. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
73क. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

