मिथ्याकथन के लिए दंड।
मिथ्याकथन के लिए दंड।
176. (1) यदि कोर्इ व्यक्ति इस अध्याय या उसके तद्धीन बनाए गए किसी नियम के अधीन किसी सत्यापन में कोर्इ मिथ्या कथन करता है या कोर्इ ऐसा लेखा या विवरण परिदत्त करता है जो मिथ्या है और जिसके संबंध में या तो वह जानता है या विश्वास करता है कि वह मिथ्या है या उसके सत्य होने का विश्वास नहीं करता है तो वह कारावास से जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से दंडनीय होगा।
(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उपधारा (1) के अधीन दंडनीय कोर्इ अपराध उस संहिता के अर्थ में असंज्ञेय माना जाएगा।

