ऐसे व्यक्तियों का निर्धारण जिनके द्वारा कर से बचने के लिए संपत्ति का अंतरित किया जाना संभाव्य है
ट–अपनी आस्तियों को अन्यसंक्रांत करने की चेष्टा करने वाले व्यक्ति
ऐसे व्यक्तियों का निर्धारण जिनके द्वारा कर से बचने के लिए संपत्ति का अंतरित किया जाना संभाव्य है
175. धारा 4 में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी चालू निर्धारण वर्ष के दौरान निर्धारण अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी दायित्व के संदाय से बचने की दृष्टि से, किसी व्यक्ति के अपनी आस्तियों में से किसी को प्रभारित करने, बेचने, अंतरित करने, व्ययन करने या अन्यथा उससे विलग होने की संभावना है, तो उस निर्धारण वर्ष के लिए पूर्ववर्ष की समाप्ति से उस तारीख तक की अवधि के लिए जब निर्धारण अधिकारी इस धारा के अंतर्गत कार्यवाही आरंभ करता है, ऐसे व्यक्ति की कुल आय उस निर्धारण वर्ष में कर से प्रभार्य होगी और धारा 174 की उपधारा (2), (3), (4), (5) और (6) के उपबंध ऐसे किसी व्यक्ति की दशा में, किसी कार्यवाही में जहां तक हो सके ऐसे लागू होंगे जैसे वे भारत छोड़ने वाले व्यक्तियों की दशा में लागू होते हैं।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

