आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 172

अनिवासियों का पोत परिवहन कारबार

धारा

धारा संख्या

172

अध्याय शीर्षक

अध्याय XV - विशेष मामले में देयता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

अनिवासियों का पोत परिवहन कारबार

अनिवासियों का पोत परिवहन कारबार

ज–कभी-कभार किए जाने वाले पोत परिवहन कारबार से अनिवासियों के लाभ

अनिवासियों का पोत परिवहन कारबार

47172. (1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के उपबंध किसी अनिवासी के या उस द्वारा पोत भाड़े पर लिए गए किसी ऐसे पोत की दशा में, जो भारत के किसी पत्तन पर पोत में लिए गए यात्रियों,  पशुधन,  डाक  या माल  का वहन  करता  है,  कर के  उद्ग्रहण और  वसूली के  प्रयोजन के लिए लागू होंगे 48[* * *]।

(2) जहां ऐसा पोत भारत के किसी पत्तन पर पोत में लिए गए यात्रियों, पशुधन, डाक या माल का वहन करता है, वहां स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाले को या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को ऐसे वहन के संबंध में संदत्त या संदेय रकम का 49[साढ़े सात प्रतिशत] चाहे वह रकम भारत में या भारत के बाहर संदत की गर्इ है या संदेय है, ऐसे वहन के संबंध में स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाले को भारत में प्रोद्भूत होने वाली आय समझा जाएगा।

(3) ऐसे किसी पोत के भारत में किसी पत्तन से प्रस्थान के पूर्व, पोत का मास्टर उस पत्तन पर पोत के अंतिम आगमन से पोत में लिए गए सब यात्रियों, पशुधन, डाक या माल के वहन के संबंध में स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाले या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को संदत्त या संदेय पूरी रकम की विवरणी तैयार करेगा और 50[निर्धारण] अधिकारी को देगा:

परन्तु जहां 50[निर्धारण] अधिकारी का समाधान हो जाता है कि पोत के मास्टर के लिए यह संभव नहीं है कि वह इस उपधारा द्वारा अपेक्षित विवरणी, पत्तन से पोत के प्रस्थान के पूर्व दे और यदि पोत के मास्टर ने अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विवरणी दाखिल करने और कर का संदाय करने के लिए समाधानप्रद इंतजाम कर दिए हैं तो 50[निर्धारण] अधिकारी उस दशा में जिसमें विवरणी पोत के प्रस्थान के तीस दिन के अंदर दाखिल कर दी जाती है, मास्टर द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा विवरणी के दाखिल किए जाने को इस उपधारा का पर्याप्त अनुपालन मान सकेगा।

(4) विवरणी की प्राप्ति पर 50[निर्धारण] अधिकारी उपधारा (2) में निर्दिष्ट आय निर्धारित करेगा और उस पर कर के रूप में संदेय राशि का अवधारण ऐसी कंपनी की, जिसने धारा 194 में निर्दिष्ट ठहराव नहीं किए हैं, कुल आय पर लागू 51[प्रवृत्त] दर या दरों पर करेगा और ऐसी राशि पोत के मास्टर द्वारा संदेय होगी।

52[(4क) आय का निर्धारण करने संबंधी और उस पर संदेय कर की राशि का अवधारण करने संबंधी कोर्इ भी आदेश उपधारा (4) के अधीन उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से जिसमें उपधारा (3) के अधीन विवरणी दी जाती है नौ मास के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा :

परंतु जहां उपधारा (3) के अधीन विवरणी 1 अप्रैल, 2007 के पूर्व दी गर्इ है, वहां ऐसा आदेश 31 दिसंबर, 2008 को या उससे पूर्व किया जाएगा।]

(5) उपधारा (4) के अंतर्गत संदेय कर अवधारित करने के प्रयोजन के लिए 53[निर्धारण] अधिकारी ऐसे लेखे या दस्तावेज मांग सकेगा जिनकी उसको अपेक्षा हो।

(6) पोत को पत्तन निकासी पत्र तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि सीमा शुल्क कलक्टर का या उसे देने के लिए सम्यक्त: प्राधिकृत अन्य अधिकारी का समाधान नहीं हो जाता है कि इस धारा के अंतर्गत निर्धारणीय कर का सम्यक् रूप से संदाय कर दिया गया है या उसके संदाय के लिए समाधानप्रद इंतजाम कर दिए गए हैं।

(7) इस धारा की कोर्इ बात, पोत के स्वामी या पोत भाड़े पर लेने वाले को, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें भारतीय पत्तन से पोत के प्रस्थान की तारीख पड़ती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पूर्व, यह दावा करने से निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी कि उसकी पूर्ववर्ष की कुल आय का निर्धारण किया जाए और उसके आधार पर संदेय कर का अवधारण इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अनुसार किया जाए और यदि वह वैसा दावा करता है तो पूर्ववर्ष के दौरान भारतीय पत्तनों पर पोत में लिए गए यात्रियों, पशुधन, डाक या माल के संबंध में इस धारा के अंतर्गत किया गया कोर्इ संदाय उस निर्धारण वर्ष के लिए उदग्रहणीय कर के अग्रिम संदाय54 के रूप में समझा जाएगा और ऐसी संदत्त राशि और ऐसे निर्धारण पर उसके द्वारा संदेय पाए गए कर की रकम का अंतर, यथास्थिति, उसके द्वारा संदत्त या उसे प्रतिदत्त किया जाएगा।

55[(8) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उपधारा (2) में निर्दिष्ट रकम में डेमरेज प्रभार या उठार्इ-धरार्इ या उसी प्रकार की किसी अन्य रकम के रूप में संदत्त या संदेय रकम सम्मिलित होगी।]

 

47. तारीख 19.9.1995 का परिपत्र सं. 723, तारीख 14.12.1995 का परिपत्र सं. 730 और तारीख 20.12.1995 का परिपत्र सं. 732 और परिपत्र सं. 9/2001, तारीख 9.7.2001 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

48. वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.6.1975 से "जब तक कि आय-कर अधिकारी का समाधान नहीं हो जाता कि अनिवासी का ऐसा कोर्इ अभिकर्ता है जिससे इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन कर वसूलीय होगा" का लोप किया गया।

49. वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.6.1975 से "एक बटा छह प्रतिशत" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

50. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

51. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से "तत्समय" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

52. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2007 से अंत:स्थापित।

53. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

54. "कर के अग्रिम संदाय" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

55. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1976 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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