आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 171

हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का विभाजन के पश्चात् निर्धारण

धारा

धारा संख्या

171

अध्याय शीर्षक

अध्याय XV - विशेष मामले में देयता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का विभाजन के पश्चात् निर्धारण

हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का विभाजन के पश्चात् निर्धारण

छ–विभाजन

हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का विभाजन के पश्चात् निर्धारण

171. (1) अविभक्त रूप से अब तक निर्धारित हिन्दू कुटुम्ब इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उस दशा के और वहां तक कि सिवाय हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब बना रहा समझा जाएगा जिस दशा में और जहां तक उस हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब की बाबत इस धारा के अधीन विभाजन का निष्कर्ष दिया गया हो।

(2) जहां धारा 143 या धारा 144 के अधीन निर्धारण करते समय, अविभक्त रूप से निर्धारित हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के किसी सदस्य के द्वारा या उसकी ओर से यह दावा किया जाता है कि ऐसे कुटुम्ब के सदस्यों के बीच, चाहे पूर्ण या आंशिक विभाजन हो चुका है, वहां निर्धारण अधिकारी उसकी जांच कुटुम्ब के सब सदस्यों को जांच की सूचना देने के पश्चात् करेगा।

(3) जांच के पूरे होने पर निर्धारण अधिकारी इस संबंध में निष्कर्ष अभिलिखित करेगा कि क्या अविभक्त कुटुम्ब की संपत्ति का पूर्ण या आंशिक विभाजन हुआ है और यदि ऐसा विभाजन हुआ है तो वह किस तारीख को हुआ है।

(4) जहां इस धारा के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पूर्ण या आंशिक विभाजन का निष्कर्ष अभिलिखित किया गया है और विभाजन पूर्ववर्ष के दौरान हुआ हो,–

() विभाजन की तारीख तक की कालावधि की बाबत अविभक्त कुटुम्ब की कुल आय इस प्रकार निर्धारित की जाएगी मानो कोर्इ विभाजन नहीं हुआ था; और

() प्रत्येक एक सदस्य या सदस्यों का समूह ऐसे किसी कर के अतिरिक्त जिसका वह पृथक रूप से दायी है या हो सकता है और धारा 10 के खंड (2) में की किसी बात के होते हुए भी, ऐसी निर्धारित आय पर कर के लिए संयुक्तत: और पृथक्त: दायी होगा।

(5) जहां इस धारा के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पूर्ण या आंशिक विभाजन का निष्कर्ष अभिलिखित किया गया है और विभाजन पूर्ववर्ष की समाप्ति के पश्चात् हुआ है, वहां अविभक्त कुटुम्ब की पूर्ववर्ष की कुल आय इस प्रकार निर्धारित की जाएगी मानो कोर्इ विभाजन नहीं हुआ हो, और उपधारा (4) के खंड () के उपबंध इस मामले को यथासंभव लागू होंगे।

(6) इस धारा में किसी बात के होने पर यदि निर्धारण अधिकारी को हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का निर्धारण पूरा हो जाने के पश्चात् पता चलता है कि वह कुटुम्ब चाहे पूर्ण या आंशिक विभाजन पहले ही कर चुका है तो निर्धारण अधिकारी ऐसे हर व्यक्ति से कर वसूल करने की कार्रवार्इ करेगा जो विभाजन के पूर्व उस कुटुम्ब का सदस्य था और ऐसा हर व्यक्ति निर्धारित आय पर कर का संयुक्तत: और पृथक्त: दायी होगा।

(7) इस धारा के प्रयोजनों के लिए किसी सदस्य या सदस्यों के समूह के तद्धीन पृथक-पृथक दायित्व की संगणना, संयुक्त कुटुम्ब की संपत्ति के उस भाग के अनुसार की जाएगी जो उसे चाहे पूर्ण या आंशिक विभाजन पर आबंटित किया गया हो।

(8) इस धारा के उपबंध हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के चाहे पूर्ण या आंशिक, विभाजन की तारीख तक की, किसी कालावधि की बाबत किसी शास्ति, ब्याज, जुर्माने या अन्य राशि के उद्ग्रहण और संग्रहण के संबंध में यावत्शक्य वैसे ही लागू होंगे जैसे वे ऐसी किसी कालावधि की बाबत कर के उद्ग्रहण या संग्रहण के संबंध में लागू होते हैं।

(9) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जहां आंशिक विभाजन ऐसे हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के, जो अभी तक अविभक्त रूप में निर्धारित किए जाते हैं, सदस्यों में 31 दिसम्बर, 1978 के पश्चात् हुआ है, वहां–

() उपधारा (2) के अधीन उस दावे पर विचार नहीं किया जाएगा कि ऐसा आंशिक विभाजन हुआ है और उपधारा (3) के अधीन यह निष्कर्ष लेखबद्ध नहीं किया जाएगा कि ऐसा आंशिक विभाजन हुआ है और उपधारा (3) के अंतर्गत इस आशय का लेखबद्ध निष्कर्ष चाहे वह 18 जून, 1980 के जो वित्त (संख्यांक 2) विधेयक, 1980 के पुर:स्थापन की तारीख है, पहले हो या बाद में शून्य और बातिल होगा;

() ऐसा कुटुम्ब इस अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित किए जाने के लिए दायी बना रहेगा मानो ऐसा आंशिक विभाजन न हुआ हो;

() ऐसे आंशिक विभाजन के ठीक पहले ऐसे कुटुम्ब का प्रत्येक सदस्य या सदस्यों का समूह और वह कुटुम्ब इस अधिनियम के अंतर्गत उस कुटुम्ब द्वारा ऐसे आंशिक विभाजन के पहले या बाद की किसी अवधि के लिए देय कर, शास्ति, ब्याज, जुर्माने या अन्य राशि के लिए संयुक्तत: और पृथक्त: दायी होगा;

() पूर्वोक्त ऐसे सदस्य या सदस्यों के समूह का पृथक् दायित्व, ऐसे आंशिक विभाजन पर, उसको आबंटित संयुक्त कुटुम्ब की संपत्ति के भाग के अनुसार संगणित किया जाएगा,

और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

स्पष्टीकरण.–इस धारा में–

() ''विभाजन'' से अभिप्रेत है,–

(i) जहां संपत्ति का भौतिक विभाजन हो सकता है वहां संपत्ति का भौतिक विभाजन, किंतु आय का भौतिक विभाजन उस आय को उत्पन्न करने वाली संपत्ति से भौतिक विभाजन के बिना विभाजन नहीं समझा जाएगा; या

(ii) जहां संपत्ति का भौतिक विभाजन नहीं हो सकता है, वहां ऐसा विभाजन, जैसा कि उस संपत्ति का हो सकता है, किंतु केवल प्रास्थिति के विच्छेद को विभाजन नहीं समझा जाएगा;

() "आंशिक विभाजन" से ऐसा विभाजन अभिप्रेत है जो हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब गठित करने वाले व्यक्ति के या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब की संपत्तियों के या दोनों के संबंध में आंशिक है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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