किसी कारबार पुनर्गठन के संबंध में अधिकरण या न्यायालय के किसी आदेश का प्रभाव
1[किसी कारबार पुनर्गठन के संबंध में अधिकरण या न्यायालय के किसी आदेश का प्रभाव।
170क. धारा 139 में अंतर्विष्ट तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, कारबार पुनर्गठन की दशा में, जहां उच्च न्यायालय या अधिकरण या दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 5 के खंड (1) में यथापरिभाषित न्यायनिर्णयन प्राधिकारी के आदेश की तारीख से पूर्व, उस पूर्व वर्ष, जिसको ऐसा आदेश लागू होता है, से सुसंगत किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 139 के उपबंधों के अधीन उत्तराधिकारी द्वारा आय की कोई विवरणी प्रस्तुत की गई है, तो ऐसा उत्तराधिकारी, उस मास, जिसमें उक्त आदेश जारी किया गया था, के अंतिम दिन से छह मास की अवधि के भीतर, उक्त आदेश के अनुसार और उस तक सीमित, ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, उपांतरित विवरणी प्रस्तुत करेगा।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा में,-
(i) "कारबार पुनर्गठन" पद से एक या अधिक व्यक्तियों के कारबार का समामेलन या निर्विलयन या विलयन अंतर्वलित करने वाला कारबार का पुनर्गठन अभिप्रेत हैं ;
(ii) "उत्तराधिकारी" पद से किसी कारबार पुनर्गठन में सभी परिणामी कंपनियां अभिप्रेत होगा, चाहे वह कंपनी ऐसे कारबार पुनर्गठन के पूर्व अस्तित्व में थी या नहीं।]
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

