आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 170

मृत्यु पर से अन्यथा कारबार का उत्तराधिकार

धारा

धारा संख्या

170

अध्याय शीर्षक

अध्याय XV - विशेष मामले में देयता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

मृत्यु पर से अन्यथा कारबार का उत्तराधिकार

मृत्यु पर से अन्यथा कारबार का उत्तराधिकार

च–कारबार या वृत्ति का उत्तराधिकार

मृत्यु पर से अन्यथा कारबार का उत्तराधिकार

170. (1) जहां किसी व्यक्ति का (ऐसा व्यक्ति इसके पश्चात् इस धारा में पूर्वाधिकारी के रूप में निर्दिष्ट है) जो कोई कारबार या वृत्ति चलाता है, उसमें उत्तराधिकार ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा (जो उसके पश्चात् इस धारा में उत्तराधिकारी के रूप में निर्दिष्ट है) ग्रहण किया जाता है जो उस कारबार या वृत्ति को चलाता रहता है, वहां–

() पूर्वाधिकारी, पूर्ववर्ष की, जिसमें उत्तराधिकार हुआ है, उत्तराधिकार की तारीख तक आय की बाबत निर्धारित किया जाएगा;

() उत्तराधिकारी उत्तराधिकार की तारीख के पश्चात् पूर्ववर्ष की आय की बाबत निर्धारित किया जाएगा।

(2) उपधारा (1) में की किसी बात के होते हुए भी, जब पूर्वाधिकारी नहीं पाया जा सकता है, तब पूर्ववर्ष की, जिसमें उत्तराधिकार हुआ, की आय का निर्धारण उत्तराधिकार की तारीख तक और उस वर्ष से पहले की पूर्ववर्ष की आय का निर्धारण उत्तराधिकारी पर उसी रीति में और उसी सीमा तक किया जाएगा जिसमें और जिस तक वह पूर्वाधिकारी पर किया जाता है और इस अधिनियम के सब उपबंध, यावत्शक्य, तदनुसार लागू होंगे।

1[(2क) उपधारा (1) और उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई उत्तराधिकार है, ऐसे उत्तराधिकार के लंबन के अनुक्रम के दौरान, पूर्वाधिकारी को किए गए या आरंभ किए गए निर्धारण या पुन:निर्धारण या अन्य कार्यवाहियों को उत्तराधिकारी को किया गया या आरंभ किया गया समझा जाएगा, और इस अधिनियम के सभी उपबंध, यथाशक्य, तद्नुसार लागू होंगे।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “लंबित रहने” पद से, यथास्थिति, उच्च न्यायालय या अधिकरण के समझ कारबार के ऐसे उत्तराधिकार के लिए आवेदन फाइल करने की तारीख या दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 5 के खंड (1) में यथा परिभाषित किसी न्याय निर्णयन प्राधिकारी द्वारा कारपोरेट दिवाला संकल्प के लिए आवोदन ग्रहण करने की तारीख से आरंभ होने वाली और उस तारीख को समाप्त होने वाली अवधि अभिप्रेत है, जिसको, यथास्थिति, ऐसे उच्च न्यायालय या अधिकरण या ऐसे न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश, प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है।]

(3) जब ऐसे पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें उत्तराधिकार हुआ, उत्तराधिकार की तारीख तक या उस वर्ष से पहले के पूर्ववर्ष के लिए, ऐसे कारबार या वृत्ति की आय की बाबत इस धारा के अंतर्गत संदेय कोई राशि, जो पूर्वाधिकारी पर निर्धारित है, उससे वसूल नहीं की जा सकती है तब निर्धारण अधिकारी इस प्रभाव का निष्कर्ष अभिलिखित करेगा और पूर्वाधिकारी द्वारा संदेय राशि तत्पश्चात् उत्तराधिकारी द्वारा संदेय और वसूल की जा सकेगी और उत्तराधिकारी इस प्रकार संदत्त किसी राशि को पूर्वाधिकारी से वसूल करने का हकदार होगा।

(4) जहां किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब द्वारा चलाया जा रहा कोई कारबार या वृत्ति उत्तराधिकार में जाती है और उत्तराधिकार के साथ ही या उत्तराधिकार के बाद सदस्यों या सदस्यों के समूह में अविभक्त कुटुम्ब संपत्ति का विभाजन हुआ है, वहां उत्तराधिकार में इस कारबार या वृत्ति की उत्तराधिकार की तारीख तक की आय की बाबत देय कर, धारा 171 में उपबंधित रीति में किन्तु इस धारा के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निर्धारित और वसूल किया जाएगा।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''आय'' के अंतर्गत कोई ऐसा अभिलाभ भी सम्मिलित है जो उत्तराधिकार के फलस्वरूप कारबार या वृत्ति के, किसी भी रीति में, अंतरण से प्रोद्भूत होता है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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