वेतन, विशेषाधिकार और परिभाषित वेतन के एवज में मुनाफे
"वेतन", "परिलब्धि" और "वेतन के बदले में लाभ" की परिभाषा
8017. 81धारा 15 और 16 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(1) "वेतन"82 के अन्तर्गत82 निम्नलिखित भी हैं–
(i) मजदूरी;
(ii) कोर्इ वार्षिकी या पेंशन;
(iii) कोर्इ उपदान;82क
(iv) किसी वेतन या मजदूरी के बदले में या उसके अतिरिक्त कोर्इ फीस, कमीशन, परिलब्धियां या लाभ;
(v) वेतन का कोर्इ अग्रिम संदाय;
83[(vक) किसी कर्मचारी द्वारा ऐसी किसी छुट्टी की अवधि की बाबत जिसका उसने उपभोग नहीं किया है, प्राप्त कोर्इ संदाय;]
(vi) किसी मान्यताप्राप्त भविष्य निधि में भाग लेने वाले किसी कर्मचारी के जमा अतिशेष में हुर्इ वार्षिक वृद्धि, उस सीमा तक जिस तक वह चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 6 के अधीन कर से प्रभार्य है; और
(vii) उन सब राशियों का योग जो किसी मान्यताप्राप्त भविष्य निधि में भाग लेने वाले किसी कर्मचारी के ऐसे अन्तरित अतिशेष में समाविष्ट है जैसा चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 11 के उपनियम (2) में निर्दिष्ट है, उस सीमा तक जिस तक वह उसके उपनियम (4) के अधीन कर से प्रभार्य है;
84(2) "परिलब्धि" के अंतर्गत निम्नलिखित भी है—
85(i) निर्धारिती को उसके नियोजक द्वारा दी गर्इ किराया मुक्त वास-सुविधा का मूल्य;
(ii) निर्धारिती को उसके नियोजक द्वारा दी गर्इ किसी वास-सुविधा की बाबत किराया विषयक किसी रियायत का मूल्य;
(iii) निम्नलिखित दशाओं में से किसी नि:शुल्क या रियायती दर पर अनुदत्त या प्रदत्त प्रसुविधा या सुख-सुविधा का मूल्य :—
(क) किसी कम्पनी द्वारा ऐसे कर्मचारी को, जो उसका निदेशक है;
(ख) किसी कम्पनी द्वारा किसी कर्मचारी को जो ऐसा व्यक्ति है जो कम्पनी में पर्याप्त रूप से हितबद्ध है;
(ग) किसी नियोजक द्वारा (जिसके अंतर्गत कम्पनी भी है) किसी कर्मचारी की, जिसे इस उपखण्ड के पैरा (क) तथा (ख) के उपबंध लागू नहीं होते हैं और 86["वेतन" शीर्ष के अधीन जिसकी आय (चाहे एक या अधिक नियोजक से देय या उनके द्वारा संदत्त या अनुज्ञात है) उन सभी फायदों या सुख-सुविधाओं के, जिन्हें धन के रूप में नहीं दिया गया है, मूल्य को छोड़कर चौबीस हजार रुपए से अधिक है :
वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (iii) में निम्नलिखित परन्तुक अन्त:स्थापित किया जाएगा :
परन्तु इस उपखंड में की कोर्इ बात नियोजक द्वारा अपने कर्मचारी को कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना या उक्त कंपनी की स्कीम प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत के अधीन प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: शेयरों, डिबेंचरों या वारन्टों के आबंटन के रूप में अपने कर्मचारियों को नि:शुल्क या रियायती दर पर कम्पनी द्वारा दिए गए किसी फायदे के मूल्य के बारे में लागू नहीं होगी।
87-88[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी कम्पनी या नियोजक द्वारा निर्धारिती को उसके निवास से उसके कार्यालय या कार्य के अन्य स्थान तक अथवा ऐसे कार्यालय या स्थान से उसके निवास तक यात्रा करने के लिए दिए गए यान का उपयोग, इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए उसे नि:शुल्क या रियायती दर पर अनुदत्त या प्रदत्त फायदा या सुख-सुविधा नहीं समझा जाएगा;]
(iiiक) 89[किसी व्यक्ति द्वारा किसी ऐसे व्यष्टि को, जो उस व्यक्ति के नियोजन में है या रहा है, नि:शुल्क या रियायती दर पर, प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत:, आबंटित या अंतरित किसी विनिर्दिष्ट प्रतिभूति का मूल्य :
परंतु किसी ऐसी दशा में, जिसमें विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों का आबंटन या अंतरण किसी व्यष्टि द्वारा प्रयोग किए गए विकल्प के अनुसरण में किया जाता है, विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों का मूल्य उस पूर्ववर्ष में कराधेय होगा, जिसमें ऐसे विकल्प का ऐसे व्यष्टि द्वारा प्रयोग किया जाता है।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "लागत" से अभिप्रेत है विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों को अर्जित करने के लिए वास्तव में संदत्त रकम और जहां कोर्इ धन संदत्त नहीं किया गया है वहां लागत शून्य मानी जाएगी;
(ख) "विनिर्दिष्ट प्रतिभूति" से ऐसी प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 की धारा (2) के खंड (ज) में परिभाषित हैं और इसके अंतर्गत कर्मचारी स्टाक विकल्प और श्रमसाध्य (स्वेट) साधारण शेयर भी हैं;
(ग) "श्रमसाध्य साधारण शेयर" से ऐसे साधारण शेयर अभिप्रेत हैं जो कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों या निदेशकों को बट्टे पर या व्यवहार ज्ञान उपलब्ध कराने या बौद्धिक संपत्ति अधिकारों या मूल्य परिवर्धनों, चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए, के रूप में अधिकार उपलब्ध कराने के लिए नकद से भिन्न प्रतिफल के लिए निर्गमित किए गए हैं; और
(घ) "मूल्य" से विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों का अर्जन करने के लिए उचित बाजार मूल्य और लागत के बीच का अंतर अभिप्रेत है।]
(iv) कोर्इ ऐसी राशि जो किसी बाध्यता की बाबत नियोजक द्वारा संदत्त की गर्इ हो और यदि ऐसा संदाय न किया जाता तो निर्धारिती द्वारा संदेय होती;
(v) कोर्इ ऐसी राशि जो निर्धारिती के जीवन के बीमा के लिए या वार्षिकी की संविदा के लिए चाहे सीधे ही अथवा किसी ऐसी निधि से, जो मान्यताप्राप्त भविष्य निधि या अनुमोदित अधिवार्षिकी निधि 90[या, यथास्थिति, कोयला खान भविष्य निधि तथा प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1948 (1948 का 46) की धारा 3छ के अधीन या कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 (1952 का 19) की धारा 6ग के अधीन स्थापित निक्षेप सहबद्ध बीमा निधि से भिन्न है नियोजक द्वारा संदेय हो :
91[परन्तु इस खंड की कोर्इ बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी,–
(i) नियोजक द्वारा चलाए जा रहे किसी अस्पताल में, कर्मचारी या उसके कुटुम्ब के किसी सदस्य को उपलब्ध कराए गए किसी चिकित्सीय उपचार का मूल्य;
92[(ii) नियोजक द्वारा किसी ऐसे व्यय के संबंध में दी गर्इ राशि, जो कर्मचारी द्वारा अपने इलाज पर या अपने कुटुंब के किसी सदस्य के उपचार पर—
(क) सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा चलाए जा रहे किसी अस्पताल में या सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के इलाज के प्रयोजन के लिए अनुमोदित93 किसी अन्य अस्पताल94 में;
(ख) विहित 93रोगों या व्याधियों के संबंध में, किसी ऐसे अस्पताल में जो, विहित मार्गदर्शक95 सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए मुख्य आयुक्त द्वारा अनुमोदित किया जाए,
वस्तुत: उपगत किया जाता है :
परंतु यह कि उपखंड (ख) के अंतर्गत आने वाले मामले में, कर्मचारी अपनी आय की विवरणी के साथ उस रोग या व्याधि को, जिसके लिए इलाज अपेक्षित था, विनिर्दिष्ट करते हुए, अस्पताल से प्रमाणपत्र और अस्पताल को दी गर्इ रकम की रसीद संलग्न करेगा;]
(iii) किसी नियोजक द्वारा किसी कर्मचारी के संबंध में, धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (iख) के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किसी स्कीम के अधीन ऐसे कर्मचारी के स्वास्थ्य का बीमा कराने या उसे प्रवृत्त रखने के लिए दिए गए प्रीमियम का कोर्इ भाग;
(iv) धारा 80घ के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किसी स्कीम के अधीन कर्मचारी द्वारा अपने स्वास्थ्य का या अपने कुटुम्ब के किसी सदस्य के स्वास्थ्य का बीमा कराने या उसे प्रवृत्त रखने के लिए संदत्त किसी प्रीमियम की बाबत नियोजक द्वारा दी गर्इ कोर्इ राशि;
(v) कर्मचारी द्वारा अपने चिकित्सीय उपचार पर या अपने कुटुम्ब के किसी सदस्य के उपचार पर [उस उपचार से भिन्न जो खंड (i) और खंड (ii) में निर्दिष्ट है] वस्तुत: उपगत किसी व्यय की बाबत नियोजक द्वारा संदत्त कोर्इ राशि; किन्तु यह तब जबकि ऐसी राशि, पूर्ववर्ष में 96[पंद्रह] हजार रुपए से अधिक न हो ;
(vi) किसी नियोजक द्वारा,—
(1) कर्मचारी या ऐसे कर्मचारी के कुटुम्ब के किसी सदस्य के भारत के बाहर चिकित्सीय उपचार पर;
(2) कर्मचारी या ऐसे कर्मचारी के कुटुम्ब के किसी सदस्य के चिकित्सीय उपचार के लिए विदेश यात्रा पर 97[और] विदेश में ठहरने पर;
(3) ऐसे एक परिचर की, जो ऐसे उपचार के संबंध में रोगी के साथ जाता है, विदेश यात्रा और विदेश में ठहरने पर,
किया गया कोर्इ व्यय,
98[किंतु यह इस शर्त के अधीन होगा कि—
(अ) चिकित्सीय उपचार पर और विदेश में ठहरने पर व्यय, केवल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुज्ञात मात्रा तक ही परिलब्धियों में से अपवर्जित किया जाएगा; और
(आ) यात्रा पर व्यय, केवल ऐसे कर्मचारी की दशा में जिसकी सकल कुल आय, जैसी कि वह उसमें उक्त व्यय को सम्मिलित करने के पूर्व संगणित की गर्इ है, दो लाख रुपए से अधिक नहीं है, परिलब्धियों में से अपवर्जित किया जाएगा;]
(vii) कर्मचारी द्वारा खंड (vi) में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों में से किसी के लिए, वस्तुत: उपगत किसी व्यय की बाबत नियोजक द्वारा संदत्त कोर्इ राशि, किंतु यह उस खंड में या उसके अधीन विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन होगी।
स्पष्टीकरण.–खंड (2) के प्रयोजनों के लिए,—
(i) "अस्पताल" के अन्तर्गत कोर्इ औषधालय या क्लीनिक 99[या परिचर्या गृह] है;
(ii) किसी व्यष्टि की दशा में, "कुटुम्ब" का वही अर्थ है जो धारा 10 के खंड (5) में उसका है; और
(iii) "सकल कुल आय" का वही अर्थ है जो धारा 80ख के खंड (5) में उसका है;]
1[* * *]
2(3) "वेतन के बदले में लाभ3" के अन्तर्गत निम्नलिखित भी है–
(i) किसी प्रतिकर3 की रकम जो किसी निर्धारिती को अपने नियोजक से या भूतपूर्व नियोजक से अपने नियोजन के पर्यवसान पर या उसके संबंध में या तत्सम्बद्ध निबंधनों और शर्तों के उपान्तरण पर देय या प्राप्त हो;
(ii) कोर्इ संदाय (जो धारा 10 के खंड (10) 4[, खंड (10क)] 5[, खण्ड (10ख)], खंड (11), 6[खण्ड (12) 7[, खण्ड (13)] या (13क)] में निर्दिष्ट किसी संदाय से भिन्न हो) जो किसी निर्धारिती को अपने नियोजक से या भूतपूर्व नियोजक से या भविष्य निधि या अन्य निधि से 8[***] देय हो प्राप्त हो, उस मात्रा तक जिसे वह निर्धारिती द्वारा किए गए अभिदायों या 9[ऐसे अभिदायों पर ब्याज के रूप में हो या ऐसी कीमैन बीमा पालिसी पर बोनस के रूप में आबंटित राशि सहित ऐसी पालिसी के अधीन प्राप्त कोर्इ राशि]।
स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए "कीमैन बीमा पालिसी" पद का वही अर्थ होगा जो धारा 10 के खंड (10घ) में उसका है।]
10[* * *]
80. परिपत्र सं. 150, तारीख 19.11.1974, परिपत्र सं. 130, तारीख 16.3.1974, परिपत्र सं. 374, तारीख 14.12.1983 से, अनुदेश सं. 1145/1146 [फा.सं. 200/9/78-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 27.1.1978, पत्र फा.सं. 35/50/65-आर्इ.टी. (बी.), तारीख 27.4.1966, परिपत्र सं. 5, तारीख 6.9.1950, परिपत्र सं. 311, तारीख 24.8.1981, परिपत्र सं. 41(LVIII-2), तारीख 27.10.1956, पत्र फा.सं. 35/7/65-आर्इ.टी. (बी.), तारीख 12.2.1965, परिपत्र सं. 122, तारीख 19.10.1973, अनुदेश सं. 1145 [फा.सं. 200/6/78-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 27.1.1978, अनुदेश सं. 133 का पैरा 1, तारीख 10.2.1969, परिपत्र सं. 603, तारीख 6.6.1991, परिपत्र सं. 662, तारीख 27.9.1993, परिपत्र सं. 710, तारीख 24.7.1995, परिपत्र सं. 708, तारीख 18.1.1995, परिपत्र सं. 727, तारीख 27.10.1995 से यथा संशोधित भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
81. सुसंगत केस लाज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
82. "वेतन" और "के अंतर्गत" पदों के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
82क. "कोर्इ उपदान" पद के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
83. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1978 भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
84. नियम 3 देखिए।
85. मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952/संसद अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953 की धारा 10क और संसद में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 की धारा 9क के अनुसार मंत्री/संसद के अधिकारी और विपक्षी नेता के लिए सुसज्जित किराया मुक्त आवास (उसके रख-रखाव सहित) का मूल्य "वेतन" शीर्ष के अन्तर्गत कर से प्रभार्य उसकी आय की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
86. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से "वेतन' शीर्ष के अन्तर्गत, उन सब फायदों या सुख-सुविधाओं के, जिन्हें धन के रूप में नहीं दिया गया है, मूल्य को छोड़कर, अट्ठारह हजार रुपए से अधिक है;" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
87-88. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।
89. खंड (iiiक) वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से लोप किया जाएगा। इसके लोप से पहले, उपखंड (iiiक), वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित किया गया था।
90. श्रमिक भविष्य निधि विधियां (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा 1.8.1976 से अंत:स्थापित।
91. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।
92. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1993 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से प्रतिस्थापित खंड (ii) इस प्रकार था :
"(ii) नियोजक द्वारा–
(शेष पृष्ठ 1.150 पर)
(पृष्ठ 1.151 से आगे)
(क) कर्मचारी द्वारा अपने इलाज पर या अपने कुटुम्ब के किसी सदस्य के इलाज पर सरकार द्वारा अथवा सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा चलाए जा रहे किसी अस्पताल में या सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के इलाज के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित किसी अन्य अस्पताल में वस्तुत: उपगत किसी व्यय की बाबत संदत्त कोर्इ राशि;
(ख) किसी ऐसे अस्पताल को जो विहित रोगों या व्याधियों के इलाज के प्रयोजनों के लिए विहित मार्गदर्शक सिद्धान्तों को ध्यान में रखते हुए मुख्य आयुक्त द्वारा अनुमोदित है, कर्मचारी या उसके कुटुम्ब के किसी सदस्य के ऐसे इलाज मद्दे सीधे संदत्त कोर्इ राशि;"
93. विहित रोगों के लिए देखिये नियम 3क(2)।
94. केन्द्रीय सरकार स्वास्थ्य स्कीम के अधीन मान्यताप्राप्त अस्पतालों की सूची के लिए देखिये परिपत्र सं. 603, तारीख 6.6.1991, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
95. मुख्य आयुक्त का अनुमोदन पाने के लिए अस्पताल द्वारा पूरी की जाने वाली शर्तों के लिए देखिये नियम 3क(1)।
96. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से "दस" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
97. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से "या" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
98. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "इस शर्त के अधीन रहते हुए" से प्रारंभ होने वाले और "ध्यान में रखते हुए, विहित करे", से समाप्त होने वाला भाग जो वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से संशोधित किया गया था, इस प्रकार था:
"इस शर्त के अधीन रहते हुए कि इस खंड के उपखंड (2) और (3) में निर्दिष्ट यात्रा पर व्यय परिलब्धि में से उसी कर्मचारी की दशा में अपवर्जित किया जाएगा जिसकी सकल कुल आय, जो उसमें उक्त व्यय सम्मिलित करने से पूर्व यथा संगणित, दो लाख रुपए से अधिक नहीं है, और ऐसे व्यय के संबंध में ऐसी और शर्तों तथा सीमाओं के अधीन रहते हुए जो बोर्ड, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस निमित्त जारी किए गए दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, विहित करे;"
99. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।
1. उपखंड (iv) और (v) में पारिमाणिक संशोधनों के साथ-साथ उपखंड (vi) का वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से लोप किया गया। मूल उपखंड कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित किया गया था। इस प्रकार संशोधन कभी भी लागू नहीं हुआ।
2. पत्र सं. 35/26/64-आर्इ.टी.(बी.), तारीख 25.5.1964 भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
3. "लाभ" और "प्रतिकर" पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
4. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अन्त:स्थापित।
5. वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अन्त:स्थापित।
6. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से "या खंड (12)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
7. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से अन्त:स्थापित।
8. यथोक्त द्वारा "(जो अनुमोदित अधिवर्षित निधि न हो)" शब्दों का लोप किया गया।
9. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से "ऐसे अभिदायों पर ब्याज" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
10. उपशीर्ष "ख.–प्रतिभूतियों पर ब्याज" और धारा 18 से 21 का वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। इससे पूर्व उपशीर्ष और धारा 18 का वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से और वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से संशोधन किया गया था और धारा 19 और 20 का संशोधन वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से किया गया था।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

