जहां व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय के सदस्यों के अंश अज्ञात हैं वहां कर प्रभारित किया जाना आदि
36[जहां व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय के सदस्यों के अंश अज्ञात हैं वहां कर प्रभारित किया जाना आदि
37167ख. (1) जहां किसी व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय के सदस्यों की (जो किसी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अंतर्गत या भारत के किसी भाग में प्रवृत्त उस अधिनियम के तत्समान किसी विधि के अंतर्गत रजिस्ट्रीकृत किसी सोसाइटी से भिन्न है) संपूर्ण आय में या ऐसे संगम या निकाय की आय के किसी भाग में उनके अलग-अलग अंश अनवधारित या अज्ञात हैं, वहां संगम या निकाय की कुल आय पर कर अधिकतम मार्जिन दर से प्रभारित किया जाएगा:
परन्तु जहां ऐसे संगम या निकाय के किसी सदस्य की कुल आय कर के लिए ऐसी दर पर प्रभार्य है, जो अधिकतम मार्जिन दर से उच्चतर है, वहां संगम या निकाय की कुल आय पर कर ऐसी उच्चतम दर पर प्रभार्य होगा।
(2) जहां पूर्वोक्त व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय के मामले में [जो उपधारा (1) के अधीन आने वाला मामला नहीं है],–
(i) पूर्ववर्ती वर्ष के लिए उसके किसी सदस्य की कुल आय (ऐसे संगम या निकाय से उसके अंश को छोड़कर) उस अधिकतम रकम से अधिक है जो उस सदस्य के मामले में सुसंगत पूर्ववर्ष के वित्त अधिनियम के अंतर्गत कर से प्रभार्य नहीं है, वहां ऐसे संगम या निकाय की कुल आय पर कर अधिकतम मार्जिन दर से प्रभारित किया जाएगा।
(ii) उनका कोर्इ सदस्य ऐसी दर या दरों पर कर से प्रभार्य है या हैं, जो अधिकतम अर्जित दर से उच्चतर है, वहां ऐसे संगम या निकाय की कुल आय के उस प्रभाग या प्रभागों पर कर प्रभारित किया जाएगा, जो यथास्थिति, ऐसी उच्चतर दर या दरों पर ऐसे सदस्य या सदस्यों के अंश या अंशों से संबंधित है या हैं, और संगम या निकाय की कुल आय के अतिशेष पर अधिकतम मार्जिन दर से कर प्रभारित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी व्यक्ति संगम या व्यष्टि निकाय की संपूर्ण आय में या उसके किसी भाग में ऐसे संगम या निकाय के सदस्यों के अलग-अलग अंश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह अनवधारित या अज्ञात है यदि ऐसे अंश (ऐसी संपूर्ण आय या उसके किसी भाग के संबंध में) ऐसा संगम या निकाय बनाए जाने की तारीख को या उसके बाद किसी समय अनवधारित या अज्ञात है।]
36. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
37. परिपत्र सं. 577, तारीख 4.9.1990 भी देखें। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

