प्रत्यक्ष निर्धारण या वसूली का वर्जित न होना
घ–प्रतिनिधि निर्धारिती – प्रकीर्ण उपबंध
प्रत्यक्ष निर्धारण या वसूली का वर्जित न होना
166. इस अध्याय की पूर्ववर्ती धाराओं की कोर्इ बात न तो उस व्यक्ति के, जिसकी ओर से या जिसके फायदे के लिए इसमें निर्दिष्ट आय प्राप्य है, प्रत्यक्ष निर्धारण और न ही ऐसे व्यक्ति से ऐसी आय की बाबत संदेय कर की वसूली से निवारित करेगी।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

